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  1. कहां तक पहुंच सकती है गोल्ड की कीमत, अगर अमेरिका ने किया अपने गोल्ड रिजर्व को रिवैल्यूएट? SBI रिसर्च की रिपोर्ट में सारे सवालों के जवाब

पर्सनल फाइनेंस

कहां तक पहुंच सकती है गोल्ड की कीमत, अगर अमेरिका ने किया अपने गोल्ड रिजर्व को रिवैल्यूएट? SBI रिसर्च की रिपोर्ट में सारे सवालों के जवाब

rajeev-kumar

6 min read | अपडेटेड March 12, 2026, 09:25 IST

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सारांश

केंद्रीय बैंकों द्वारा बढ़ती मांग अमेरिका द्वारा रिवैल्यूएशन के कदम से दुनिया भर के अन्य केंद्रीय बैंक भी अपने गोल्ड रिजर्व को और बढ़ाकर जवाब दे सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंकों द्वारा अमेरिकी डॉलर से हटकर गैर-डॉलर रिजर्व्स में विविधता लाने का एक साफ रुझान पहले से ही मौजूद है।

गोल्ड रिजर्व

अगर अमेरिका ने किया अपने गोल्ड रिजर्व का रिवैल्यूएशन तो सोने की कीमत कहां तक पहुंचेगी?

गोल्ड की कीमत आने वाले समय में कहां तक पहुंचेगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है, लेकिन अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध से कुछ हफ्ते पहले, सोशल मीडिया पर अमेरिका के बड़े गोल्ड रिजर्व के संभावित पुनर्मूल्यांकन (रिवैल्यूएशन) को लेकर अटकलों का दौर चल रहा था। सोने की कीमतें लगभग हर दूसरे दिन नए रिकॉर्ड बना रही थीं, जिससे ऐसी बातें फैलने लगी थीं कि यह उछाल रणनीतिक रूप से पहले से प्लान किया था जिससे अमेरिका अपने गोल्ड रिजर्व का रिवैल्यूएशन करके अपने बजटीय असंतुलन को एक झटके में खत्म कर सके। लेकिन अगर ऐसा सच में हो जाए तो क्या होगा? इससे सोने की कीमतों और आपके निवेश पोर्टफोलियो पर क्या असर पड़ेगा? एसबीआई रिसर्च ने अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में इस तरह के कदम के प्रभावों के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी दी है। चलिए देखते हैं कि इस रिपोर्ट में क्या कुछ है।

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क्या है गोल्ड रिजर्व का रिवैल्यूएशन?

गोल्ड रिजर्व का रिवैल्यूएशन एक फाइनेंशियल स्ट्रैटजी है, जिसमें केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व के दर्ज मूल्य को पुराने ऐतिहासिक या वैधानिक मूल्य से बदलकर मौजूदा, सही मार्केट प्राइस पर एडजेस्ट करता है।

अगर कोई केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व को वर्तमान उचित मार्केट प्राइस पर रिपोर्ट करता है, तो इससे सोने के मूल्य में भारी वृद्धि हो सकती है, खासकर अगर इसका मूल्यांकन पुराने मूल्य पर किया गया हो। बढ़ी हुई वैल्यू परिसंपत्ति (Asset) के रूप में दर्ज की जाएगी। इस रिवैल्यूएशन बदलाव से मिले अवास्तविक प्रॉफिट को साथ ही साथ बैलेंस शीट के देनदारी पक्ष में ‘रिवैल्यूएशन अकाउंट्स’ में दर्ज किया जाएगा। नए जनरेटेड फंड्स का इस्तेमाल नुकसानों की भरपाई करने, बैलेंस शीट को मजबूत करने या सार्वजनिक ऋण का प्रबंधन करने के लिए किया जा सकता है।

अमेरिका के मामले में रिवैल्यूएशन कैसे काम करेगा?

