मार्केट न्यूज़
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3 min read | अपडेटेड September 22, 2025, 11:44 IST
सारांश
निफ्टी IT इंडेक्स में शामिल सभी शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे थे। सबसे ज्यादा बिकवाली Persistent Systems, LTIMindtree, Coforge और Mphasis में है और ये स्टॉक 4 फीसदी से अधिक टूट गए हैं। इसके अलावा, Tech Mahindra में 3 फीसदी से अधिक की कमजोरी है।

TCS, HCL Technologies और Wipro समेत कई शेयरों में गिरावट दिख रही है।
रिपोर्ट लिखे जाने के समय निफ्टी IT इंडेक्स में शामिल सभी शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे थे। सबसे ज्यादा बिकवाली Persistent Systems, LTIMindtree, Coforge और Mphasis में है और ये स्टॉक 4 फीसदी से अधिक टूट गए हैं। इसके अलावा, Tech Mahindra में 3 फीसदी से अधिक की कमजोरी है। TCS, HCL Technologies, Wipro और Infosys के शेयर भी 2 फीसदी से अधिक लुढ़क गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिससे एच1बी वीजा आवेदनों का शुल्क सालाना एक लाख अमेरिकी डॉलर तक बढ़ जाएगा। एम्प्लॉयर साइज और अन्य लागतों के आधार पर एच1बी वीजा शुल्क अभी तक लगभग 2,000 अमेरिकी डॉलर से 5,000 अमेरिकी डॉलर तक था। ये वीजा 3 साल के लिए वैलिड होते हैं और इन्हें अगले 3 वर्षों के लिए रिन्यू किया जा सकता है।
इस नए कदम का उन भारतीय तकनीकी कर्मचारियों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा जिन्हें तकनीकी कंपनियां और अन्य कंपनियां H-1B वीजा पर नियुक्त करती हैं। सूत्रों ने कहा कि भारत सरकार इस पर आगे का रास्ता निकालने के लिए अमेरिकी सरकार, IT इंडस्ट्री और नैस्कॉम के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है। अमेरिकी कंपनियां इन वीजा की प्रमुख यूजर्स हैं, इसलिए वे भी इस मामले पर अमेरिकी सरकार के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही हैं।
PTI रिपोर्ट के अनुसार, H-1B वीजा पाने वालों में 2025 में Amazon (10,044) सबसे आगे रहा। इसके बाद TCS (5,505), Microsoft (5,189), Meta (5,123), Apple (4,202), Google (4,181), Deloitte (2,353), Infosys (2,004), Wipro (1,523) और Tech Mahindra (951) का नाम आता है।
ट्रम्प ने कहा कि H-1B वीजा प्रोग्राम का मकसद हाई-स्किल्ड कामगारों को अस्थायी तौर पर लाना था, लेकिन कंपनियां इसका इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह सस्ते कामगार रखने के लिए करने लगी हैं। बाद में अमेरिकी सरकार ने साफ किया कि फीस में बढ़ोतरी सिर्फ नए H-1B आवेदनों पर लागू होगी, पुराने वीजा धारकों या उनके नवीनीकरण पर नहीं।
आईटी इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि अगले 6-12 महीने तक इसका सीधा असर नहीं दिखेगा, क्योंकि पिछले साल की H-1B आवेदन पहले ही फाइल हो चुके हैं और लॉटरी सिस्टम उसी पर चलेगा। लेकिन उसके बाद कंपनियों को अपनी रणनीति पर दोबारा सोचना पड़ेगा।
पूर्व इन्फोसिस CFO मोहनदास पै ने कहा कि अभी 6 महीने से 1 साल तक कोई दिक्कत नहीं होगी, उसके बाद स्थिति देखनी होगी। वकील सज्जई सिंह ने कहा कि फिलहाल राहत तो है, लेकिन असली असर आगे दिखेगा। नए आवेदन पर ही फीस बढ़ेगी, मौजूदा वीजा धारकों पर नहीं। लेकिन भारतीय आईटी कंपनियों को लंबे समय में ज्यादा खर्च उठाना पड़ेगा, जिससे उनके बिजनेस मॉडल प्रभावित हो सकते हैं। इस बदलाव से अमेरिकी कंपनियों में स्थानीय कर्मचारियों को नौकरी देने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा और H-1B पर निर्भरता घटेगी।
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