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Gas Price Hike: सरकार के फैसले के बाद Reliance Industries और BPCL के शेयरों में हलचल, हर डीटेल यहां

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 05, 2026, 09:39 IST

सारांश

सरकार की नीति के तहत ऐसे मुश्किल क्षेत्रों से गैस निकालने वाली कंपनियों को मार्केटिंग और कीमत तय करने की फ्रीडम दी गई है, लेकिन उनके लिए सरकार द्वारा एक अधिकतम कीमत सीमा तय की जाती है। नई सीमा बढ़ने से इन कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड

सरकार के इस फैसले के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम के शेयरों में दिख सकती है हलचल (Photo: Shutterstock)

सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के केजी-डी6 ब्लॉक जैसे मुश्किल क्षेत्रों से उत्पादित प्राकृतिक गैस की अधिकतम कीमत सीमा बढ़ाकर 9.89 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कर दी। यह नई कीमत सीमा 1 अक्टूबर, 2026 से 31 मार्च, 2027 तक लागू रहेगी। इससे पहले यह सीमा 8.90 डॉलर प्रति यूनिट थी। वीकेंड पर लिए गए इस फैसले का असर आज रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम के शेयरों पर देखने को मिल रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम के शेयरों में आज 1% से ज्यादा की बढ़त देखी गई है। यह बदलाव गहरे समुद्र, बेहद-गहरे समुद्र और उच्च दबाव और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों से निकलने वाली गैस पर लागू होगा। हालांकि, पब्लिक सेक्टर की ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) और ऑयल इंडिया लि. के पुराने क्षेत्रों से उत्पादित गैस की कीमत 7 डॉलर प्रति यूनिट पर ही कायम रहेगी।

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सरकार की नीति के तहत ऐसे मुश्किल क्षेत्रों से गैस निकालने वाली कंपनियों को मार्केटिंग और कीमत तय करने की फ्रीडम दी गई है, लेकिन उनके लिए सरकार द्वारा एक अधिकतम कीमत सीमा तय की जाती है। नई सीमा बढ़ने से इन कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि ऐसे क्षेत्रों में गैस का उत्पादन सामान्य और पुराने क्षेत्रों की तुलना में अधिक महंगा होता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) की अधिसूचना के अनुसार, यह गैस के लिए यह नई सीमा 1 अक्टूबर, 2026 से 31 मार्च, 2027 तक लागू रहेगी। ओएनजीसी और ओआईएल के नामित क्षेत्रों से निकलने वाली गैस के लिए एपीएम (प्रशासित मूल्य तंत्र) की कीमत अक्टूबर में 11.22 डॉलर प्रति इकाई रहेगी। लेकिन वास्तविक कीमत की सीमा 7 डॉलर प्रति यूनिट रहेगी।

एपीएम गैस का मूल्य ओएनजीसी और ओआईल के पुराने क्षेत्रों से उत्पादित गैस के लिए लागू होता है। इसका इस्तेमाल शहर गैस डिस्ट्रीब्यूशन, उर्वरक और बिजली जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में होता है। ओएनजीसी और ओआईएल के नामित क्षेत्रों के नए कुओं से निकालने वाली गैस के लिए सरकार ने मौजूदा एपीएम दाम पर 10% के ‘प्रीमियम’ की अनुमति दी है, लेकिन यह लागू सीमा के तहत होगा। अक्टूबर के लिए एपीएम दाम 7 डॉलर प्रति यूनिट तय करने से नए कुओं से गैस का दाम 7.70 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू होगा।

सरकार ने अप्रैल, 2023 में पुराने गैस क्षेत्रों के लिए मूल्य निर्धारण की व्यवस्था में बदलाव किया था। इसके तहत गैस की कीमत को कच्चे तेल के आयात मूल्य के 10% से जोड़ा गया, साथ ही न्यूनतम और अधिकतम कीमत की सीमा तय की गई। एपीएम गैस की अधिकतम कीमत अप्रैल, 2025 में बढ़ाकर 6.75 डॉलर और अप्रैल, 2026 में सात डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की गई।

प्राकृतिक गैस उर्वरक उत्पादन में प्रमुख कच्चा माल है। इसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन के साथ-साथ शहर गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों द्वारा सीएनजी और पाइप के जरिये घरों में आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) की आपूर्ति में भी किया जाता है। ऐसे में घरेलू गैस की कीमतों में बदलाव का असर इन क्षेत्रों की लागत पर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, सरकार के इस फैसले से मुश्किल और महंगे गैस क्षेत्रों में काम कर रही कंपनियों को अधिक कीमत वसूलने की गुंजाइश मिलेगी, जबकि ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के पुराने क्षेत्रों से मिलने वाली गैस की कीमत सीमा फिलहाल 7 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू पर बनी रहेगी।

PTI इनपुट के साथ

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