पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड February 23, 2026, 12:04 IST
सारांश
पर्सनल लोन लेने से पहले बैंक और एनबीएफसी के बीच का फर्क समझना बहुत जरूरी है। एनबीएफसी कम सिबिल स्कोर पर भी लोन दे देती हैं और इनकी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होती है। वहीं बैंक लंबी कागजी कार्रवाई करते हैं लेकिन उनकी ब्याज दरें कम होती हैं। इस लेख में जानें आपकी जरूरत के हिसाब से क्या सही है।

पर्सनल लोन के लिए सही चुनाव करना आपके फ्यूचर की वित्तीय सेहत के लिए जरूरी है।
जब भी हमें अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है या किसी बड़े खर्चे के लिए लोन लेना होता है, तो सबसे पहले बैंक का ही ख्याल आता है। लेकिन आजकल बाजार में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी यानी NBFC का बोलबाला भी काफी बढ़ गया है। बहुत से लोग इस उलझन में रहते हैं कि लोन बैंक से लेना चाहिए या किसी एनबीएफसी से। इन दोनों के बीच के अंतर को समझना आपके लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यह आपकी जेब और समय दोनों पर असर डालता है। बैंक और एनबीएफसी दोनों ही पैसे का लेनदेन करते हैं, लेकिन इनके नियम और काम करने के तरीके में काफी फर्क होता है। भारत में लाखों लोग इन दोनों संस्थानों से कर्ज की सुविधा लेते हैं।
NBFC वे कंपनियां होती हैं जो कंपनी एक्ट 1956 या 2013 के तहत रजिस्टर्ड होती हैं। ये कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के तहत काम करती हैं। इनके पास बैंक की तरह बैंकिंग लाइसेंस नहीं होता, बल्कि इन्हें खास वित्तीय कामों के लिए एक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया जाता है। ये कंपनियां मुख्य रूप से लोगों को लोन देने, बीमा बेचने और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी सुविधाएं देने का काम करती हैं। हालांकि ये बैंक की तरह करंट अकाउंट या सेविंग अकाउंट नहीं खोल सकतीं और न ही चेक जारी कर सकती हैं। इनका मुख्य मकसद उन लोगों तक पहुंचना होता है जिन्हें बैंकों से आसानी से लोन नहीं मिल पाता।
बैंक वे संस्थान हैं जो बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के तहत कंट्रोल होते हैं। इनका सबसे मुख्य काम लोगों से जमा राशि स्वीकार करना और उन्हें लोन देना है। बैंक और एनबीएफसी में सबसे बड़ा फर्क यह है कि बैंक पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम का हिस्सा होते हैं। इसका मतलब है कि बैंक चेक जारी कर सकते हैं और सीधे क्लियरिंग की सुविधा भी देते हैं। बैंकों का नेटवर्क बहुत बड़ा होता है और वे पूरी तरह से सरकारी नियमों के कड़े दायरे में रहकर काम करते हैं। इसके अलावा बैंकों में जमा किए गए पैसों पर एक तय सीमा तक बीमा की सुरक्षा भी मिलती है जो एनबीएफसी में नहीं होती।
अगर आपको बहुत जल्दी पैसों की जरूरत है, तो एनबीएफसी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। एनबीएफसी में लोन के आवेदन का ऑपरेशन बहुत तेज होता है और अक्सर 24 से 48 घंटे के भीतर पैसा आपके खाते में आ जाता है। इसके अलावा, एनबीएफसी क्रेडिट स्कोर को लेकर भी थोड़ी नरम होती हैं। अगर आपका सिबिल स्कोर 750 से कम है, तब भी एनबीएफसी आपको लोन दे सकती हैं। इनकी पूरी प्रक्रिया डिजिटल होती है और बहुत कम कागजों की जरूरत पड़ती है। ये कंपनियां शादी, यात्रा या छोटे खर्चों के लिए खास तरह के लोन प्रोडक्ट भी तैयार करती हैं ताकि कस्टमर को सुविधा हो सके।
बैंकों से पर्सनल लोन लेने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां ब्याज दरें काफी कम होती हैं। बैंक बहुत कम लागत पर पैसा जुटाते हैं, इसलिए वे एनबीएफसी के मुकाबले 2 से 5 पर्सेंट तक सस्ता लोन दे सकते हैं। बैंकों में लोन की राशि भी ज्यादा मिल सकती है, जैसे 20 लाख से 40 लाख रुपये तक। अगर आपका उस बैंक में पहले से सैलरी अकाउंट है, तो आपको बहुत आसानी से और बेहतर शर्तों पर प्री-अप्रूव्ड लोन मिल सकता है। बैंकों में किसी भी तरह के छिपे हुए चार्ज की संभावना कम रहती है क्योंकि आरबीआई इन पर कड़ी नजर रखता है।
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