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3 min read | अपडेटेड February 01, 2026, 19:09 IST
सारांश
Budget 2026: इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि सैलरी से जुड़ी छूट और शेयरधारकों के लिए अलग नियम समाप्त किए जाएं। साथ ही, मान्यता पाने की पात्रता को कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 की धारा 17 के तहत मिलने वाली छूट के अनुरूप किया जाएगा।

Budget 2026 के अनुसार Schedule XI के कुछ प्रावधानों को हटाकर या बदलकर इसे आयकर कानून के नियमों के अनुरूप बनाया जाएगा।
बजट 2026 में सरकार ने Employees Provident Fund यानी EPF से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। इसका मकसद नियमों को आसान बनाना और अलग-अलग तरह की पुरानी पाबंदियों को हटाना है। पहले कंपनी कितनी रकम दे सकती है, यह सैलरी के परसेंटेज या एम्प्लॉई की कंट्रीब्यूशन के बराबर होने जैसी पाबंदियों पर निर्भर था। अब ये सब खत्म हो जाएगा।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि सैलरी से जुड़ी छूट और शेयरधारकों के लिए अलग नियम समाप्त किए जाएं। साथ ही, मान्यता पाने की पात्रता को कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 की धारा 17 के तहत मिलने वाली छूट के अनुरूप किया जाएगा। निवेश से जुड़े पुराने सख्त नियम भी हटा दिए जाएंगे ताकि यह वर्तमान पीएफ कार्यालय के नियमों के अनुरूप हो।
बजट दस्तावेजों में कहा गया है, “Schedule XI में संशोधन का प्रस्ताव है, ताकि मान्यता प्राप्त कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़े नियमों को आसान बनाया जा सके। इसके तहत एम्प्लॉई के योगदान के बराबर रखने की पाबंदी और प्रतिशत आधारित सीमाएं हटाई जाएंगी। salary से जुड़ी छूट और शेयरधारकों के लिए अलग नियम हटाए जाएंगे। मान्यता पाने की पात्रता को धारा 17 के तहत मिलने वाली छूट के अनुसार किया जाएगा। निवेश से जुड़े सख्त नियमों को हटाकर इसे वर्तमान पीएफ कार्यालय के नियमों के अनुरूप बनाया जाएगा।”
साथ ही, बजट में यह प्रस्ताव भी रखा गया है कि एम्प्लॉई के योगदान को जमा करने की तारीख को आसान बनाया जाए, ताकि नियोक्ता उसे टैक्स में छूट के रूप में शामिल कर सके। बजट दस्तावेज के अनुसार, “यदि नियोक्ता ने एम्प्लॉई से प्राप्त योगदान को कर्मचारी के खाते में जमा किया है, चाहे वह किसी भी कर्मचारी भविष्य निधि, सुपरएन्यूएशन फंड या कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के तहत स्थापित किसी भी फंड में हो, और यह जमा आयकर रिटर्न सबमिट करने की अंतिम तारीख तक हुआ है, तो इसे नियोक्ता को कर में छूट के रूप में मान्यता दी जाएगी।”
अभी मान्यता प्राप्त कर्मचारी भविष्य निधि Schedule XI के तहत नियंत्रित होती है। इसमें कुछ पाबंदियां हैं, जैसे नियोक्ता का योगदान एम्प्लॉई के योगदान के बराबर होना, अधिकतम योगदान की प्रतिशत सीमा, एम्प्लॉई-शेयरहोल्डर के लिए अलग नियम, और सरकारी बॉन्ड में निवेश की सीमा।
बजट 2026 के अनुसार Schedule XI के कुछ प्रावधानों को हटाकर या बदलकर इसे आयकर कानून के नियमों के अनुरूप बनाया जाएगा, ताकि यह कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 और पीएफ योजना, 1952 के साथ पूरी तरह मेल खाए।
Schedule XI के वह प्रावधान जो नियोक्ता के योगदान को एम्प्लॉई के योगदान के बराबर, सालाना जमा की तारीख या सैलरी के प्रतिशत तक सीमित करते थे, उन्हें हटाया जाएगा। अब नियोक्ता का योगदान केवल सात लाख पचास हजार रुपये की कुल सीमा के अनुसार होगा, जैसा कि आयकर अधिनियम की धारा 17(1)(h) में तय है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह लगातार नौवां बजट 1 फरवरी, रविवार को संसद में प्रस्तुत किया। इस वर्ष के बजट में आयकर की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। हालांकि, वित्त मंत्री ने कुछ ऐसे उपाय पेश किए हैं जो करदाताओं के लाभ के लिए हैं।
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