मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड February 12, 2026, 16:12 IST
सारांश
अर्निंग सीजन खत्म होने वाला है और इस बार निफ्टी 500 की सात कंपनियों ने जबरदस्त वापसी की है। पेटीएम, डीएलएफ और आईएफसीआई जैसी कंपनियों ने पिछले साल के घाटे को पीछे छोड़ते हुए शानदार नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। स्मॉलकैप कंपनियों के मुनाफे में सबसे ज्यादा करीब 40 परसेंट की बढ़त दिखी है।

घाटे से मुनाफे के सफर पर निकलीं ये दिग्गज कंपनियां जिन्होंने इस अर्निंग सीजन में बाजी पलटी है।
दिसंबर तिमाही के नतीजे अब अंतिम दौर में हैं और इस बार बाजार में कई ऐसी कंपनियों की चर्चा है जिन्होंने अपनी किस्मत पूरी तरह बदल ली है। इकिगाई एसेट मैनेजर के फाउंडर पंकज टिबरेवाल के मुताबिक, भारतीय कंपनियों ने रेवेन्यू में औसतन 12.1 परसेंट और एडजस्टेड नेट प्रॉफिट में 12.2 परसेंट की बढ़त दिखाई है। लार्जकैप कंपनियों का मुनाफा जहां 8.7 परसेंट बढ़ा है, वहीं स्मॉलकैप कंपनियों ने 39.9 परसेंट की धमाकेदार बढ़त के साथ सबको चौंका दिया है। इस पूरे सीजन में निफ्टी 500 इंडेक्स की सात ऐसी कंपनियां सामने आई हैं जो पिछले साल घाटे में थीं लेकिन इस बार उन्होंने शानदार नेट प्रॉफिट कमाया है।
पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस ने इस तिमाही में जबरदस्त वापसी की है। स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी ने 145 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जबकि पिछले साल इसी दौरान उसे 205 करोड़ रुपये का बड़ा घाटा हुआ था। कंसोलिडेटेड आधार पर भी कंपनी 225 करोड़ रुपये के मुनाफे में आ गई है, जबकि पिछले साल 208 करोड़ रुपये का घाटा था। कंपनी की इस सफलता के पीछे यूपीआई मार्केट शेयर में लगातार हो रही बढ़त और मर्चेंट डिवाइस के बढ़ते सब्सक्रिप्शन का बड़ा हाथ रहा है। साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोग अब पेटीएम के एप्लीकेशन के जरिए फाइनेंशियल सर्विसेज का फायदा उठा रहे हैं, जिससे कंपनी की कमाई बढ़ी है।
रियल एस्टेट सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी डीएलएफ ने भी अपनी परफॉरमेंस से सबको प्रभावित किया है। स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी ने इस बार 296 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया है, जबकि पिछले साल उसे 166 करोड़ रुपये का घाटा झेलना पड़ा था। कंसोलिडेटेड लेवल पर कंपनी का नेट प्रॉफिट 14 परसेंट बढ़कर 1203.36 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। कंपनी के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि उसने अब अपना जेरो ग्रॉस डेट यानी कर्ज मुक्त होने का लक्ष्य पूरा कर लिया है। इस तिमाही में कंपनी ने 3876 करोड़ रुपये का सरप्लस कैश जेनरेट किया है और नए प्रोडक्ट की बिक्री भी काफी अच्छी रही है।
एनबीएफसी सेक्टर की कंपनी आईएफसीआई ने भी इस बार पासा पलट दिया है। कंपनी ने इस तिमाही के अंत में 6.85 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट कमाया है, जो पिछले साल 59 करोड़ रुपये के घाटे में थी। कंपनी ने अपने कुछ पुराने एसेट्स पर 23.34 करोड़ रुपये की ब्याज से होने वाली इनकम पहचानी है, जिससे यह सुधार दिखा है। वहीं माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र की दिग्गज क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण ने 252 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जबकि पिछले साल उसे 100 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। कंपनी की टोटल इनकम 8 परसेंट बढ़ी है और उसका एयूएम यानी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट भी 7 परसेंट बढ़कर 26,566 करोड़ रुपये हो गया है।
दवा और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों ने भी इस अर्निंग सीजन में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। फार्मा सेक्टर की कंपनी वोकहार्ट ने इस बार 28 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया है, जबकि पिछले साल उसे 22 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इसी तरह सीमेंट सेक्टर की कंपनी नुवोको विस्टास ने 56.21 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले साल 44.14 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही थी। इसके अलावा रियल एस्टेट सेक्टर की वेलोर एस्टेट ने भी 115.8 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाकर अपनी स्थिति को मजबूती दी है।
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