पर्सनल फाइनेंस
.png)
4 min read | अपडेटेड January 20, 2026, 17:02 IST
सारांश
ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के सीनियर फंड मैनेजर रजत चांडक का कहना है कि सरकार पहले ही ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए जरूरी कदम उठा चुकी है, जैसे मैक्रो इकनॉमिक स्टेबिलिटी और कम ब्याज दरों पर फोकस। ऐसे में अगर लॉन्ग टर्म डेट फंड्स को प्रोत्साहित करने के लिए कोई पॉलिसी लाई जाती है, तो यह निवेशकों के लिए फायदेमंद होगा।

Mutual Fund: म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को इस बजट से किसी बड़े सरप्राइज की उम्मीद नहीं है।
ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के सीनियर फंड मैनेजर रजत चांडक का कहना है कि सरकार पहले ही ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए जरूरी कदम उठा चुकी है, जैसे मैक्रो इकनॉमिक स्टेबिलिटी और कम ब्याज दरों पर फोकस। ऐसे में अगर लॉन्ग टर्म डेट फंड्स को प्रोत्साहित करने के लिए कोई पॉलिसी लाई जाती है, तो यह निवेशकों के लिए फायदेमंद होगा।
कैनरा रोबेको एसेट मैनेजमेंट के CIO श्रिदत्त भंडवालदार का मानना है कि बजट से ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं, क्योंकि पिछले कुछ सालों में बजट मार्केट को एक्साइट तो करता है, लेकिन बड़े टैक्स बदलाव कम ही देखने को मिलते हैं। म्यूचुअल फंड टैक्सेशन में बदलाव की संभावना भी कम है, क्योंकि पहले टैक्स बढ़ाने से निवेशकों की भावनाओं पर असर पड़ा था, लेकिन सरकार की आमदनी में खास इजाफा नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा जियो-पॉलिटिकल हालात को देखते हुए डिफेंस सेक्टर में सरकारी खर्च बढ़ सकता है।
श्रिदत्त भंडवालदार ने यह भी उम्मीद जताई कि सरकार ज्यादा सख्त फिस्कल टाइटनिंग से बचे। जब डिमांड कमजोर हो, प्राइवेट कैपेक्स धीमा हो और घरेलू आय में ज्यादा बढ़ोतरी न हो, तब सरकार का खर्च बहुत जरूरी होता है। अगर टैक्स कलेक्शन कम रहता है, तो उसकी भरपाई के लिए डिसइन्वेस्टमेंट टारगेट बढ़ाए जा सकते हैं।
कोटक म्यूचुअल फंड के सीनियर फंड मैनेजर रोहित टंडन का कहना है कि आने वाले बजट में सबसे जरूरी चीज एक स्थिर पॉलिसी एनवायरनमेंट है। बार-बार छोटे बदलाव करने के बजाय अगर सरकार कंटिन्युटी पर ध्यान दे, तो इससे लॉन्ग टर्म निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है।
अब बात करते हैं म्यूचुअल फंड में टैक्सेशन की। जब आप म्यूचुअल फंड की यूनिट्स बेचते हैं और मुनाफा होता है, तो उसे कैपिटल गेन कहा जाता है। इस पर कितना टैक्स लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस तरह के फंड में निवेश किया है और कितने समय तक निवेश बनाए रखा है।
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में टैक्स होल्डिंग पीरियड के आधार पर लगता है। अगर आपने इक्विटी फंड एक साल से कम समय के लिए रखा है, तो उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है और इस पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है। अगर होल्डिंग पीरियड एक साल या उससे ज्यादा है, तो साल में 1.25 लाख रुपये तक का गेन टैक्स फ्री होता है और उससे ऊपर की रकम पर 12.5 प्रतिशत टैक्स देना होता है।
कुछ इक्विटी फंड्स जैसे ELSS में निवेश करने पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है। हालांकि यह टैक्स बेनिफिट सिर्फ पुराने टैक्स रिजीम में ही लागू होता है, नए टैक्स रिजीम में नहीं।
डेट म्यूचुअल फंड्स का टैक्सेशन थोड़ा अलग है। अगर आपने डेट फंड की यूनिट्स 31 मार्च 2023 के बाद खरीदी हैं, तो उस पर होने वाला पूरा गेन आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है, चाहे आपने निवेश कितने भी समय के लिए रखा हो। वहीं, अगर यूनिट्स 1 अप्रैल 2023 से पहले खरीदी गई हैं और दो साल से कम समय के लिए रखी गई हैं, तो उस पर भी आपकी स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।
अगर डेट फंड की यूनिट्स 1 अप्रैल 2023 से पहले खरीदी गई थीं और आपने उन्हें दो साल या उससे ज्यादा समय तक होल्ड किया है, तो उस पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है, लेकिन अब इसमें इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता। इसके अलावा, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स और ऐसे हाइब्रिड फंड्स जिनमें कम से कम 65 प्रतिशत इक्विटी होती है, उनके खरीदने और बेचने पर 0.1 फीसदी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT भी देना पड़ता है। डेट म्यूचुअल फंड्स पर STT नहीं लगता।
संबंधित समाचार
इसको साइनअप करने का मतलब है कि आप Upstox की नियम और शर्तें मान रहे हैं।
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
इसको साइनअप करने का मतलब है कि आप Upstox की नियम और शर्तें मान रहे हैं।