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मार्केट न्यूज़

IT Stocks: आईटी शेयरों में कोहराम! AI के डर से धड़ाम हुआ इंफोसिस और विप्रो

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड February 16, 2026, 14:55 IST

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सारांश

भारतीय आईटी सेक्टर के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एआई (AI) तकनीक के कारण नौकरियों और रेवेन्यू पर पड़ने वाले असर के डर से आज भी आईटी शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। इंफोसिस जैसे दिग्गज शेयर एक महीने में 20 परसेंट तक टूट चुके हैं, जिससे निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई है।

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शेयर बाजार में आज भी आईटी स्टॉक्स पर दबाव बना हुआ है।

भारतीय आईटी सेक्टर में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज भी शेयर बाजार खुलते ही आईटी कंपनियों के शेयरों में फिर से बिकवाली का दबाव देखा गया। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक इस सेक्टर के पुराने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से बदल सकती है। इसी डर का असर रहा कि निफ्टी आईटी इंडेक्स सुबह के कारोबार में करीब 1 पर्सेंट गिरकर 32,360.35 के लेवल पर आ गया। अगर पिछले चार दिनों की बात करें, तो इस इंडेक्स में 9 पर्सेंट से ज्यादा की भारी गिरावट आ चुकी है। साल 2026 की शुरुआत से ही यह सेक्टर मुश्किलों में है और अब तक करीब 15 पर्सेंट की गिरावट देख चुका है।

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दिग्गज शेयरों का बुरा हाल

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी इंफोसिस के शेयरों में आज फिर 2 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट आई और यह 1,341 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले पांच दिनों में यह स्टॉक 10 पर्सेंट और पिछले एक महीने में 20 पर्सेंट से भी ज्यादा टूट चुका है। इसके अलावा टेक महिंद्रा, विप्रो और एलटीआई माइंडट्री जैसे शेयरों में भी 1 पर्सेंट के करीब गिरावट दर्ज की गई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस और एचसीएल टेक भी लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। हालांकि, कोफोर्ज और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जैसे कुछ शेयर मामूली बढ़त के साथ इस गिरावट के बीच खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

आखिर क्यों डर रहे हैं निवेशक

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह एंथ्रोपिक नाम की कंपनी द्वारा लॉन्च किया गया एक नया एआई टूल है। निवेशकों को लग रहा है कि यह टूल सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों के लिए कड़ी टक्कर खड़ी कर देगा और इससे उनकी भविष्य की कमाई यानी रेवेन्यू पर बुरा असर पड़ेगा। इसका असर बाजार पर भी दिख रहा है। ग्लोबल टेक सेक्टर में कमजोरी और रुपये की गिरती वैल्यू के कारण विदेशी निवेशक यानी एफपीआई लगातार पैसा निकालना रहे हैं, जिससे माहौल और बिगड़ गया है। इसके अलावा अमेरिका से आए रोजगार के आंकड़ों ने भी थोड़ा कन्फ्यूजन पैदा कर दिया है। वहां नौकरियां तो बढ़ी हैं लेकिन वे सिर्फ हेल्थकेयर सेक्टर तक सीमित हैं, जो इकोनॉमी की मजबूती की पूरी गारंटी नहीं देते।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह आईटी सेक्टर का अंत नहीं बल्कि एक बदलाव का दौर है। जब तकनीक की मदद से सॉफ्टवेयर बनाना सस्ता और आसान हो जाएगा, तो इसकी डिमांड और ज्यादा बढ़ेगी। कई कंपनियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में और ज्यादा निवेश करेंगी, जिससे आईटी कंपनियों के लिए काम के नए मौके खुलेंगे।

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लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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