मौजूदा समय में, अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व है, जो 261.5 मिलियन ट्रॉय औंस है। हालांकि, इस गोल्ड की वैल्यू अभी भी 42.22 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस है, जो 1973 में निर्धारित दर है। अमेरिका में सोने का रिवैल्यूएशन करके उसे 5,000 डॉलर प्रति औंस से अधिक के मौजूदा मार्केट प्राइस पर लाने को लेकर चर्चाएं तेज हो रही हैं। इस कदम का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा गोल्ड रिजर्व के रिवैल्यूएशन करने से कुछ ऐसे रिजल्ट्स हो सकते हैं-

Asset में भारी उछाल: गोल्ड रिजर्व का दर्ज मूल्य लगभग 11 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा, जो अमेरिकी जीडीपी के 4% से अधिक के बराबर है।
घाटे में कमी: गोल्ड रिजर्व के रिवैल्यूएशन से अमेरिकी बजट घाटे का लगभग 70% हिस्सा प्रभावी रूप से खत्म हो सकता है और देश को अपने विशाल 38.8 ट्रिलियन डॉलर के ऋण भार को संभालने के लिए वित्तीय लचीलापन मिल सकता है।

नवंबर 2025 में, अमेरिकी सीनेटर सिंथिया एम. लुमिस ने अमेरिकी बिटकॉइन अधिनियम (धारा 9(सी)) का प्रस्ताव रखा था, जिसमें यह प्रावधान था कि वित्त सचिव दस लाख बिटकॉइन खरीदने के लिए सोने के मार्केट प्राइस का रिवैल्यूएशन करेंगे।

क्या अब तक किसी देश ने अपने गोल्ड रिजर्व का रिवैल्यूएसन किया है?

जी हां, लेकिन 1990 के दशक के बाद से केवल कुछ ही देशों ने अपने गोल्ड रिजर्व का रिवैल्यूएशन किया है। इनमें जर्मनी, इटली, लेबनान, दक्षिण अफ्रीका, कुराकाओ और सेंट मार्टिन शामिल हैं। अगस्त 2025 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा की गई एक स्टडी में पाया गया कि इन देशों ने रिवैल्यूएशन से मिले फंड का इस्तेमाल केंद्रीय बैंकों के घाटे की भरपाई और ऋण प्रबंधन के लिए किया।

क्या इससे गोल्ड की कीमत पर पड़ेगा असर?

अमेरिका द्वारा गोल्ड रिजर्व का औपचारिक रिवैल्यूएशन ग्लोबल गोल्ड की कीमतों में जबर्दस्त तेजी ला सकता है। इससे गोल्ड की ग्लोबल कीमतों में रिवैल्यूएशन करने की स्थिति पैदा हो सकती है क्योंकि अन्य केंद्रीय बैंक अधिक रिजर्व जमा करके रिस्पॉड कर सकते हैं, जिससे फिएट (कागजी) मुद्राओं में ग्लोबल विश्वास कमजोर हो सकता है। इसके अलावा, गोल्ड की ग्लोबल कीमत में भी बदलाव आएगा ताकि इसकी फिर से स्थापित मौद्रिक भूमिका और बैलेंस शीट पर इसके नए महत्व को दर्शाया जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘लेकिन अगर अमेरिका द्वारा गोल्ड का औपचारिक रूप से रिवैल्यूएशन किया जाता है या इसकी मौद्रिक भूमिका को फिर से स्थापित किया जाता है, तो कीमत में यह बदलाव अचानक नहीं होगा... गोल्ड की कीमत में काफी वृद्धि हो सकती है क्योंकि इसकी फिर से स्थापित बैलेंस शीट पर महत्व और ग्लोबल रिजर्व में इसकी भूमिका को दर्शाने के लिए सोने की कीमत में बदलाव किया जाएगा, खासकर अगर अन्य केंद्रीय बैंक गोल्ड रिजर्व बढ़ाते हैं या फिएट मुद्राओं में विश्वास कमजोर होता है।’

केंद्रीय बैंकों द्वारा बढ़ती मांग अमेरिका द्वारा रिवैल्यूएशन के कदम से दुनिया भर के अन्य केंद्रीय बैंक भी अपने गोल्ड रिजर्व को और बढ़ाकर जवाब दे सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंकों द्वारा अमेरिकी डॉलर से हटकर गैर-डॉलर रिजर्व्स में विविधता लाने का एक साफ रुझान पहले से ही मौजूद है। यह निरंतर बदलाव स्वाभाविक रूप से गोल्ड की कीमतों को बढ़ा रहा है।

