मार्केट न्यूज़
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3 min read | अपडेटेड March 30, 2026, 11:40 IST
सारांश
प्रॉपर्टी शेयर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट अपना तीसरा और नया स्कीम 'प्रॉपशेयर सेलेस्टिया' का आईपीओ लेकर आ रहा है। यह आईपीओ 10 अप्रैल 2026 को खुलने वाला है। इसके जरिए निवेशक कमर्शियल प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी खरीद सकेंगे। यह भारत का पहला एसएम रीट है, जो निवेशकों को रेगुलर रेंटल इनकम का मौका देता है।

प्रॉपर्टी शेयर का नया आईपीओ निवेशकों को बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में निवेश का मौका दे रहा है।
रियल एस्टेट सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए प्रॉपर्टी शेयर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट अपना नया आईपीओ लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने अपनी तीसरी स्कीम 'प्रॉपशेयर सेलेस्टिया' के लिए जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए हैं और यह आईपीओ 10 अप्रैल 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। भारत के पहले रजिस्टर्ड स्मॉल एंड मीडियम रीट (SM REIT) के तौर पर प्रॉपर्टी शेयर ने पहले ही मार्केट में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। यह आईपीओ उन लोगों के लिए एक बड़ा मौका है जो कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन जिनके पास पूरी बिल्डिंग खरीदने के लिए करोड़ों रुपये नहीं हैं।
प्रॉपर्टी शेयर इस आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से नए और प्रीमियम कमर्शियल ऑफिस स्पेस खरीदने के लिए करेगा। कंपनी का फोकस बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के उन ऑफिस एरिया पर है, जहां बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां काम करती हैं। आईपीओ से मिलने वाले फंड को स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) के जरिए प्रॉपर्टी खरीदने और उससे जुड़े कानूनी खर्चों जैसे स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन में लगाया जाएगा। इसके अलावा, कंपनी का एक बड़ा मकसद मौजूदा कर्जों को चुकाना और अपने फाइनेंशियल हेल्थ को और भी बेहतर बनाना है। इस तरह से कंपनी अपने एसेट बेस को बढ़ाकर निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने की कोशिश करेगी।
इस स्कीम में निवेश करने वाले लोगों को दो तरह से फायदा मिलने की उम्मीद है। पहला यह कि इन ऑफिस स्पेस से जो किराया आएगा, उसे समय-समय पर निवेशकों के बीच बांटा जाएगा। कंपनी ने आने वाले कुछ सालों के लिए करीब 8 से 9 पर्सेंट तक के रेंटल यील्ड का अनुमान लगाया है। दूसरा फायदा प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने से होगा। अगर फ्यूचर में उस एरिया की जमीन या बिल्डिंग के दाम बढ़ते हैं, तो निवेशकों के यूनिट्स की वैल्यू भी बढ़ जाएगी। यह निवेश का एक ऐसा हाइब्रिड मॉडल है जो शेयर बाजार की तुलना में थोड़ा स्थिर माना जाता है और रेगुलर इनकम का जरिया बनता है।
किसी भी निवेश की तरह प्रॉपर्टी शेयर के इस आईपीओ में भी कुछ रिस्क जुड़े हुए हैं जिनका ध्यान रखना बहुत जरूरी है। सबसे बड़ा रिस्क रियल एस्टेट मार्केट की सुस्ती है। अगर भविष्य में ऑफिस स्पेस की डिमांड कम होती है या बड़े किराएदार ऑफिस खाली कर देते हैं, तो इससे होने वाली रेंटल इनकम पर सीधा असर पड़ेगा। इसके अलावा, यह एक स्मॉल एंड मीडियम रीट है, इसलिए इसमें रेगुलर शेयरों के मुकाबले लिक्विडिटी थोड़ी कम हो सकती है। यानी जरूरत पड़ने पर यूनिट्स को तुरंत बेचना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। साथ ही, ब्याज दरों में होने वाले बदलाव भी इसके रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।
चूंकि यह एक सेबी (SEBI) रजिस्टर्ड ट्रस्ट है, इसलिए इसमें पारदर्शिता और सुरक्षा के कड़े नियम लागू होते हैं। कंपनी को अपनी हर प्रॉपर्टी और उससे होने वाली कमाई का पूरा हिसाब देना होता है। इन्वेस्टमेंट मैनेजर भी इस स्कीम में अपनी 5 पर्सेंट हिस्सेदारी खुद लगाता है, जिससे निवेशकों का भरोसा बना रहता है। इस आईपीओ में कम से कम 10 लाख रुपये का निवेश करना होगा, जो इसे हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स के लिए एक अट्रैक्टिव ऑप्शन बनाता है।
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