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4 min read | अपडेटेड September 26, 2025, 09:58 IST
सारांश
IPCA Laboratories, Ajanta Pharma, Gland Pharma और Divi's Laboratories के शेयरों में भी करीब 3 फीसदी की कमजोरी है। Granules India, Zydus Lifesciences, Mankind Pharma और Alkem Laboratories में भी 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट है।
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Tariff Impact on Pharma Stocks: निफ्टी फार्मा इंडेक्स में करीब 2.25 फीसदी से अधिक की गिरावट नजर आ रही है।
आज के कारोबार में निफ्टी फार्मा इंडेक्स के सभी शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे हैं। IPCA Laboratories, Ajanta Pharma, Gland Pharma और Divi's Laboratories के शेयरों में भी करीब 3 फीसदी की कमजोरी है। Granules India, Zydus Lifesciences, Mankind Pharma और Alkem Laboratories में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट है। Cipla, Glenmark Pharmaceuticals, Lupin, Aurobindo Pharma और Dr Reddy's Laboratories के शेयरों में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट है।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका किसी भी ब्रांडेड या पेटेंट वाली दवा पर 100% टैरिफ लगाएगा। लेकिन अगर कोई कंपनी अमेरिका में अपनी दवा फैक्ट्री बना रही है या निर्माण शुरू कर चुकी है, तो उसे इस टैक्स से छूट मिलेगी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय दवा कंपनियों पर इसका असर बहुत बड़ा नहीं होगा, क्योंकि भारत से अमेरिका में ज्यादातर जेनेरिक दवाएं जाती हैं। जेनेरिक दवाएं उन्हें कहते हैं जिनका पेटेंट खत्म हो चुका है और जो कम दाम में मिलती हैं। फिर भी Sun Pharma जैसी कंपनियों को नुकसान ज्यादा हो सकता है, क्योंकि इनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा स्पेशलिटी मेडिसिन्स से आता है, जो ब्रांडेड और महंगी होती हैं। भले ही असली असर सीमित हो, लेकिन ऐसा ऐलान मार्केट सेंटीमेंट पर नकारात्मक असर डालता है।
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा दवा बाजार है। साल 2024 में अमेरिका ने करीब 212.67 अरब डॉलर की दवाएं आयात कीं। वहां 90% प्रिस्क्रिप्शन जेनेरिक दवाओं के लिए होते हैं, लेकिन खर्च का बड़ा हिस्सा ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर होता है। यानी अमेरिकी लोग दवाओं पर बहुत पैसा खर्च करते हैं, लेकिन उसका ज्यादातर हिस्सा महंगी पेटेंट दवाओं पर जाता है।
भारत इस मामले में अमेरिका के लिए बेहद अहम है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की 47% जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं। यानी अमेरिका में सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने में भारत की बड़ी भूमिका है। इसका उदाहरण है भारतीय जेनेरिक रोसुवास्टेटिन (Rosuvastatin), जो कोलेस्ट्रॉल की दवा है। जब यह भारत से अमेरिका में आई, तो 2016 से 2022 के बीच अमेरिका में इस दवा को खरीदने वाले लोगों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई, क्योंकि यह सस्ती है।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ 10–15% से ज्यादा लगाया गया, तो भारतीय कंपनियां अमेरिका के बाजार से निकल सकती हैं। इसका नतीजा यह होगा कि अमेरिका में दवाओं की कमी हो जाएगी और अमेरिकी मरीजों को दवाएं महंगी मिलेंगी। यानी यह कदम अमेरिका की अपनी पब्लिक हेल्थ सिक्योरिटी के लिए खतरा बन सकता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा दवा खरीदार है। भारत की कुल दवा निर्यात का करीब 31% हिस्सा अमेरिका को जाता है। इसमें ज़्यादातर जेनेरिक दवाएं होती हैं। अभी भारत अमेरिका से आने वाली दवाओं पर 10% टैक्स लगाता है, लेकिन अमेरिका भारत से जाने वाली दवाओं पर कोई टैक्स नहीं लगाता। ट्रंप का यह नया फैसला इस स्थिति को पूरी तरह बदल देगा।
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