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IT Stocks: फेड रेट कट के बाद आईटी शेयरों ने पकड़ी रफ्तार, Infosys, Mphasis समेत ये शेयर उछले

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड September 18, 2025, 13:29 IST

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सारांश

IT Stocks: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 17 सितंबर को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 25 बेसिस प्वॉइंट्स की कटौती कर इसे 4-4.25 फीसदी कर दिया। दिसंबर 2024 के बाद यह पहली बार ब्याज दरों में कटौती है। इसके चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स सुबह 1.5 फीसदी बढ़कर 37006 पर पहुंच गया।

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IT Stocks: आज के कारोबार में निफ्टी IT इंडेक्स में 1 फीसदी से अधिक की तेजी देखी गई।

IT Stocks: आज 18 सितंबर को IT शेयरों में खरीदारी का माहौल है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की है, जिसका असर आज बाजार पर दिख रहा है। आज के कारोबार में निफ्टी IT इंडेक्स में 1 फीसदी से अधिक की तेजी देखी गई। LTIMindtree के शेयरों में करीब 3 फीसदी की तेजी है। Infosys, Mphasis, Coforge और Wipro के शेयर भी एक फीसदी से अधिक उछल गए। OFSS को छोड़कर इंडेक्स में शामिल अन्य सभी शेयर हरे निशान पर ट्रेड कर रहे थे।
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क्या है IT शेयरों में तेजी की वजह?

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 17 सितंबर को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 25 बेसिस प्वॉइंट्स की कटौती कर इसे 4-4.25 फीसदी कर दिया। दिसंबर 2024 के बाद यह पहली बार ब्याज दरों में कटौती है। इसके चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स सुबह 1.5 फीसदी बढ़कर 37006 पर पहुंच गया, जिसमें लगातार तीसरे सत्र में बढ़त है।

फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि इस साल कुल दो और कटौती यानी 50 बेसिस प्वाइंट और हो सकती हैं। इसके अलावा 2026 और 2027 में भी एक-एक कटौती की संभावना जताई गई है। वहीं, एक अधिकारी ने यहां तक अनुमान लगाया है कि दिसंबर तक कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती हो सकती है।

फेड ने अपने बयान में कहा कि इस साल की पहली छमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हुई है। नौकरी मिलने की गति घटी है और बेरोजगारी दर थोड़ी बढ़ी है, हालांकि यह अभी भी कम स्तर पर बनी हुई है। साथ ही, मुद्रास्फीति ऊंची बनी हुई है, लेकिन रोजगार को लेकर खतरे बढ़े हैं। इन्हीं कारणों से फेड ने दरों में कटौती करने का फैसला लिया।

IT कंपनियों को रेट कट से कैसे होगा फायदा

ब्याज दरों में कटौती से अमेरिकी लोगों और कंपनियों की खर्च करने की क्षमता (Discretionary Spending) बढ़ती है। इसका सीधा फायदा भारत की आईटी कंपनियों को मिलता है, क्योंकि वे अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से करती हैं। यही कारण है कि फेड के फैसले के बाद भारतीय आईटी शेयरों में तेजी देखी गई।

फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने इस कदम को “रिस्क मैनेजमेंट कट” बताया। उन्होंने कहा कि लेबर मार्केट नरम पड़ गया है और नई नौकरियों की रफ्तार इतनी कम हो गई है कि बेरोजगारी दर को स्थिर रखना मुश्किल हो रहा है। पॉवेल ने साफ कहा कि, "हमें लेबर मार्केट को और कमजोर नहीं होने देना है।"

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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