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Gold-Silver ETF में भारी उथल-पुथल पर SEBI सख्त, प्राइस बैंड नियमों की होगी समीक्षा

Upstox

3 min read | अपडेटेड February 16, 2026, 17:16 IST

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सारांश

SEBI ने यह भी समझाया कि कुछ शेयरों पर निगरानी के तहत और ज्यादा सख्त प्राइस बैंड लगाए जाते हैं। वहीं पूरे बाजार के स्तर पर 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 20 प्रतिशत के सर्किट ब्रेकर भी होते हैं। ये सर्किट ब्रेकर तब लगते हैं जब BSE Sensex या NSE Nifty 50 में से कोई एक तय सीमा से ज्यादा गिरता या चढ़ता है, जो भी पहले होता है।

ETF

SEBI ने आगे ETF सेगमेंट में नए प्राइस बैंड ढांचे का प्रस्ताव रखा है।

Gold-Silver ETF: मार्केट रेगुलेटर SEBI गोल्ड और सिल्वर ETFs में हो रही तेज उठापटक को कंट्रोल करने की तैयारी में है। एक कंसल्टेशन पेपर में SEBI ने कहा कि वह एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) के लिए बेस प्राइस और प्राइस बैंड की समीक्षा करेगा। इस प्रस्ताव पर आम लोगों और निवेशकों से राय भी मांगी गई है। अगर यह नियम लागू होते हैं, तो ETF सेगमेंट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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SEBI ने क्या कहा?

SEBI ने बताया कि फिलहाल शेयर बाजार में ज्यादातर स्क्रिप्स पर 20 प्रतिशत ऊपर या नीचे तक का प्राइस बैंड लागू होता है। यह नियम उन सभी शेयरों पर लागू होता है जो रोलिंग सेटलमेंट में ट्रेड होते हैं, सिवाय उन शेयरों के जिन पर डेरिवेटिव्स (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) उपलब्ध हैं। यानी सामान्य हालात में किसी ETF या शेयर की कीमत एक दिन में इससे ज्यादा नहीं बढ़ या गिर सकती।

इसके अलावा SEBI ने यह भी समझाया कि कुछ शेयरों पर निगरानी के तहत और ज्यादा सख्त प्राइस बैंड लगाए जाते हैं। वहीं पूरे बाजार के स्तर पर 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 20 प्रतिशत के सर्किट ब्रेकर भी होते हैं। ये सर्किट ब्रेकर तब लगते हैं जब BSE Sensex या NSE Nifty 50 में से कोई एक तय सीमा से ज्यादा गिरता या चढ़ता है, जो भी पहले होता है।

SEBI ने हाल ही में ETF बाजार में आई तेज अस्थिरता की ओर ध्यान दिलाया। रेगुलेटर ने कहा कि जनवरी 2026 के आखिरी हफ्ते में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में काफी तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। इस वजह से गोल्ड और सिल्वर ETFs के लिए जो मौजूदा प्राइस बैंड तय थे, वे पर्याप्त नहीं रहे। खासतौर पर इसलिए क्योंकि ये प्राइस बैंड T-2 दिन की NAV (नेट एसेट वैल्यू) के आधार पर तय किए जाते हैं, जिससे ETF की बाजार कीमत और असली एसेट की कीमत में फर्क आ गया।

इस समस्या से निपटने के लिए SEBI ने एक अस्थायी कदम भी उठाया। रेगुलेटर ने बताया कि बीच में छुट्टी होने की वजह से T-1 दिन और T दिन के बीच का डेटा उपलब्ध था, इसलिए गोल्ड और सिल्वर ETFs के लिए एक्सचेंजों ने T-1 दिन की क्लोजिंग NAV या क्लोजिंग प्राइस को बेस प्राइस के तौर पर इस्तेमाल किया। इसका मकसद ETF की कीमत को सोने और चांदी की असली कीमतों के ज्यादा करीब रखना था।

नए प्राइस बैंड ढांचे का प्रस्ताव

SEBI ने आगे ETF सेगमेंट में नए प्राइस बैंड ढांचे का प्रस्ताव भी रखा है। इक्विटी और डेट ETFs के लिए शुरुआती प्राइस बैंड प्लस या माइनस 10 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया गया है। जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाकर प्लस या माइनस 20 प्रतिशत तक किया जा सकता है। जब भी प्राइस बैंड बढ़ाया जाएगा, तो 15 मिनट का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू होगा, ताकि बाजार को शांत होने का समय मिल सके। एक दिन में अधिकतम दो बार ही इस तरह का फ्लेक्सिबिलिटी दी जाएगी।

गोल्ड और सिल्वर ETFs के लिए SEBI ने और ज्यादा सख्त नियम सुझाए हैं। इनके लिए शुरुआती प्राइस बैंड प्लस या माइनस 6 प्रतिशत रखने का प्रस्ताव है, जिसे जरूरत पड़ने पर प्लस या माइनस 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें भी 15 मिनट का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सोने और चांदी के ETFs में अचानक और तेज़ उतार-चढ़ाव से निवेशकों को नुकसान न हो और ETF की कीमतें असली गोल्ड-सिल्वर कीमतों के साथ बेहतर तालमेल में रहें।

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लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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