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  1. Stock Market: रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की सख्ती बढ़ी, बाजार में गिरावट के लिए जिम्मेदार हैं ये 6 फैक्टर्स

मार्केट न्यूज़

Stock Market: रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की सख्ती बढ़ी, बाजार में गिरावट के लिए जिम्मेदार हैं ये 6 फैक्टर्स

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड January 08, 2026, 12:33 IST

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सारांश

Stock Market: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक Bipartisan Sanctions Bill को कांग्रेस में आगे बढ़ाने की अनुमति दी है। इस बिल का मकसद उन देशों को टारगेट करना है जो रूस के साथ बिजनेस कर रहे हैं, खासकर Russian oil खरीदने वाले देशों को।

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Stock Market: विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार का सेंटीमेंट खराब किया है।

Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में आज 08 जनवरी को भारी बिकवाली हो रही है। आज के कारोबार में BSE Sensex में 713.25 अंकों की गिरावट है और यह 84,247.89 के स्तर तक लुढ़क गया है। इसके अलावा Nifty 50 भी 243.85 अंक टूटकर 25,896.90 के लेवल पर आ गया है। यह लगातार चौथा कारोबारी दिन है जब शेयर बाजार में गिरावट आई है। रूस से तेल खरीदने वाले देशों को एक बार फिर अमेरिका ने निशाना बनाया है। विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार का सेंटीमेंट खराब किया है। इसके अलावा मेटल स्टॉक्स में भारी बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाया है। यहां बाजार में गिरावट के 6 बड़े कारण बताए गए हैं।
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अमेरिका का Bipartisan Sanctions Bill

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक Bipartisan Sanctions Bill को कांग्रेस में आगे बढ़ाने की अनुमति दी है। इस बिल का मकसद उन देशों को टारगेट करना है जो रूस के साथ बिजनेस कर रहे हैं, खासकर Russian oil खरीदने वाले देशों को। इससे भारत और चीन जैसे देश पर असर पड़ सकता है। इस बिल का अहम हिस्सा यह है कि यदि कोई देश जानबूझकर रूसी तेल या यूरेनियम का व्यापार करता है, तो अमेरिका उन देशों के सभी आयात पर 500% तक का ड्यूटी लगा सकता है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर चिंता बनी हुई है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि रूस से तेल आयात करने के कारण भारतीय सामान पर अधिक टैरिफ लगाया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह डील भारत के आर्थिक विकास और बाजार स्थिरता के लिए अहम है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

शेयर बाजार में गिरावट के पीछे एक बड़ा कारण FIIs की बिकवाली है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 1527.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। जनवरी महीने में अब तक FII ने लगभग 5,760 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इससे पहले 2025 में भी रिकॉर्ड आउटफ्लो हुआ था।

वीकली एक्सपायरी

गुरुवार को सेंसेक्स डेरिवेटिव का एक्सपायरी दिन है, जिस कारण ट्रेडर अपने पुराने पोजीशन बंद या रोल ओवर करते हैं। इससे बाजार में वॉल्यूम बढ़ता है और उतार-चढ़ाव तेज हो जाता है। यह भी बाजार में गिरावट की एक वजह है।

कमजोर ग्लोबल संकेत

एशियाई मार्केट जैसे जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग लाल रंग में थे। अमेरिका का बाजार भी अधिकांश शेयरों में गिरावट के साथ बंद हुआ। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक राजनीति और व्यापार के अनिश्चित हालात निवेशकों में सतर्कता पैदा कर रहे हैं।

कच्चा तेल महंगा

ब्रेंट क्रूड का भाव आज 60.20 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गया। भारत अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें मार्केट के लिए नकारात्मक होती हैं। तेल की कीमतों में तेजी की एक वजह जियो पॉलिटिकल टेंशन हो सकती है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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