मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड January 05, 2026, 14:24 IST
सारांश
आज भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली देखी जा रही है। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गया है, जिसमें इंफोसिस के शेयर में 3.5 प्रतिशत की सबसे बड़ी गिरावट आई है। अमेरिकी टैरिफ की धमकी और वैश्विक तनाव ने टेक शेयरों पर दबाव बना दिया है।

आईटी सेक्टर के शेयरों में आज मची भारी खलबली
भारतीय शेयर बाजार में आज आईटी सेक्टर के लिए एक काला दिन साबित हो रहा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन ही निफ्टी आईटी इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह सभी सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरने वाला इंडेक्स बन गया है। आलम यह है कि निफ्टी आईटी में शामिल सभी कंपनियां लाल निशान में कारोबार कर रही हैं। सबसे बुरा हाल देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस का है, जिसके शेयर में इंट्रा-डे के दौरान 3.5 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई। इसके बाद एचसीएल टेक्नोलॉजीज, विप्रो, परसिस्टेंट सिस्टम्स और टेक महिंद्रा के शेयरों में भी 2-2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
आईटी शेयरों में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा हाथ वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों की निगेटिव रिपोर्ट को माना जा रहा है। एचएसबीसी (HSBC) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आईटी सेक्टर अब लंबे समय तक डबल डिजिट में बढ़ने वाला सेक्टर नहीं रह गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब इन शेयरों में पहले जैसी रिटर्न मिलने की संभावना कम है और निवेशकों को इनके उतार-चढ़ाव को लेकर बहुत सक्रिय रहने की जरूरत होगी। वहीं जेफरीज (Jefferies) ने भी वित्त वर्ष 2027 के लिए विकास दर के अनुमान को उम्मीद से कम बताया है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और एआई (AI) के बढ़ते प्रभाव के कारण आईटी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ पर दबाव बना रहेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक ताजा चेतावनी ने भारतीय तकनीकी कंपनियों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी है कि यदि उसने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर सहयोग नहीं किया, तो वॉशिंगटन भारतीय आयात पर टैरिफ को और बढ़ा सकता है। बता दें कि साल 2025 में पहले ही अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों का सबसे बड़ा कारोबार अमेरिका से आता है, इसलिए टैरिफ बढ़ने की आशंका ने इन कंपनियों के भविष्य के मुनाफे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शेयर बाजार में इस गिरावट की तीसरी बड़ी वजह रुपये पर बना लगातार दबाव है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण डॉलर की मांग बढ़ गई है, जिससे रुपया लगातार नौवें सत्र में कमजोर हुआ है। इसके साथ ही, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर किए गए सैन्य हमले और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के तेल व्यापार पर नियंत्रण की बात करने से दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है, जिसका सीधा असर जोखिम वाले एसेट्स जैसे कि आईटी शेयरों पर पड़ रहा है।
अगले हफ्ते से प्रमुख आईटी कंपनियां अपने तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे पेश करने जा रही हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि इन नतीजों से पहले निवेशक काफी सतर्क हैं। सभी की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि कंपनियां वित्त वर्ष 2026 के लिए क्या गाइडेंस देती हैं और आने वाले साल के लिए उनकी रेवेन्यू ग्रोथ की क्या योजना है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि आईटी कंपनियों के लिए आने वाला समय चुनौतियों भरा हो सकता है।
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