पर्सनल फाइनेंस

3 min read | अपडेटेड March 22, 2026, 13:40 IST
सारांश
इनकम टैक्स विभाग ने 1962 के पुराने नियमों को बदलकर अब इनकम टैक्स रूल्स 2026 लागू करने का फैसला किया है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इन नियमों में एचआरए (HRA) और बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाले अलाउंस में भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी।

नए इनकम टैक्स नियमों के लागू होने के बाद आपकी टैक्स सेविंग्स और सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव दिखेंगे।
अगर आप नौकरीपेशा हैं और टैक्स बचाना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस यानी CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 के लिए फाइनल नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से देशभर में लागू हो जाएंगे। खास बात यह है कि ये नए नियम सालों से चले आ रहे 1962 के पुराने नियमों की जगह लेंगे। इसका सीधा असर आपके आने वाले फाइनेंसियल ईयर 2026-27 की इनकम और उस पर लगने वाले टैक्स पर पड़ेगा। सरकार ने इस नए ई-गजट के जरिए कई ऐसे बदलाव किए हैं, जिससे आपकी जेब में ज्यादा पैसा बच सकता है।
नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA को लेकर किया गया है। अभी तक सिर्फ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में रहने वाले कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी के 50 पर्सेंट तक HRA पर टैक्स छूट मिलती थी। लेकिन अब सरकार ने इस लिस्ट में हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु को भी शामिल कर लिया है। इसका मतलब है कि इन शहरों में रहने वाले लोग अब अपनी सैलरी का 50 पर्सेंट तक HRA क्लेम कर सकेंगे। बाकी शहरों के लिए यह लिमिट अभी भी 40 पर्सेंट ही रखी गई है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि HRA का यह फायदा सिर्फ उन लोगों को मिलेगा जो पुराने टैक्स रिजीम को चुनेंगे।
बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल का खर्च
सरकार ने बच्चों की शिक्षा पर मिलने वाले अलाउंस में भी बहुत बड़ी बढ़ोतरी की है। पुराने नियमों के तहत बच्चों की पढ़ाई के लिए सिर्फ 100 रुपये महीना और हॉस्टल के लिए 300 रुपये महीना की छूट मिलती थी, जो आज के जमाने के हिसाब से बहुत कम थी। अब नए नियमों में बच्चों की एजुकेशन अलाउंस को बढ़ाकर 3000 रुपये महीना कर दिया गया है। वहीं हॉस्टल के खर्च के लिए मिलने वाली छूट को बढ़ाकर 9000 रुपये महीना प्रति बच्चा कर दिया गया है। यह छूट ज्यादा से ज्यादा दो बच्चों के लिए ली जा सकती है। लेकिन यह फायदा आपको तभी मिलेगा जब यह आपकी कंपनी के पे-पैकेज का हिस्सा होगा।
नए नियमों के मुताबिक, अगर आप पुराने टैक्स रिजीम में रहकर किसी भी तरह की कटौती या छूट का दावा करते हैं, तो आपको उसके पक्के सबूत देने होंगे। अगर आपका साल भर का किराया 1 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आपको मकान मालिक का नाम, पता और पैन कार्ड की जानकारी देनी होगी। इतना ही नहीं, अगर मकान मालिक के साथ आपका कोई रिश्ता है, तो उसकी जानकारी देना भी जरूरी होगा। इसी तरह LTC यानी लीव ट्रैवल कंसेशन के लिए खर्च के बिल और होम लोन के ब्याज पर छूट के लिए बैंक या लेंडर की पूरी जानकारी और पैन कार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है।
अगर आपकी कंपनी ने आपको कार दे रखी है और आप उसका इस्तेमाल ऑफिस के साथ-साथ अपने पर्सनल काम के लिए भी करते हैं, तो उसके टैक्स वैल्यू के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब 1.6 लीटर से कम इंजन वाली कार के लिए 5000 रुपये महीना और उससे बड़ी कार के लिए 7000 रुपये महीना की वैल्यू जोड़ी जाएगी। अगर कंपनी आपको ड्राइवर भी देती है, तो उसमें 3000 रुपये महीना अलग से जुड़ेंगे। कार किसकी है और उसके पेट्रोल या रखरखाव का खर्च कौन उठा रहा है, इन बातों के आधार पर टैक्स की गणना के आंकड़े बदल जाएंगे।
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