पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड June 03, 2026, 15:27 IST
सारांश
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नियोक्ताओं के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए फॉर्म 16 जारी करने की आखिरी तारीख 15 जून तय की है। यह फॉर्म दो भागों पार्ट-A और पार्ट-B में बंटा होता है। कर्मचारी इसे सीधे टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट से डाउनलोड नहीं कर सकते हैं, बल्कि यह कंपनी द्वारा ही प्रदान किया जाता है।

नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स के लिए फॉर्म 16 जारी करने और आईटीआर फाइल करने की तारीखें आईं सामने। | Image: Shutterstock.
नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का सीजन बहुत जल्द शुरू होने वाला है। ऐसे में सभी वेतनभोगी कर्मचारी अपने सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज यानी फॉर्म 16 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। फॉर्म 16 एक बेहद जरूरी पेपर है जिसके बिना सैलरी क्लास के लोगों के लिए अपना टैक्स रिटर्न दाखिल करना काफी मुश्किल हो जाता है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए समय पर इस फॉर्म को जारी करना होता है ताकि वे आखिरी तारीख से पहले अपना ITR आसानी से भर सकें।
फॉर्म 16 असल में एक TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स सर्टिफिकेट होता है जो किसी भी कंपनी या नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारी को दिया जाता है। यह फॉर्म इस बात का एक पुख्ता सबूत होता है कि कंपनी ने कर्मचारी की सैलरी से नियमानुसार टैक्स काटा है और उसे समय पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास जमा कर दिया है। जब कोई कंपनी आयकर अधिनियम की धारा 192 के तहत कर्मचारी के वेतन से टैक्स की कटौती करती है तब यह सर्टिफिकेट जारी करना उसकी कानूनी जिम्मेदारी बन जाता है। टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय इस डॉक्यूमेंट को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती है क्योंकि यह आपके टैक्स भुगतान का एक कंसोलिडेटेड रिकॉर्ड प्रदान करता है।
यह महत्वपूर्ण फॉर्म मुख्य रूप से दो हिस्सों में विभाजित होता है जिन्हें पार्ट-A और पार्ट-B कहा जाता है। पार्ट ए के भीतर नियोक्ता और कर्मचारी की पूरी सामान्य जानकारी शामिल होती है। इसमें दोनों पक्षों का पैन नंबर और कंपनी का टेन नंबर दर्ज होता है। इसके साथ ही इसमें इस बात का पूरा डीटेल होता है कि कर्मचारी की सैलरी से कुल कितना टैक्स काटा गया है और सरकार के पास तिमाही आधार पर कितना TDS जमा किया गया है। दूसरी तरफ पार्ट-B में कर्मचारी को पूरे फाइनेंशियल वर्ष के दौरान मिले वेतन का पूरा ब्योरा होता है। इसमें कर्मचारी को मिलने वाले विभिन्न भत्ते और अनुलाभ शामिल होते हैं। इसके अलावा इसमें चैप्टर 6-A के तहत क्लेम किए गए डिडक्शन जैसे धारा 80C और 80D की जानकारी भी विस्तार से होती है। इसी भाग में कुल टैक्स योग्य आय और टैक्स लायबिलिटी का पूरा कैलकुलेशन दिया जाता है। कंपनी को यह सर्टिफिकेट मैनुअल या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए वैरिफाई करके ही कर्मचारी को देना होता है।
कंपनियों के लिए फॉर्म 16 जारी करने की एक निश्चित तारीख तय की गई है। नियोक्ताओं को उस वित्तीय वर्ष के ठीक बाद आने वाले साल की 15 जून तक इसे जारी करना होता है जिसमें सैलरी दी गई थी और टैक्स काटा गया था। उदाहरण के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 यानी असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए कंपनियों को 15 जून 2026 को या उससे पहले अपने कर्मचारियों को फॉर्म 16 देना अनिवार्य है। अगर किसी कर्मचारी ने साल के बीच में नौकरी बदली है तो उसे उन सभी कंपनियों से अलग-अलग फॉर्म 16 मिल सकता है जहां उसने उस फाइनेंशियल वर्ष में काम किया है।
कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि क्या वे इसे 15 जून से पहले भी पा सकते हैं। अगर आपकी कंपनी ने इसे ट्रेसेज यानी TRACES पोर्टल पर पहले ही जेनरेट कर लिया है तो इसे समय से पहले भी डाउनलोड किया जा सकता है। लेकिन कर्मचारियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे खुद सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट से इसे डाउनलोड नहीं कर सकते हैं। केवल नियोक्ता के पास ही अपने टेन क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके ट्रेसेज पोर्टल से इसे जेनरेट और डाउनलोड करने का अधिकार होता है। कंपनी वहां फाइनेंशियल वर्ष और कर्मचारी का पैन नंबर डालकर रिक्वेस्ट सबमिट करती है और फाइल उपलब्ध होने पर उसे पीडीएफ यूटिलिटी के जरिए डाउनलोड कर कर्मचारी के साथ शेयर करती है।
सामान्य नौकरीपेशा लोगों और ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए जिनके अकाउंट्स का कोई ऑडिट नहीं होना है वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है। समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करने से टैक्सपेयर्स लेट फाइलिंग फीस और अनपेड टैक्स पर लगने वाले भारी ब्याज से पूरी तरह बच जाते हैं। चूंकि 15 जून तक फॉर्म 16 मिल जाता है इसलिए कर्मचारियों के पास अपनी सैलरी डिटेल्स को वैरिफाई करने और 31 जुलाई की डेडलाइन से पहले पूरी प्रोसेस को आराम से निपटाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है ताकि वे फ्यूचर में किसी भी कानूनी परेशानी से बच सकें।
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