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4 min read | अपडेटेड October 20, 2026, 09:10 IST
सारांश
पारस हेल्थ ब्रांड नाम से अस्पताल चलाने वाली कंपनी पारस हेल्थकेयर का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा। कंपनी ने इसका प्राइस बैंड 660 से 693 रुपये प्रति शेयर तय किया है। यह इश्यू 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा। कंपनी इस आईपीओ से करीब 1,522 करोड़ रुपये तक जुटाने की तैयारी में है।

पारस हेल्थकेयर का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा।
हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए एक नया मौका आने वाला है। पारस हेल्थ ब्रांड नाम से अस्पतालों का संचालन करने वाली पारस हेल्थकेयर अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ लेकर आ रही है। यह आईपीओ 21 अक्टूबर 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और निवेशक इसमें 23 अक्टूबर 2026 तक बोली लगा सकेंगे। कंपनी का यह इश्यू पूरी तरह से बुक बिल्डिंग प्रोसेस पर आधारित है। कंपनी ने अपने शेयरों को BSE और NSE दोनों प्रमुख एक्सचेंजों पर लिस्ट कराने का फैसला किया है।
कंपनी इस आईपीओ के जरिए एक रुपये के फेस वैल्यू वाले कुल 2,19,69,695 इक्विटी शेयर जारी करने जा रही है। इसके लिए 660 रुपये से 693 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है। यह प्राइस बैंड फेस वैल्यू के मुकाबले 660 गुना से लेकर 693 गुना तक है। प्राइस बैंड के निचले स्तर पर यह आईपीओ करीब 1,450 करोड़ रुपये का होगा, जबकि ऊपरी स्तर पर कंपनी करीब 1,522.50 करोड़ रुपये जुटाएगी। निवेशकों को कम से कम 21 शेयरों के एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा और इसके बाद 21 के गुणांक में ही बोली लगाई जा सकेगी। इस इश्यू में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी क्यूआईबी के लिए अधिकतम 75% हिस्सा रिजर्व रखा गया है, जिसमें 5% हिस्सा म्यूचुअल फंड्स के लिए है। वहीं नॉन-इंस्टीट्यूशनल बिडर्स के लिए कम से कम 15% और रिटेल निवेशकों के लिए बाकी 10% हिस्सा तय किया गया है।
पारस हेल्थकेयर मुख्य रूप से नॉर्थ इंडिया, बिहार और झारखंड में गंभीर बीमारियों के इलाज से जुड़ी सेवाएं देती है। 30 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार कंपनी के पास आठ अस्पतालों का मजबूत नेटवर्क है, जिनमें कुल 2,211 बेड्स की क्षमता है। कंपनी ने अपना पहला अस्पताल साल 2006 में हरियाणा के गुरुग्राम में शुरू किया था। अब इसका नेटवर्क पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में फैल चुका है। इसमें हरियाणा के गुरुग्राम और पंचकूला, बिहार के पटना और दरभंगा, उत्तर प्रदेश के कानपुर, राजस्थान के उदयपुर, झारखंड के रांची और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में अस्पताल शामिल हैं। कंपनी के पास 1,084 डॉक्टर्स और 1,937 नर्सों की एक अनुभवी टीम मौजूद है। कंपनी कैंसर, न्यूरो, हृदय रोग और ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अत्याधुनिक मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करती है।
कंपनी आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम का बड़ा हिस्सा अपने ऊपर मौजूद कर्ज को कम करने में लगाएगी। जुटाई गई राशि से कंपनी अपने पुराने कर्ज का पूरा या कुछ हिस्सा प्रीपेमेंट या तय समय पर पेमेंट करेगी। इसके साथ ही कंपनी अपनी पूरी हिस्सेदारी वाली सब्सिडियरी कंपनी प्लस मेडिकेयर हॉस्पिटल्स में निवेश करेगी, जो श्रीनगर में अस्पताल का संचालन करती है। इस फंड से उस सब्सिडियरी का भी कर्ज चुकाया जाएगा। बाकी बची रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने सामान्य कॉर्पोरेट कामकाज और जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगी। कर्ज कम होने से कंपनी पर ब्याज का बोझ घटेगा और वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 को समाप्त हुई अवधि में कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू 27.66% बढ़कर 4,702.78 मिलियन रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 3,683.87 मिलियन रुपये था। इस दौरान कंपनी ने 496.82 मिलियन रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में इसे 10.24 मिलियन रुपये का नुकसान हुआ था। हालांकि कंपनी के सामने कुछ प्रमुख चुनौतियां भी हैं। कंपनी का 68% से अधिक रेवेन्यू केवल उत्तर भारत के अस्पतालों से आता है। इसके अलावा कंपनी में कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर काफी ज्यादा रही है। कंपनी के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों और कंसल्टेंट की फीस में जाता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ही निवेशकों को इस आईपीओ में कदम उठाना चाहिए।
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