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  1. PFC–REC Merger: NBFC सेक्टर में स्केल और एफिशिएंसी बढ़ाने की योजना, शेयरहोल्डर्स के लिए 4 जरूरी बातें

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PFC–REC Merger: NBFC सेक्टर में स्केल और एफिशिएंसी बढ़ाने की योजना, शेयरहोल्डर्स के लिए 4 जरूरी बातें

Upstox

3 min read | अपडेटेड February 09, 2026, 11:21 IST

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सारांश

मार्च 2019 में, कैबिनेट कमेटी ऑन इकनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की मंजूरी के बाद PFC ने सरकार से REC की 52.63% हिस्सेदारी करीब ₹14,500 करोड़ में खरीदी थी। तभी से REC, PFC की सब्सिडियरी कंपनी के रूप में काम कर रही है।

PFC–REC Merger

PFC–REC Merger: REC का शेयर 3.62 फीसदी गिरकर 359.50 रुपये प्रति शेयर के भाव पर ट्रेड कर रहा है।

Power Finance Corporation (PFC) बोर्ड ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी REC Limited के खुद में मर्जर के लिए मंजूरी दे दी है। इस खबर के बाद आज इन दोनों शेयरों में गिरावट नजर आ रही है। REC का शेयर 3.62 फीसदी गिरकर 359.50 रुपये प्रति शेयर के भाव पर ट्रेड कर रहा है। दूसरी तरफ PFC भी 1.77 परसेंट गिरकर 411.80 के स्तर पर आ गया है। यह फैसला रविवार को बजट में सरकार द्वारा किए गए ऐलान के बाद आया है। मर्जर के बाद भी PFC एक सरकारी कंपनी ही बनी रहेगी, यानी कंपनी पर सरकार का नियंत्रण बना रहेगा।

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क्यों किया जा रहा है PFC–REC मर्जर

दरअसल, यह मर्जर कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। मार्च 2019 में, कैबिनेट कमेटी ऑन इकनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की मंजूरी के बाद PFC ने सरकार से REC की 52.63% हिस्सेदारी करीब ₹14,500 करोड़ में खरीदी थी। तभी से REC, PFC की सब्सिडियरी कंपनी के रूप में काम कर रही है। अब सरकार इस होल्डिंग-स्ट्रक्चर को खत्म करके दोनों कंपनियों को एक ही इकाई में लाना चाहती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि विकसित भारत के विजन को पूरा करने के लिए NBFC सेक्टर में स्केल और एफिशिएंसी बढ़ाना जरूरी है। इसी सोच के तहत पब्लिक सेक्टर NBFCs में रीस्ट्रक्चरिंग का पहला कदम PFC और REC के मर्जर के रूप में उठाया जा रहा है। मतलब सरकार चाहती है कि छोटी-छोटी इकाइयों की बजाय एक बड़ी और मजबूत संस्था बने।

PFC-REC मर्जर पर UBS की राय, 4 जरूरी बातें

  • UBS के मुताबिक, PFC और REC दोनों ने कन्फर्म कर दिया है कि बजट ऐलान के बाद अब मर्जर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मौजूदा स्थिति में PFC के पास REC की 52.6% हिस्सेदारी है और PFC खुद 56% केंद्र सरकार के स्वामित्व में है। मर्जर के बाद REC को PFC में मिला दिया जाएगा और इसके बदले REC के शेयरहोल्डर्स को PFC के नए शेयर जारी किए जाएंगे।
  • यह मर्जर Companies Act के तहत होगा और शेयरों का एक्सचेंज रेशियो एक स्वतंत्र वैल्यूएशन के आधार पर तय किया जाएगा। UBS का अनुमान है कि मौजूदा कीमतों पर REC के हर 9 शेयर के बदले PFC के करीब 8 शेयर मिल सकते हैं। यानी REC शेयरहोल्डर्स के लिए सबसे अहम सवाल फिलहाल यही है कि फाइनल स्वैप रेशियो क्या रहेगा।
  • UBS का कहना है कि इस मर्जर से PFC के कुल शेयरों की संख्या करीब 34% बढ़ सकती है। मर्जर के बाद बनी नई इकाई को बेहतर प्राइसिंग पावर मिलेगी, क्योंकि दोनों कंपनियों का कस्टमर बेस लगभग एक जैसा है। अभी दोनों एक ही ग्राहकों को लोन देने के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करती हैं, जो मर्जर के बाद खत्म हो जाएगी। इससे ग्रोथ तेज हो सकती है और रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) में सुधार आ सकता है। साथ ही, होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट भी खत्म होगा, जो अभी PFC की वैल्यूएशन पर असर डालता है।
  • UBS का यह भी कहना है कि सरकार इंफ्रा और रिन्यूएबल सेक्टर में बड़े संस्थानों के जरिए फंडिंग बढ़ाना चाहती है। ऐसे में यह मर्जर ग्रोथ को और रफ्तार दे सकता है। हालांकि, एक अहम मुद्दा यह है कि मर्जर के बाद सरकार की हिस्सेदारी घटने के बावजूद PFC और REC दोनों ही कम लागत पर फंडिंग के लिए सरकारी समर्थन पर निर्भर रहते हैं। इसलिए आगे भी सरकार का सपोर्ट बना रहना बेहद जरूरी होगा।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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