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3 min read | अपडेटेड January 15, 2026, 13:39 IST
सारांश
Textile sector: निर्यात के मोर्चे पर तस्वीर मिली-जुली रही है। नवंबर 2025 में भारत के टेक्सटाइल और गारमेंट एक्सपोर्ट में 9.4% की बढ़त दर्ज की गई और निर्यात $2,855 मिलियन तक पहुंच गया। हालांकि, अक्टूबर 2025 में अमेरिकी टैरिफ के असर से टेक्सटाइल निर्यात में 12.91% की गिरावट आई थी।

Textile Sector: बजट 2025-26 में सरकार ने टेक्सटाइल मंत्रालय को ₹5,272 करोड़ का आवंटन दिया था।
बजट 2025-26 में सरकार ने टेक्सटाइल मंत्रालय को ₹5,272 करोड़ का आवंटन दिया था, जो पिछले साल के मुकाबले 19% ज्यादा है। कपास की कम होती उत्पादकता को सुधारने के लिए बजट FY26 में पांच साल का “कॉटन मिशन” शुरू करने की घोषणा की गई। इसके तहत खासतौर पर एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल कपास की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर और किसानों को विज्ञान व तकनीक का समर्थन देने की बात कही गई।
घरेलू तकनीकी वस्त्र जैसे एग्रो-टेक्सटाइल, मेडिकल टेक्सटाइल और जियोटेक्सटाइल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दो और तरह के शटललेस लूम्स को पूरी तरह टैक्स-फ्री मशीनरी की सूची में शामिल किया है। इसके अलावा, FY26 बजट में निटेड फैब्रिक पर बेसिक कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 20% या ₹115 प्रति किलो कर दी गई, जिससे सस्ते आयात पर रोक लगे और घरेलू निर्माताओं की प्रतिस्पर्धा बढ़े।
निर्यात के मोर्चे पर तस्वीर मिली-जुली रही है। नवंबर 2025 में भारत के टेक्सटाइल और गारमेंट एक्सपोर्ट में 9.4% की बढ़त दर्ज की गई और निर्यात $2,855 मिलियन तक पहुंच गया। हालांकि, अक्टूबर 2025 में अमेरिकी टैरिफ के असर से टेक्सटाइल निर्यात में 12.91% की गिरावट आई थी, जिससे उद्योग संगठनों ने राहत की मांग तेज कर दी।
अमेरिका भारत के टेक्सटाइल सेक्टर का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। साल 2024-25 में भारत के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर का कुल आकार करीब $179 अरब रहा, जिसमें $142 अरब का घरेलू बाजार और $37 अरब का निर्यात शामिल है। यह सेक्टर देश में 4.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है।
ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट श्रीकुमार कृष्णमूर्ति के मुताबिक, 2025 टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, खासकर अपैरल और होम टेक्सटाइल सेगमेंट में। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी टैरिफ पर जल्दी समाधान नहीं निकला, तो निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा और ऑर्डर फ्लो प्रभावित रहेगा। इसलिए बजट 2026 में निर्यातकों के लिए अस्थायी राहत योजनाएं, सस्ते लोन और MSME सपोर्ट जैसे कदम जरूरी हैं।
EY इंडिया का मानना है कि बजट 2026 में सरकार को वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ लक्षित सुधारों पर ध्यान देना चाहिए। स्पष्ट और स्थिर नीतियां, टैक्स में निश्चितता और सरकारी निवेश से निजी निवेश बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने बजट से पहले सरकार से ड्यूटी-फ्री कॉटन इंपोर्ट की मांग की है। संगठन का कहना है कि 11% कॉटन इंपोर्ट ड्यूटी हटाने से घरेलू कंपनियों की लागत कम होगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। फिलहाल कपास आयात पर छूट 31 दिसंबर 2025 तक थी, लेकिन 1 जनवरी 2026 से ड्यूटी दोबारा लागू हो गई है, जिससे सेक्टर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
CITI ने यह भी बताया कि भारत में कपास उत्पादन लगातार घट रहा है और इस साल यह दो दशकों के निचले स्तर पर जा सकता है। इससे सप्लाई की चिंता बढ़ गई है। कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
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