फिएट मुद्राओं पर विश्वास में कमी अमेरिका द्वारा गोल्ड रिजर्व का रिवैल्यूएशन देश की वित्तीय रणनीतियों को औपचारिक रूप से गोल्ड पर आधारित करने का संकेत देगा। इससे फिएट (कागजी) मुद्राओं पर ग्लोबल विश्वास में कमी आ सकती है या यह कमी उत्पन्न कर सकती है। इससे निवेशकों और संस्थानों में सुरक्षित निवेश की प्रवृत्ति भी उत्पन्न हो सकती है, जिससे गोल्ड की मांग और कीमत में और वृद्धि हो सकती है।

गोल्ड रिजर्व के रिवैल्यूएशन से क्या हो सकते हैं नुकसान?

गोल्ड रिवैल्यूएशन से भारी मात्रा में कागजी परिसंपत्तियां निर्मित हो सकती हैं, लेकिन रिपोर्ट गंभीर परिणामों की चेतावनी देती है-

मुद्रास्फीति का दबाव: परिचालन घाटे की भरपाई के लिए रिवैल्यूएशन अकाउंट्स का इस्तेमाल अत्यधिक मुद्रास्फीतिकारी हो सकता है क्योंकि इसकी भरपाई अनिवार्य रूप से नई मुद्रा छापकर करनी पड़ती है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इंटरनेशनल अनुभव से पता चलता है कि जब गोल्ड रिजर्व उचित मूल्य पर रिपोर्ट किए जाते हैं और केंद्रीय बैंक अपने रिवैल्यूएशन अकाउंट्स का इस्तेमाल अन्य परिचालन घाटे की भरपाई के लिए करता है... नहीं तो यह मुद्रास्फीतिकारी हो सकता है क्योंकि इसकी भरपाई मुद्रा छापकर करनी पड़ती है।’
जीडीपी की दुविधा: जहां एक ओर अधिक परिसंपत्तियां वित्तीय प्रतिष्ठा को बढ़ाती हैं, वहीं दूसरी ओर खातों को संतुलित करने के लिए आवश्यक देनदारियों में होने वाली बढ़ोतरी मुद्रास्फीति का दबाव पैदा करेगी, जिससे जीडीपी कमजोर हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भले ही फेडरल रिजर्व के गोल्ड रिजर्व को पुनर्गठित करने से इसकी बैलेंस शीट मजबूत होगी (हालांकि इससे इसका कर्ज सीधे तौर पर कम नहीं होगा), लेकिन आम सहमति यह है कि अधिक परिसंपत्तियों से अमेरिका की राजकोषीय लचीलता और वित्तीय प्रतिष्ठा में सुधार होना चाहिए, जिससे भारी कर्ज के बोझ को संभालना आसान हो जाएगा... नॉमिनल जीडीपी के मोर्चे पर एक दुविधा पैदा हो सकती है, अगर परिसंपत्तियों में हुई भारी वृद्धि को संतुलित करने के लिए देनदारियां बढ़ जाती हैं, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव पैदा होगा और जीडीपी कमजोर हो जाएगी।’

लेखकों के बारे में

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Rajeev Kumar Upstox में डेप्युटी एडिटर हैं और पर्सनल फाइनेंस की स्टोरीज कवर करते हैं। पत्रकार के तौर पर 11 साल के करियर में उन्होंने इनकम टैक्स, म्यूचुअल फंड्स, क्रेडिट कार्ड्स, बीमा, बचत और पेंशन जैसे विषयों पर 2,000 से ज्यादा आर्टिकल लिखे हैं। वह 1% क्लब, द फाइनेंशल एक्सप्रेस, जी बिजेनस और हिंदुस्तान टाइम्स में काम कर चुके हैं। अपने काम के अलावा उन्हें लोगों से उनके पर्सनल फाइनेंस के सफर के बारे में बात करना और उनके सवालों के जवाब देना पसंद है।

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