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  1. 18 के बाद NPS वात्सल्य अकाउंट का क्या होगा? पैरेंट्स और बच्चों के काम आएंगे पैसे निकालने के ये जरूरी रूल्स

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18 के बाद NPS वात्सल्य अकाउंट का क्या होगा? पैरेंट्स और बच्चों के काम आएंगे पैसे निकालने के ये जरूरी रूल्स

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 26, 2026, 19:08 IST

सारांश

एनपीएस वात्सल्य योजना में 18 साल की उम्र होते ही अकाउंट की कमान बच्चे के हाथ आ जाती है। इसके बाद उसके पास 21 साल तक निवेश जारी रखने, NPS में शिफ्ट करने या निकासी के विकल्प मिलते हैं।

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18 साल का होने के बाद एनपीएस वात्सल्य अकाउंट पर बच्चे का पूरा कंट्रोल हो जाता है।

बच्चों के उज्ज्वल फ्यूचर और लॉन्ग टर्म सेविंग्स के लिए केंद्र सरकार की एनपीएस वात्सल्य योजना इन दिनों चर्चा में बनी हुई है। पैरेंट्स अपने बच्चों की कम उम्र से ही इस पेंशन स्कीम में पैसे जोड़ना शुरू कर देते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब बच्चा 18 साल का होकर बालिग हो जाएगा, तब इस अकाउंट और जमा रकम का क्या होगा। असल में नियमों के अनुसार 18 साल की उम्र पूरी होने पर अकाउंट की कमान बच्चे के हाथ में आ जाती है और उसके पास निवेश जारी रखने से लेकर पैसे निकालने तक के कई विकल्प मौजूद होते हैं।

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क्या है एनपीएस वात्सल्य और इसके नियम?

एनपीएस वात्सल्य नाबालिगों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत चलने वाली अंशदान आधारित बचत योजना है, जिसे PFRDA रेगुलेट करती है। यह अकाउंट बच्चे के नाम पर खुलता है और बच्चा ही इसका इकलौता लाभार्थी होता है। 18 साल का होने तक अकाउंट पैरेंट्स या कानूनी अभिभावक संभालते हैं और बच्चे के नाम पर प्रान यानी स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या जारी की जाती है। 18 साल से कम उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक इसमें खाता खुलवा सकता है, जिसमें एनआरआई और ओसीआई भी शामिल हैं। इसमें लड़का और लड़की का कोई भेद नहीं है। शुरुआती न्यूनतम निवेश 250 रुपये है और हर साल कम से कम 250 रुपये जमा करने होते हैं। अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। पैसा PFRDA में रजिस्टर्ड पेंशन फंड मैनेज करता है और इसका रिटर्न बाजार से जुड़ा होता है।

18 साल के बाद किसका होगा पैसा?

बच्चे के बालिग होने पर अकाउंट की कमान पूरी तरह बच्चे के हाथ में आ जाती है। खाते में जमा रकम, उस पर मिला रिटर्न और सारे फायदे सिर्फ उसी के होते हैं। अकाउंट पर पूरा कंट्रोल लेने के लिए बच्चे को नए सिरे से केवाईसी कराना होता है और नॉमिनी की जानकारी अपडेट करनी होती है। इसके बाद वह खुद इस खाते का संचालन कर सकता है।

बालिग होने पर मिलते हैं तीन बड़े विकल्प

18 साल की उम्र पूरी होने के बाद खाताधारक के सामने तीन विकल्प होते हैं। पहला विकल्प यह है कि वह 21 साल की उम्र तक एनपीएस वात्सल्य में ही निवेश जारी रख सकता है। दूसरा विकल्प यह है कि पूरी जमा रकम को एनपीएस टियर-वन में ट्रांसफर किया जा सकता है, जो ऑल-सिटीजन मॉडल या किसी दूसरे लागू मॉडल में हो सकता है। तीसरा विकल्प पैसे निकालने का है। अगर जमा रकम 8 लाख रुपये से कम है, तो पूरा पैसा एकमुश्त निकाला जा सकता है। लेकिन अगर रकम 8 लाख रुपये या उससे ज्यादा है, तो 80% तक एकमुश्त निकाल सकते हैं और बाकी कम से कम 20% से एन्युटी खरीदनी होगी।

21 साल तक फैसला न लेने पर क्या होगा?

अगर खाताधारक 21 साल की उम्र तक इनमें से कोई भी ऑप्शन नहीं चुनता है, तो उसका अकाउंट अपने आप उसी पेंशन फंड के मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क यानी एमएसएफ के तहत ज्यादा इक्विटी वाली स्कीम में चला जाएगा। इस तरह पूंजी अपने आप आगे बढ़ती रहेगी। इसलिए पैरेंट्स और बच्चों को 18 साल के बाद इन नियमों और विकल्पों की पूरी जानकारी रखना जरूरी होता है।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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