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  1. पावर शेयरों में क्यों मची हलचल? स्मार्ट मीटर की सुस्त रफ्तार पर सरकारी रिपोर्ट ने बढ़ाया सस्पेंस

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पावर शेयरों में क्यों मची हलचल? स्मार्ट मीटर की सुस्त रफ्तार पर सरकारी रिपोर्ट ने बढ़ाया सस्पेंस

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड March 13, 2026, 12:08 IST

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सारांश

शेयर बाजार में आज पावर सेक्टर के स्टॉक्स में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। जहां एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी और अडानी पावर जैसे शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं, वहीं टाटा पावर और टॉरेंट पावर में गिरावट है।

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पावर स्टॉक्स फोकस में क्यों हैं?

शेयर बाजार में आज के कारोबार के दौरान पावर सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। NSE पर मौजूद डेटा के मुताबिक, पावर सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी में से एक एनटीपीसी (NTPC) का शेयर फिलहाल 390.30 रुपये पर ट्रेड कर रहा है जिसमें मामूली गिरावट देखी गई है। वहीं, एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी के शेयर ने आज कमाल कर दिया है और इसमें 2.5 पर्सेंट की बड़ी बढ़त देखने को मिल रही है जिससे यह 100.06 रुपये के लेवल पर पहुंच गया है। अडानी पावर और पावर ग्रिड के शेयर भी हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं जो निवेशकों के लिए थोड़ी राहत की बात है। लेकिन दूसरी तरफ टाटा पावर, टॉरेंट पावर और अडानी ग्रीन जैसे शेयरों में दबाव साफ दिख रहा है और ये करीब 1 पर्सेंट तक नीचे ट्रेड कर रहे हैं।

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स्मार्ट मीटर की सुस्त रफ्तार पर संसद की रिपोर्ट

शेयरों की इस चाल के बीच संसद में पावर मिनिस्ट्री को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की गई है। इस रिपोर्ट में देश भर में स्मार्ट मीटर लगाने की धीमी रफ्तार पर गहरी चिंता जताई गई है। सरकार ने पहले मार्च 2025 तक देश में 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने का बड़ा लक्ष्य रखा था। लेकिन ताजे आंकड़ों के मुताबिक 15 फरवरी 2026 तक सिर्फ 5.83 करोड़ मीटर ही लगाए जा सके हैं। इसका मतलब है कि हम अभी भी अपने लक्ष्य से बहुत दूर हैं। हालांकि, अब रोजाना करीब 1 लाख 35 हजार मीटर लगाने का काम हो रहा है, लेकिन कमेटी का कहना है कि 2028 तक के नए टारगेट को पूरा करने के लिए यह रफ्तार भी कम पड़ सकती है।

कंपनियों के लिए क्या है इसमें खास?

पावर सेक्टर की कंपनियों के लिए यह रिपोर्ट एक बड़े मौके की तरह देखी जा रही है। अगर सरकार 2028 तक 25 करोड़ मीटर लगाने के काम में तेजी लाती है, तो इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिलेगा जो मीटर बनाने या उनके ऑपरेशन से जुड़ी हुई हैं। पावर ग्रिड और एनटीपीसी जैसी सरकारी कंपनियां इस बड़े मिशन में अहम भूमिका निभा रही हैं। आने वाले समय में इन कंपनियों के ऑपरेशनल परफॉरमेंस में सुधार की उम्मीद है क्योंकि स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी कम होगी और कंपनियों का रेवेन्यू बढ़ेगा। यही वजह है कि आज के गिरते बाजार में भी कुछ पावर शेयरों में खरीदारी का मूड बना हुआ है।

ग्राहकों की शिकायतें और क्वालिटी का मुद्दा

संसद की कमेटी ने सिर्फ रफ्तार ही नहीं, बल्कि काम की क्वालिटी पर भी सवाल उठाए हैं। देश भर से उपभोक्ता लगातार शिकायत कर रहे हैं कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल में गड़बड़ी आ रही है। कई लोगों को डेटा प्राइवेसी और बिलिंग में होने वाली गलतियों की चिंता सता रही है। कमेटी ने सरकार को सलाह दी है कि मीटर लगाने से पहले उनकी कड़ी टेस्टिंग होनी चाहिए ताकि ग्राहकों का भरोसा बना रहे। अगर इन शिकायतों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट को लागू करने में बड़ी दिक्कत आ सकती है और इसका असर इन कंपनियों के फ्यूचर प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ सकता है।

**(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।) **

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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