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DRDO ने Paras Defence को दिया ₹26.59 करोड़ का ऑर्डर, हाइपरस्पेक्ट्रल मिशन पर करेगी काम, शेयरों में एक्शन

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड September 28, 2026, 14:20 IST

सारांश

DRDO से मिले इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत पारस डिफेंस लीड सिस्टम इंटिग्रेटर के रूप में काम करेगी। कंपनी को हाइपरस्पेक्ट्रल मिशन के लिए ऑप्टिक्स और ऑप्टो-मेकेनिकल यूनिट की पूरी डिजाइन, एनालिसिस, फैब्रिकेशन, मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली करनी होगी।

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पारस डिफेंस के शेयरों में आज क्यों दिखी हलचल? (Photo: Shutterstock)

डिफेंस और स्पेस सेक्टर में काम करने वाली पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को एक बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO), डिफेंस मिनिस्ट्री से करीब 26.59 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर में टैक्स भी शामिल हैं। कंपनी के लिए यह ऑर्डर इसलिए अहम है क्योंकि इसके तहत उसे हाइपरस्पेक्ट्रल मिशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण स्पेस-बेस्ड सिस्टम के विकास का काम करना है। इसका असर आज पारस डिफेंस के शेयरों पर भी देखने को मिला। दोपहर करीब 2:15 पारस डिफेंस के शेयर 1.25% यानी कि 17-18 रुपये गिरकर 1,303 रुपये प्रति शेयर के आसपास ट्रेड हो रहे थे, जबकि दिन में कंपनी के शेयर 1,332 रुपये प्रति शेयर तक भी पहुंच गए थे।

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पारस डिफेंस को क्या करना होगा?

DRDO से मिले इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत पारस डिफेंस लीड सिस्टम इंटिग्रेटर के रूप में काम करेगी। कंपनी को हाइपरस्पेक्ट्रल मिशन के लिए ऑप्टिक्स और ऑप्टो-मेकेनिकल यूनिट की पूरी डिजाइन, एनालिसिस, फैब्रिकेशन, मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली करनी होगी। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, तैयार होने वाला पूरा पेलोड एक स्पेस-बोर्न सिस्टम के रूप में क्वालिफाई करेगा और इसका संभावित इस्तेमाल अर्थ ऑब्जर्वेशन के लिए किया जा सकता है।

27 सितंबर 2027 तक पूरी करनी होगी डिलीवरी

इस ऑर्डर की डिलीवरी की समयसीमा भी तय की गई है। कंपनी को यह काम 27 सितंबर 2027 या उससे पहले पूरा करना है। ऑर्डर की कुल वैल्यू करीब 26.59 करोड़ रुपये है। इसके अलावा कंपनी के लिए 79.76 लाख रुपये से ज्यादा की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी अमाउंट भी निर्धारित की गई है।

स्पेस और डिफेंस सेक्टर में बढ़ता फोकस

इस ऑर्डर से पारस डिफेंस के कारोबार में डिफेंस के साथ-साथ स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोजेक्ट्स की भूमिका भी सामने आती है। हाइपरस्पेक्ट्रल मिशन में अलग-अलग स्पेक्ट्रल बैंड्स से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल पृथ्वी की सतह और उससे जुड़ी गतिविधियों के अध्ययन में किया जा सकता है। हालांकि, कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग में इस विशेष मिशन के अंतिम उपयोग के बारे में केवल संभावित अर्थ ऑब्जर्वेशन का उल्लेख किया गया है।

निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

26.59 करोड़ रुपये का यह ऑर्डर कंपनी के लिए एक नया कारोबारी अवसर है, खासकर ऐसे समय में जब भारत में डिफेंस और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े स्वदेशी प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली तक कई स्तरों पर कंपनी की भूमिका होगी।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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