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IndiGo Q3 Results: दिसंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 77% क्रैश, फ्लाइट में गड़बड़ी और नए लेबर कोड का असर

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड January 22, 2026, 17:13 IST

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सारांश

IndiGo Q3 Results: इंडिगो का कहना है कि इस तिमाही में नेट प्रॉफिट पर नए लेबर कोड और दिसंबर 2025 में हुई बड़ी ऑपरेशनल दिक्कतों का असर पड़ा। कंपनी ने तिमाही के दौरान ऑपरेशन से होने वाले रेवेन्यू में साल-दर-साल (YoY) 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी, जो 23,471.9 करोड़ रुपये रहा।

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IndiGo Q3 Results

IndiGo Q3 Results: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन के मुनाफे पर नए लेबर कोड का असर पड़ा है।

IndiGo Q3 Results: इंडिगो की पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने आज 22 जनवरी को FY26 की तीसरी तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 549.8 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर की इसी अवधि में रिपोर्ट किए गए नेट प्रॉफिट से 77 फीसदी कम है। कंपनी का कहना है कि इस तिमाही में नेट प्रॉफिट पर नए लेबर कोड और दिसंबर 2025 में हुई बड़ी ऑपरेशनल दिक्कतों का असर पड़ा।
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IndiGo का रेवेन्यू 6% बढ़ा

IndiGo का देश के एविएशन मार्केट में लगभग दो-तिहाई हिस्सा है। कंपनी ने तिमाही के दौरान ऑपरेशन से होने वाले रेवेन्यू में साल-दर-साल (YoY) 6 फीसदी की बढ़ोतरी देखी, जो 23,471.9 करोड़ रुपये हो गया।

नए लेबर कानूनों की वजह से कंपनी को एक बार का बड़ा खर्च उठाना पड़ा है। नए नियमों के चलते कंपनी को करीब 969.3 करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च करना पड़ा। इसके अलावा, दिसंबर में आए संकट की वजह से भी कंपनी को नुकसान हुआ। इस संकट के कारण कंपनी को 577.2 करोड़ रुपये का एक बार का असाधारण नुकसान झेलना पड़ा।

इंडिगो को दिसंबर महीने की शुरुआत में व्यापक स्तर पर परिचालन व्यवधानों का सामना करना पड़ा था। इसके बाद नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयरलाइन के शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम को 10 फरवरी तक 10 प्रतिशत तक घटा दिया था।

नए लेबर कोड का मुनाफे पर क्यों पड़ा असर

भारत में सरकार ने चार नए लेबर कानून लागू किए हैं, जिनमें वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और कामकाजी हालात से जुड़े नियम शामिल हैं। ये नए लेबर कोड 21 नवंबर से लागू हो गए हैं। इनका मकसद कर्मचारियों के अधिकार मजबूत करना और नियमों को एक जैसा बनाना है।

नए कानून में वेतन की एक समान परिभाषा तय की गई है। अब कंपनियां सैलरी का बड़ा हिस्सा अलाउंस में दिखाकर PF और ग्रेच्युटी जैसे खर्च कम नहीं कर पाएंगी। नियम के मुताबिक, कर्मचारी का बेसिक वेतन कुल सैलरी (CTC) का कम से कम 50% होना जरूरी है। इस बदलाव से कर्मचारियों को भविष्य में ज्यादा PF, ग्रेच्युटी और दूसरी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही, समय पर सैलरी देना, ओवरटाइम का भुगतान और काम के घंटों से जुड़े नियम भी साफ तौर पर तय किए गए हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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