पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड January 15, 2026, 14:45 IST
सारांश
पराग पारिख म्यूचुअल फंड के फ्लेक्सी कैप और लार्ज कैप फंड्स में निवेश का तरीका काफी अलग है। फ्लेक्सी कैप फंड जहां देश-दुनिया की किसी भी कंपनी में निवेश कर सकता है, वहीं लार्ज कैप फंड केवल भारत की टॉप 100 बड़ी कंपनियों पर ध्यान देता है। दोनों के खर्च और रिस्क भी अलग हैं।

पराग पारिख के दोनों फंड्स की निवेश शैली और रणनीतियां एक-दूसरे से अलग हैं।
पराग पारिख म्यूचुअल फंड हाउस अपने अलग और पारदर्शी निवेश नजरिए के लिए निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है। बहुत से निवेशक इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि उन्हें पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड में पैसा लगाना चाहिए या फिर उनके लार्ज कैप फंड में निवेश करना बेहतर होगा। हालांकि दोनों ही इक्विटी म्यूचुअल फंड की कैटेगरी में आते हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका और निवेश का दायरा एक-दूसरे से काफी अलग है। किसी भी निवेशक के लिए इन दोनों के बीच के बुनियादी फर्क को समझना बहुत जरूरी है ताकि वह अपनी वित्तीय जरूरतों के हिसाब से सही फैसला ले सके।
इन दोनों फंड्स के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके निवेश करने के क्षेत्र को लेकर है। पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड एक बहुत ही व्यापक फंड है। यह निफ्टी 500 की किसी भी कंपनी में पैसा लगा सकता है। इसमें सेक्टर या मार्केट कैप की कोई पाबंदी नहीं होती है। दूसरी ओर पराग पारिख लार्ज कैप फंड केवल भारत की टॉप 100 बड़ी कंपनियों तक ही सीमित रहता है। यह फंड मुख्य रूप से मार्केट कैप के आधार पर शेयरों का चुनाव करता है। यानी यह फंड उन कंपनियों में निवेश करता है जो आकार में सबसे बड़ी हैं, जबकि फ्लेक्सी कैप फंड कंपनियों की वैल्यू और उनके कामकाज को देखकर उनमें निवेश का फैसला लेता है।
पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड पूरी तरह से वैल्यू इन्वेस्टिंग के सिद्धांत पर चलता है। फंड हाउस का कहना है कि वे ऐसी कंपनियों को खरीदना पसंद करते हैं जो इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही हैं और जिन्हें बाजार में फिलहाल पसंद नहीं किया जा रहा है। उनका मानना है कि ऐसी कंपनियां लंबे समय में अच्छा मुनाफा दे सकती हैं। इसके विपरीत लार्ज कैप फंड इंडेक्स के काफी करीब रहता है। इसमें शेयरों का चुनाव केवल उनके मार्केट कैप के आधार पर होता है। यह फंड एक सक्रिय रूप से प्रबंधित फंड है लेकिन इसकी कोशिश इंडेक्स के साथ बने रहने की होती है ताकि रिस्क को कम किया जा सके।
लार्ज कैप फंड की एक खास बात इसकी स्मार्ट एक्जीक्यूशन रणनीति है। चूंकि यह फंड बेंचमार्क के करीब रहता है, इसलिए फंड मैनेजर रिटर्न को बढ़ाने और लागत को कम करने के लिए कई अलग तरीके अपनाते हैं। इसमें सिंगल स्टॉक फ्यूचर्स और इंडेक्स फ्यूचर्स को डिस्काउंट पर खरीदना शामिल है। इसके अलावा जब दो कंपनियों का विलय हो रहा होता है, तो वहां मुनाफे के मौके तलाशना और पोर्टफोलियो को धीरे-धीरे संतुलित करना भी इनकी रणनीति का हिस्सा है। फ्लेक्सी कैप फंड में इस तरह की रणनीति के बजाय सीधे तौर पर अच्छे बिजनेस को कम कीमत पर खरीदने पर ध्यान दिया जाता है।
एक और बड़ा अंतर विदेशी निवेश को लेकर है। पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड में निवेशकों को विदेशी कंपनियों में भी हिस्सेदारी मिलती है, जो पोर्टफोलियो को विविधता देती है। लेकिन लार्ज कैप फंड में कोई विदेशी निवेश नहीं होता है, यह पूरी तरह से भारतीय कंपनियों पर ही केंद्रित रहता है। प्रबंधन की बात करें तो फ्लेक्सी कैप फंड को सात मैनेजरों की टीम संभालती है, जबकि लार्ज कैप फंड के लिए छह मैनेजरों की टीम है। दोनों ही फंड्स में अनुभवी मैनेजर शामिल हैं। खर्च के मामले में भी लार्ज कैप फंड के फ्लेक्सी कैप फंड की तुलना में थोड़ा सस्ता होने की उम्मीद है।
दोनों फंड्स के अपने फायदे और जोखिम हैं। फ्लेक्सी कैप फंड उन लोगों के लिए है जो लंबे समय तक इंतजार कर सकते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव को झेलने की हिम्मत रखते हैं। इसमें फंड मैनेजर को निवेश के ज्यादा मौके मिलते हैं। वहीं लार्ज कैप फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर हो सकता है जो जोखिम को कम रखना चाहते हैं और भारत की सबसे बड़ी कंपनियों की तरक्की में शामिल होना चाहते हैं। किसी भी फंड में पैसा लगाने से पहले अपनी निवेश क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों को ध्यान में रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
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