मार्केट न्यूज़
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5 min read | अपडेटेड January 30, 2025, 14:06 IST
सारांश
नॉन रेसिडेंट इंडियन (NRI) यानी कि अप्रवासी भारतीयों को हर साल टैक्स रिटर्न फाइल करने में कई तरह की प्रोसीजरल चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यूनियन बजट यानी कि केंद्रीय बजट 2025 का ऐलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन 1 फरवरी को करने जा रही हैं, उम्मीद है कि वह कुछ ऐसे मुद्दों को भी संबोधित जरूर करेंगी।

केंद्रीय बजट 2025 का ऐलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन 1 फरवरी को करने जा रही हैं
Union Budget 2025 के इंतजार की घड़ियां अब कम होती जा रही हैं। दो दिन बाद यानी कि 1 फरवरी को भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन Union Budget 2025 संसद में पेश करने जा रही हैं। इस बजट में क्या Non Resident Indians (NRIs) यानी कि अप्रवासी भारतीयों के लिए कुछ खास होगा, क्या उनके लिए टैक्स फाइलिंग थोड़ी और आसान होगी, इस तरह के सवालों का जवाब तो 1 फरवरी को ही मिलेगा, लेकिन चलिए समझने की कोशिश करते हैं कि वित्त मंत्री सीतारमन क्या इस मुद्दे में कुछ बदलाव लाएंगी? NRIs को उम्मीद होगी कि इस बजट में उनके लिए लोअर टैक्स रेट की घोषणा की जाए और साथ ही टैक्स फाइलिंग के नियमों को थोड़ा सरल बनाया जाए, इसके अलावा एक्सपर्ट्स का मानना है कि NRIs जो प्रॉपर्टी खरीदते या बेचते हैं, उसमें लेनदेन में लगने वाले टैक्स रेट को सुव्यवस्थिति करने की घोषणा भी की जा सकती है। अगर हम केंद्रीय बजट 2024 की बात करें तो, जब वह पेश किया गया था, तब उसमें NRIs के लिए अच्छी खबरों के साथ-साथ कुछ बुरी खबरें भी थीं।
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (15% से 20% तक) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (10% से 12.5% तक) दोनों पर हाई टैक्स रेट, और इंडेक्सेशन लाभों को हटाना कुछ ऐसी चीजें थीं, जो NRIs के लिए काफी नेगेटिव रहीं। इस बीच, लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट्स के लिए टैक्स रेट के मानकीकरण और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के लिए छूट सीमा में वृद्धि ने अनुपालन के मामले में कुछ राहत जरूर दी थी। इस साल NRIs के लिए क्या हो सकता है? चलिए समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन इससे पहले, यह समझना जरूरी है कि इनकम टैक्स ऐक्ट, 1961 के मुताबिक NRIs के रूप में कौन योग्य है।
जो भारतीय नागरिक एक फाइनेंशियल ईयर में भारत में 182 दिन से कम समय बिताते हैं, उन्हें टैक्स उद्देश्यों के लिए रेसिडेंट इंडियन यानी की प्रवासी भारतीय माना जाता है। इसका मतलब है कि उन्हें अपनी वर्ल्डवाइड इनकम रिपोर्ट भी करनी होगी और उस पर टैक्स देना होगा। वहीं अगर वे 182 दिनों से अधिक समय तक विदेश में रहते हैं, तो उन्हें NRI स्टेटस मिलता है और केवल भारत के अंदर कमाए गए पैसों पर टैक्स देना होता है, जिसमें प्रॉपर्टी को बेचना या रेंट से कमाया गया पैसा शामिल होता है। इसके साथ इंटरेस्ट से आने वाली इनकम और कैपिटल गेन भी शामिल हो सकते हैं।
कई ऐसे NRIs हैं, जिनके इनकम रिसोर्स काफी लिमिटेड हैं, ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि अपने अनुपालन बोझ को कम करने के लिए ऐसे NRIs को शामिल करने के लिए केंद्रीय बजट 2025 में ITR-1 फॉर्म की एलिजिबिलिटी का विस्तार हो सकता है। ITR-1, या Sahaj, फॉर्म फिलहाल में एक निवासी व्यक्ति द्वारा दाखिल किया जाना चाहिए, जिसकी कुल इनकम एक फाइनेंशियल ईयर में ₹50 लाख से अधिक नहीं है। यह फॉर्म NRIs पर लागू नहीं होता है। इसके अलावा, टैक्स एक्सपर्ट्स ने यह भी सिफारिश की है कि आने वाले बजट में इनकम टैक्स ऐक्ट, 1961 के सेक्शन 139 में संशोधन किया जाना चाहिए, ताकि NRIs को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से बाहर रखा जा सके, जब उनकी इनकम छूट सीमा से कम हो, लेकिन विदेश यात्रा का खर्च सालाना ₹2 लाख से अधिक हो। मौजूदा नियमों के मुताबिक, अगर किसी NRI ने अपने भारतीय बैंक अकाउंट से खुद या किसी अन्य व्यक्ति के लिए विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से अधिक खर्च किया है, तो उसे आईटीआर दाखिल करना होगा, भले ही उसकी आय छूट सीमा से कम हो। मौजूदा इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, सभी NRI, भारतीय मूल के व्यक्ति (पीआईओ), या भारत के विदेशी नागरिक (ओसीआई) को भारत में टैक्सेबल इनकम होने पर आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है।
NRI को हर साल इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय कई प्रोसीजरल चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उम्मीद है कि वित्त मंत्री सीतारमण केंद्रीय बजट 2025 में ऐसे कुछ मुद्दों को संबोधित करेंगी। टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय NRI के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि उन्हें भारतीय बैंक अकाउंट्स के जरिए टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि वित्त मंत्रालय को एनआरआई को अपने विदेशी अकाउंट्स से सीधे टैक्स का भुगतान करने की अनुमति देनी चाहिए, जिससे प्रोसेस थोड़ा सिंपल हो सकता है। इसी तरह, इनकम टैक्स रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन वर्तमान में केवल भारतीय मोबाइल नंबरों या बैंक अकाउंट्स के जरिए किया जा सकता है, जो थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड हो जाता है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि एनआरआई के लिए ईमेल-बेस्ड ऑथेंटिकेशन या विदेशी मोबाइल नंबरों के जरिए वेरिफिकेशन की सुविधा होनी चाहिए और इस नियम में संशोधन किया जा सकता है।
भारत में प्रॉपर्टी बेचने वाले NRI को इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 194-आईए के अनुपालन में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। रियल एस्टेट लेनदेन में, अगर बेचने वाला पक्ष निवासी भारतीय है, तो ₹50 लाख से अधिक के लेनदेन पर 1% का टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) लागू होता है। हालांकि, जब बेचने वाला NRI होता है, तो हाई टैक्स रेट्स लागू होते हैं। इसके अलावा, खरीदारों को टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर (टीएएन), ई-टीडीएस रिटर्न जमा करने और कॉम्प्लिकेटेड टीडीएस प्रोसेस का मैनेजमेंट करने जैसी अतिरिक्त आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।
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