पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड November 03, 2026, 16:09 IST
सारांश
NPS Swasthya के तहत 1 लाख रुपये से लेकर 30 लाख रुपये तक का फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस कवर मिलता है। इसमें उम्र, परिवार के सदस्यों और चुने गए कवर के हिसाब से डिडक्टिबल तय होता है। डिडक्टिबल यानी वह रकम जिसे पहले सब्सक्राइबर को खुद खर्च करना होगा।

NPS Swasthya: इस स्कीम में 18 से 70 साल की उम्र के लोग शामिल हो सकते हैं।
बढ़ते मेडिकल खर्चों के बीच अब हेल्थ इंश्योरेंस के साथ इलाज के लिए अलग से पैसा जुटाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS Swasthya पेश किया है। यह नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़ी हेल्थकेयर सुविधा है। इसके तहत सब्सक्राइबर्स अपने NPS योगदान का 25% तक हिस्सा मेडिकल खर्चों के लिए अलग रख सकते हैं। इसमें पैसा लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि कितना हेल्थ कवर मिलेगा और इसका आपकी रिटायरमेंट सेविंग पर क्या असर पड़ सकता है।
NPS Swasthya के तहत 1 लाख रुपये से लेकर 30 लाख रुपये तक का फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस कवर मिलता है। इसमें उम्र, परिवार के सदस्यों और चुने गए कवर के हिसाब से डिडक्टिबल तय होता है। डिडक्टिबल यानी वह रकम जिसे पहले सब्सक्राइबर को खुद खर्च करना होगा। इसके बाद ही इंश्योरेंस कंपनी तय नियमों के मुताबिक बाकी खर्च कवर करेगी।
उदाहरण के लिए, 1 लाख रुपये के कवर पर 10,000 रुपये, 5 लाख के कवर पर 50,000 रुपये, 10 लाख के कवर पर 1 लाख रुपये और 30 लाख के कवर पर 3 लाख रुपये का डिडक्टिबल है। यह रकम एक ही अस्पताल में भर्ती होने पर खर्च करना जरूरी नहीं है। पॉलिसी वर्ष के दौरान कई इलाजों पर हुए पात्र मेडिकल खर्चों को जोड़कर भी इसे पूरा किया जा सकता है।
इस स्कीम में 18 से 70 साल की उम्र के लोग शामिल हो सकते हैं। प्रीमियम उम्र के तीन समूहों के हिसाब से तय होगा। इसमें 18-40 साल, 40-60 साल और 60-70 साल की उम्र के लोग शामिल हैं। पॉलिसी का रिन्यूअल 85 साल की उम्र तक किया जा सकता है।
सब्सक्राइबर अपने साथ पति या पत्नी और अधिकतम दो बच्चों को भी कवर में शामिल कर सकते हैं। इसमें पहले से मौजूद बीमारियों के लिए 12 महीने की वेटिंग पीरियड और शुरुआती 30 दिनों की वेटिंग पीरियड लागू होगी।
इसमें अस्पताल में भर्ती होने, ICU, AYUSH इलाज, मानसिक बीमारियों, डे-केयर प्रक्रियाओं और एम्बुलेंस जैसे खर्चों का कवर शामिल है। रोड एम्बुलेंस के लिए अधिकतम 2,500 रुपये की सीमा है। प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन खर्च भी इसमें शामिल हैं।
NPS Swasthya में योगदान का 25% तक हिस्सा लगाने से रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाली रकम कम हो सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मेडिकल खर्चों के लिए अलग फंड तैयार होने से लोगों को लंबी अवधि की रिटायरमेंट सेविंग को छेड़े बिना इलाज का खर्च उठाने में मदद मिल सकती है।
NPS का पैसा अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश किया जाता है। इसमें इक्विटी में अधिकतम 25% निवेश की सीमा है। इसके अलावा सरकारी सिक्योरिटीज में 65% तक और कॉरपोरेट बॉन्ड में 45% तक निवेश किया जा सकता है। इसलिए बाजार में तेज गिरावट आने पर मेडिकल कॉर्पस की वैल्यू भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग एसेट में निवेश होने से इस जोखिम को संतुलित करने की कोशिश की जाती है।
नहीं, यह पारंपरिक हेल्थ इंश्योरेंस का विकल्प नहीं है। इसका उद्देश्य हेल्थ इंश्योरेंस के साथ मेडिकल खर्चों के लिए अतिरिक्त फंड तैयार करना है। इसमें फंड मैनेजमेंट फीस सालाना 0.08% तक और 200 रुपये सालाना मेंटेनेंस चार्ज देना होगा। अगर मेडिकल कॉर्पस का इस्तेमाल नहीं होता है, तो जमा रकम बाजार से जुड़े रिटर्न के हिसाब से बढ़ सकती है। इसका इस्तेमाल और निकासी स्कीम के एग्जिट, विड्रॉल और नॉमिनी से जुड़े नियमों के अनुसार होगा। इसका मकसद हेल्थ इंश्योरेंस और वास्तविक मेडिकल खर्चों के बीच के अंतर को कम करना है। यानी सब्सक्राइबर्स को रिटायरमेंट सेविंग, हेल्थ इंश्योरेंस और इलाज के लिए अलग फंड के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।
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