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आम बजट 2026-27 पेश हो से पहले समझ लें किन-किन आंकड़ों पर टिकी है देशभर की नजर

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 31, 2026, 17:30 IST

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सारांश

निर्मला सीतारमण ने 2019 में अपने पहले बजट में दशकों से चले आ रहे चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटे पारंपरिक 'बही-खाता' का अनुकरण किया था। पिछले चार सालों की तरह इस साल का बजट भी पेपरलेस तरीके से पेश किया जाएगा।

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बजट 2026-27 पेश होने से पहले समझ लें ये सभी आंकड़े

केंद्रीय बजट पेश होने में अब कुछ ही घंटे बचे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना लगातार 9वां बजट पेश कर एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं। इस बार सभी की नजरें बहुप्रतीक्षित सीमा शुल्क सुधारों पर टिकी होंगी। सीतारमण ने 2019 में अपने पहले बजट में दशकों से चले आ रहे चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटे पारंपरिक 'बही-खाता' का अनुकरण किया था। पिछले चार सालों की तरह इस साल का बजट भी पेपरलेस तरीके से पेश किया जाएगा।

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आम बजट 2025-26 के वे प्रमुख आंकड़े जिन पर नजर रखना जरूरी है-
राजकोषीय घाटा: सरकार के कुल खर्च और आय के बीच का अंतर राजकोषीय घाटा कहलाता है। चालू वित्त वर्ष (2025-26) के लिए इसके जीडीपी के 4.4% पर रहने का अनुमान लगाया गया है। बजट में 4.5% से नीचे का लक्ष्य हासिल करने के बाद, बाजार अब कर्ज-जीडीपी अनुपात में कमी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सटीक आंकड़ों का इंतजार कर रहा है। उम्मीद है कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4% के राजकोषीय घाटे की घोषणा कर सकती है।
पूंजीगत व्यय: चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार का नियोजित पूंजीगत व्यय 11.2 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है। प्राइवेट सेक्टर के निवेशकों की सावधानी को देखते हुए, सरकार आगामी बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च को बनाए रख सकती है और इसमें 10-15% की वृद्धि कर सकती है। यह राशि 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है।
कर्ज की रूपरेखा: वित्त मंत्री ने 2024-25 के बजट भाषण में कहा था कि वित्त वर्ष 2026-27 से राजकोषीय नीति का प्रयास केंद्र सरकार के कर्ज को जीडीपी के प्रतिशत के रूप में कम करने का होगा। बाजार यह देखना चाहेगा कि सरकार कर्ज-जीडीपी अनुपात को कब तक 60% के लक्ष्य तक लाने की बात कहती है। 2024 में यह अनुपात 85% था, जिसमें केंद्र का हिस्सा 57% था।
उधारी: वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार की सकल उधारी का बजट 14.80 लाख करोड़ रुपये था। सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए बाजार से कर्ज लेती है। उधारी का आंकड़ा देश की आर्थिक सेहत और रेवेन्यू कलेक्शन की स्थिति का संकेत देता है।
टैक्स रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में सकल कर राजस्व का लक्ष्य 42.70 लाख करोड़ रुपये रखा गया था, जो पिछले साल से 11% अधिक है। इसमें 25.20 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर (आयकर और कॉरपोरेट कर) और 17.5 लाख करोड़ रुपये अप्रत्यक्ष कर (सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और जीएसटी) से आने का अनुमान है।
जीएसटी: वित्त वर्ष 2025-26 में जीएसटी कलेक्शन 11% बढ़कर 11.78 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। सितंबर 2025 से दरों में की गई कटौती के बाद राजस्व वृद्धि में तेजी आने की उम्मीद है, इसलिए वित्त वर्ष 2026-27 के अनुमानों पर विशेष ध्यान रहेगा।
जीडीपी वृद्धि: वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की मौजूदा कीमतों पर जीडीपी वृद्धि (वास्तविक जीडीपी + मुद्रास्फीति) का अनुमान 10.1% है, जबकि वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4% रहने का अनुमान है। हालांकि, मुद्रास्फीति कम रहने के कारण मौजूदा कीमतों पर जीडीपी को घटाकर 8% कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह अनुमान 10.5 से 11% के बीच रहने की उम्मीद है।
भाषा इनपुट के साथ
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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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