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  1. New Labour Codes: 1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी मिलने की बात में कितना दम? FAQs में जानें अपने हर सवाल का जवाब

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New Labour Codes: 1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी मिलने की बात में कितना दम? FAQs में जानें अपने हर सवाल का जवाब

Upstox

4 min read | अपडेटेड November 26, 2025, 16:06 IST

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सारांश

New Labour Codes: नए लेबर कोड लागू होने के बाद कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में कमी आ सकती है, लेकिन पीएफ और ग्रेच्युटी का पैसा बढ़ जाएगा। अब फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को 5 साल नहीं, बल्कि 1 साल की सेवा के बाद ही ग्रेच्युटी मिलेगी। बेसिक सैलरी कुल वेतन का 50% होना अनिवार्य है।

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नए लेबर कोड से बदला सैलरी का गणित, पीएफ बढ़ा और इन-हैंड सैलरी घटी

New Labour Codes: साल 2025 भारतीय कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव लेकर आया है। सरकार ने नए लेबर कोड्स को लागू कर दिया है, जिसका सीधा असर आपकी सैलरी स्लिप और काम करने के तरीके पर पड़ रहा है। इन नए नियमों का मकसद कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा देना और भविष्य के लिए ज्यादा बचत सुनिश्चित करना है। उपस्टॉक्स की रिपोर्ट और नए नियमों के मुताबिक, कर्मचारियों के मन में कई सवाल हैं, जिनके जवाब हम यहां आसान भाषा में दे रहे हैं।
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FAQs में जानें अपने हर सवाल का जवाब

1. नए लेबर कोड कब से लागू हो रहे हैं?
  • चारों लेबर कोड (वेजेस कोड 2019, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और सेफ्टी कोड 2020) 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हो रहे हैं।
2. इन नए नियमों का असर किन लोगों पर पड़ेगा?
  • देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र के 50 करोड़ से ज्यादा कामगारों पर इसका असर होगा। इनमें से 90 प्रतिशत लोग असंगठित क्षेत्र में हैं। लेबर मिनिस्ट्री के मुताबिक, अब सभी कामगारों को न्यूनतम वेतन (Minimum Wages) और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
3. क्या नए लेबर कोड से बेसिक सैलरी बढ़ेगी?
  • हां। वेतन की नई परिभाषा के तहत, भत्तों (Allowances) को कुल सैलरी के 50% तक सीमित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि बेसिक सैलरी अब कुल वेतन का कम से कम आधा होगी। इससे पीएफ (EPF) और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ जाएगा।
4. लेबर कोड के तहत 'वेजेस' (वेतन) में क्या शामिल है?
  • वेजेस में कर्मचारी को मिलने वाला पूरा मेहनताना शामिल है, खास तौर पर बेसिक पे (Basic Pay), महंगाई भत्ता (DA) और रिटेनिंग अलाउंस (अगर कोई हो)।
5. 'वेजेस' से किन चीजों को बाहर रखा गया है?

जब तक ये चीजें तय सीमा से ज्यादा न हों, इन्हें वेजेस नहीं माना जाएगा:

  • बोनस
  • आने-जाने का भत्ता (Conveyance Allowance)
  • ओवरटाइम का पैसा
  • ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट बेनिफिट्स
6. भत्तों (Allowances) को लेकर सबसे अहम नियम क्या है?
  • कुल भत्ते बेसिक पे और डीए के जोड़ के 50% से ज्यादा नहीं हो सकते। अगर भत्ते इससे ज्यादा होते हैं, तो एक्स्ट्रा रकम को बेसिक सैलरी का हिस्सा माना जाएगा। इससे पीएफ और ग्रेच्युटी पर असर पड़ेगा।
7. सैलरी देने के कौन से तरीके मान्य हैं?
  • सैलरी नकद (Cash), चेक, बैंक ट्रांसफर या इलेक्ट्रॉनिक मोड के जरिए दी जा सकती है।
8. क्या मेरी इन-हैंड सैलरी (Take-home salary) कम हो जाएगी?
  • हां, इसकी पूरी संभावना है। बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी में ज्यादा पैसा कटेगा। अगर आपकी सीटीसी (CTC) नहीं बढ़ती है, तो हाथ में आने वाला पैसा थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन आपकी रिटायरमेंट सेविंग बढ़ जाएगी।
9. सीटीसी (CTC) और वेजेस में क्या अंतर है?
  • वेजेस सीटीसी का एक छोटा हिस्सा है (सिर्फ बेसिक + डीए)। जबकि सीटीसी में कंपनी द्वारा दी जाने वाली सारी सुविधाएं, भत्ते और बोनस शामिल होते हैं।
10. क्या बोनस को वेजेस में गिना जाएगा?
  • नहीं, वैधानिक या कॉन्ट्रैक्ट वाला बोनस आम तौर पर वेजेस से बाहर होता है।
11. ग्रेच्युटी पर नए नियमों का क्या असर होगा?
  • फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयीज (कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारी) के लिए बड़ी खुशखबरी है। उन्हें अब ग्रेच्युटी के लिए 5 साल इंतजार नहीं करना होगा, उन्हें 1 साल की सेवा पूरी करने पर ही ग्रेच्युटी मिल जाएगी। हालांकि, रेगुलर कर्मचारियों के लिए 5 साल की शर्त जारी रहेगी।
12. पीएफ योगदान पर क्या फर्क पड़ेगा?
  • पीएफ हमेशा वेजेस (बेसिक पे) पर कटता है। चूंकि अब बेसिक पे कम से कम 50% होना जरूरी है, इसलिए पीएफ का योगदान बढ़ जाएगा। इससे आपकी मंथली सैलरी कम होगी पर पीएफ बैलेंस तेजी से बढ़ेगा।
13. ईएसआईसी (ESIC) के दायरे में क्या बदलाव आया है?
  • अब ईएसआईसी के नियम पूरे देश में लागू होंगे (पहले सिर्फ कुछ नोटिफाइड इलाकों में थे)। 10 से कम कर्मचारी वाली कंपनियां भी चाहे तो इसमें शामिल हो सकती हैं। खतरनाक कामों में लगे मजदूरों के लिए इसे अनिवार्य कर दिया गया है।
14. ईपीएफओ (EPFO) का कवरेज कैसे बढ़ा है?
  • पुराने और पेचीदा नियमों को हटा दिया गया है। अब अगर किसी भी तरह की कंपनी या संस्थान में 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं, तो वहां पीएफ के नियम लागू होंगे। इंडस्ट्री चाहे कोई भी हो, नियम सब पर एक जैसे होंगे।
15. कौन से फायदे अब सभी मजदूरों को मिलेंगे?
  • नए कोड का मकसद सबको सुरक्षा देना है। अब पीएफ, पेंशन और मेडिकल (ESIC) जैसी सुविधाएं संगठित और असंगठित दोनों तरह के मजदूरों को मिलेंगी।
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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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