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  1. जियो के आईपीओ में रिलायंस शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ का रिजर्व कोटा, 1 शेयर पर भी मिलेगा फायदा, ये है तरीका

मार्केट न्यूज़

जियो के आईपीओ में रिलायंस शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ का रिजर्व कोटा, 1 शेयर पर भी मिलेगा फायदा, ये है तरीका

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड October 16, 2026, 19:30 IST

सारांश

जियो प्लेटफॉर्म्स 30,213 करोड़ रुपये का देश का सबसे बड़ा फ्रेश आईपीओ लेकर आ रही है। इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये का खास कोटा रखा गया है। 14 अक्टूबर 2026 तक रिलायंस का एक भी शेयर रखने वाले निवेशक शेयरहोल्डर कोटे में 2 लाख रुपये तक की बोली लगा सकते हैं।

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जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में रिलायंस शेयरधारकों के पास अलॉटमेंट हासिल करने का बेहतरीन मौका है।

जियो प्लेटफॉर्म्स भारतीय शेयर बाजार में ऐतिहासिक शुरुआत करने की पूरी तैयारी कर चुकी है। कंपनी 30,213 करोड़ रुपये का विशाल आईपीओ लेकर आ रही है, जो पूरी तरह से फ्रेश इश्यू होगा। इसके तहत 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 10.30 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। इस मेगा इश्यू की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पैरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए अलग से एक बड़ा कोटा तय किया गया है, जिससे आम निवेशकों के लिए शेयर अलॉटमेंट पाने का रास्ता काफी आसान हो सकता है।

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रिलायंस शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ का कोटा

कंपनी ने अपने आईपीओ में विभिन्न निवेशक श्रेणियों के लिए शेयर आरक्षित किए हैं। शुद्ध इश्यू का 35% यानी 10,574.5 करोड़ रुपये रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व रखा गया है। वहीं संस्थागत निवेशकों यानी QIB के लिए अधिकतम 50% यानी 15,106.5 करोड़ रुपये और गैर-संस्थागत निवेशकों यानी एनआईआई के लिए 15% यानी 4,531.9 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर अलग से रखे गए हैं, जो कुल इश्यू का करीब 12% बैठता है।

कौन है शेयरहोल्डर कोटे के लिए पात्र?

रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, जिन निवेशकों के डीमैट खाते में 14 अक्टूबर 2026 या उससे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर मौजूद थे, वे ही इस शेयरहोल्डर कोटे में बोली लगाने के पात्र होंगे। यह सुविधा केवल व्यक्तिगत निवेशकों और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली यानी एचयूएफ निवेशकों को ही मिलेगी। नियम इतने आसान रखे गए हैं कि अगर किसी निवेशक के पास रिकॉर्ड डेट तक रिलायंस का सिर्फ एक शेयर भी था, तो वह भी इस कोटे में शामिल हो सकता है। इस कोटे के तहत अधिकतम आवेदन राशि 2 लाख रुपये तय की गई है।

एक ही पैन से दो आवेदन करने की सुविधा

इस आईपीओ में रिलायंस के निवेशकों को दोहरा फायदा उठाने का मौका दिया गया है। निवेशक बिना किसी कैंसिलेशन के डर के एक ही पैन नंबर से दो अलग-अलग ऐप्लिकेशन लगा सकते हैं। इसके तहत निवेशक 2 लाख रुपये तक की बोली शेयरहोल्डर कोटे में लगा सकते हैं और साथ ही 2 लाख रुपये तक की दूसरी बोली रिटेल कोटे में या फिर 2 लाख रुपये से ऊपर की बोली NII कोटे में लगा सकते हैं। इससे भारी सब्सक्रिप्शन के बीच शेयर मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

सब्सिडियरी जियो का कारोबार

जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी प्रमुख सब्सिडियरी रिलायंस जियो इन्फोकॉम के जरिए देशभर में कनेक्टिविटी और टेक्नोलॉजी सेवाएं देती है। 30 जून 2026 तक कंपनी के ग्राहकों की संख्या 53.33 करोड़ पहुंच चुकी है, जो वित्त वर्ष 2024 में 48.18 करोड़ थी। कंपनी का प्रति यूजर औसत रेवेन्यू यानी ARPU 181.7 रुपये से बढ़कर 215.6 रुपये हो चुका है, जबकि मासिक डेटा खपत 28.7GB से बढ़कर 43.7GB हो गई है। कंपनी का नेटवर्क 3.60 लाख से ज्यादा टावरों और 10 लाख रूट किलोमीटर से लंबे फाइबर नेटवर्क पर फैला है। इसके अलावा जियो फाइबर, जियो एयर फाइबर, जियो टीवी प्लस, जियो सावन और 799 रुपये का जियो भारत फोन इसके प्रमुख आकर्षण हैं।

कंपनी की वित्तीय सेहत लगातार मजबूत बनी हुई है। कंपनी का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 के 1,09,558 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 1,46,885 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट 21,423 करोड़ रुपये से उछलकर 30,049 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भी कंपनी ने 39,172 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 7,764 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया है। कंपनी आईपीओ से मिलने वाले फंड में से 27,500 करोड़ रुपये अपनी सब्सिडियरी जियो का कर्ज चुकाने में खर्च करेगी। भारी कर्ज खत्म होने से कंपनी पर ब्याज का भार घटेगा और यह लगभग पूरी तरह कर्जमुक्त होकर नई उड़ान भरेगी।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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