पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड January 21, 2026, 16:09 IST
सारांश
म्यूचुअल फंड चुनते वक्त सिर्फ रिटर्न देखना काफी नहीं होता है। अल्फा, बीटा और शार्प रेश्यो ऐसे तीन पैमाने हैं जो आपको फंड के जोखिम और प्रदर्शन की गहराई समझाते हैं। इनका सही इस्तेमाल करके आप यह जान सकते हैं कि आपका फंड मैनेजर बाजार के मुकाबले कितना बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन को मापने के लिए अल्फा, बीटा और शार्प रेश्यो सबसे सटीक हथियार माने जाते हैं।
म्यूचुअल फंड में निवेश करना आज के समय में काफी आसान हो गया है लेकिन सही फंड का चुनाव करना अब भी एक चुनौती बनी रहती है। अधिकतर निवेशक किसी भी स्कीम को केवल उसके पिछले एक या तीन साल के रिटर्न के आधार पर चुन लेते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रिटर्न देखना किसी फंड की पूरी तस्वीर नहीं दिखाता है। निवेश की दुनिया में कुछ तकनीकी शब्द जैसे अल्फा, बीटा और शार्प रेश्यो बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये आंकड़े हमें यह बताते हैं कि फंड ने जो रिटर्न दिया है उसके पीछे का जोखिम कितना था और फंड मैनेजर ने बाजार की तुलना में कितनी अतिरिक्त मेहनत की है। इन तीनों पैमानों को समझना एक स्मार्ट निवेशक बनने की पहली सीढ़ी है।
अल्फा किसी भी म्यूचुअल फंड स्कीम के प्रदर्शन को मापने का सबसे लोकप्रिय तरीका है। सरल शब्दों में कहें तो अल्फा यह बताता है कि एक फंड ने अपने बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले कितना ज्यादा रिटर्न दिया है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी फंड का बेंचमार्क इंडेक्स 10 फीसदी की दर से बढ़ा है और फंड ने 12 फीसदी का रिटर्न दिया है तो उस फंड का अल्फा 2 होगा। अल्फा जितना अधिक होगा फंड का प्रदर्शन उतना ही बेहतर माना जाता है। यह निवेशक को यह समझने में मदद करता है कि क्या फंड मैनेजर अपनी कुशलता से बाजार को मात देने में सफल रहा है। यदि किसी फंड का अल्फा शून्य से कम है तो इसका मतलब है कि वह अपने बेंचमार्क के बराबर भी प्रदर्शन नहीं कर पाया है।
निवेश में जोखिम को समझने के लिए बीटा का इस्तेमाल किया जाता है। बीटा हमें यह बताता है कि बाजार के उतार चढ़ाव के प्रति आपका फंड कितना संवेदनशील है। बाजार यानी बेंचमार्क इंडेक्स का बीटा हमेशा 1 माना जाता है। अगर किसी फंड का बीटा 1 से अधिक है तो इसका मतलब है कि बाजार में तेजी आने पर यह फंड बाजार से ज्यादा तेजी से बढ़ेगा लेकिन गिरावट आने पर इसमें गिरावट भी ज्यादा होगी। इसके उलट यदि बीटा 1 से कम है तो वह फंड बाजार की तुलना में कम अस्थिर होगा। जो निवेशक ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते हैं वे अक्सर कम बीटा वाले फंड चुनना पसंद करते हैं। बीटा की मदद से आप यह तय कर सकते हैं कि क्या आप फंड की अस्थिरता को झेलने के लिए तैयार हैं।
म्यूचुअल फंड के विश्लेषण में शार्प रेश्यो को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह जोखिम और रिटर्न के बीच के तालमेल को दिखाता है। यह अनुपात हमें यह बताता है कि फंड ने जो अतिरिक्त रिटर्न दिया है उसके लिए उसने कितना जोखिम उठाया है। किसी भी फंड का शार्प रेश्यो जितना ज्यादा होगा वह उतना ही अच्छा माना जाता है क्योंकि इसका मतलब है कि फंड ने कम जोखिम लेकर बेहतर रिटर्न दिया है। अक्सर दो फंड के रिटर्न एक जैसे हो सकते हैं लेकिन शार्प रेश्यो यह साफ कर देता है कि किस फंड ने सुरक्षित तरीके से वह मुनाफा कमाया है। एक समझदार निवेशक हमेशा ऊंचे शार्प रेश्यो वाले फंड को प्राथमिकता देता है क्योंकि यह निवेश की गुणवत्ता को दर्शाता है।
म्यूचुअल फंड का सही चुनाव करने के लिए इन तीनों आंकड़ों को एक साथ देखना चाहिए। केवल अल्फा देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि हो सकता है कि फंड ने बहुत ज्यादा जोखिम लेकर वह रिटर्न दिया हो जिसे बीटा के जरिए समझा जा सकता है। इसी तरह शार्प रेश्यो यह स्पष्ट कर देता है कि फंड मैनेजर की रणनीति कितनी ठोस है। निवेश करने से पहले इन पैमानों की जांच करने से आप भविष्य में होने वाले बड़े नुकसान से बच सकते हैं। साल 2026 के इस दौर में जहां बाजार में अस्थिरता बनी रहती है वहां इन तकनीकी पहलुओं की जानकारी होना आपको एक सुरक्षित और सफल पोर्टफोलियो बनाने में मदद करती है। हमेशा याद रखें कि सही निवेश केवल मुनाफे के बारे में नहीं बल्कि जोखिम को सही ढंग से मैनेज करने के बारे में भी है।
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