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4 min read | अपडेटेड April 21, 2026, 16:12 IST
सारांश
साल 2026 में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों (FPI) ने रिकॉर्ड 19.7 बिलियन डॉलर की निकासी की है। मार्च 2026 में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। हालांकि, दूसरी तरफ आईपीओ मार्केट में जबरदस्त तेजी रही और कंपनियों ने रिकॉर्ड 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं।

शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली और आईपीओ की धूम।
भारतीय शेयर बाजार के लिए वित्त वर्ष 2026 काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से जमकर पैसा निकाला है। NSE मार्केट पल्स अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, एफपीआई ने साल 2026 में भारतीय इक्विटी से रिकॉर्ड 19.7 बिलियन डॉलर की नेट निकासी की है। यह साल 2011 के बाद की सबसे बड़ी वार्षिक बिकवाली है। इससे पहले साल 2025 में 14.6 बिलियन डॉलर की निकासी हुई थी, लेकिन इस साल का आंकड़ा उसे भी पार कर गया है। विदेशी निवेशकों की इस भगदड़ के बावजूद भारतीय आईपीओ मार्केट ने अपनी मजबूती साबित की है और फंड जुटाने के मामले में पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
साल के अंत में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। मार्च 2026 में अकेले 12.7 बिलियन डॉलर की भारी निकासी देखी गई, जो साल 2011 के बाद किसी भी एक महीने में हुई सबसे बड़ी बिकवाली है। इस बड़े पलायन के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव एक बड़ी वजह रहा। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं, जिसने भारतीय रुपये पर बहुत दबाव डाला। बिकवाली का यह सिलसिला नए वित्त वर्ष में भी जारी रहा और अप्रैल 2026 के बीच तक विदेशी निवेशक करीब 5 बिलियन डॉलर के शेयर बेच चुके थे।
बाजार से पैसा निकालने के पीछे सिर्फ ग्लोबल तनाव ही एकमात्र कारण नहीं था। ट्रेड से जुड़ी अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती ने भी निवेशकों को डराया। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों ने अपना पैसा भारत जैसे महंगे बाजार से निकालकर उन बाजारों में लगाना शुरू कर दिया है जो थोड़े सस्ते हैं। खासकर ताइवान और कोरिया जैसे उत्तर एशियाई बाजारों में विदेशी निवेश बढ़ा है, क्योंकि वहां एआई (AI) यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बाजार में आई गिरावट के कारण अब भारतीय बाजार का वैल्युएशन पहले के मुकाबले थोड़ा कम और वाजिब हो गया है। निफ्टी 50 का पी/ई (P/E) रेशियो, जो साल 2025 के अंत में 21.5 के स्तर पर था, वह अप्रैल 2026 की शुरुआत में घटकर 18 के स्तर पर आ गया। हालांकि, अप्रैल के बीच में यह थोड़ा सुधरकर 18.7 पर पहुंचा है। भारत अभी भी दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले महंगे रेट पर कारोबार कर रहा है, लेकिन अब यह अंतर पहले के मुकाबले काफी कम हो गया है।
शेयर बाजार में भारी बिकवाली के बीच डेट मार्केट में विदेशी निवेशकों का रुख थोड़ा सकारात्मक रहा। साल 2026 में डेट मार्केट में 2.8 बिलियन डॉलर का निवेश आया। हालांकि, यह साल 2025 में आए 16.9 बिलियन डॉलर के निवेश के मुकाबले बहुत कम है। आपको बता दें कि पिछले साल भारत को जेपी मॉर्गन इंडेक्स में शामिल किए जाने की वजह से काफी पैसा आया था, जो प्रक्रिया मार्च 2025 तक पूरी हो गई थी।
भले ही शेयर बाजार में काफी उथल-पुथल रही, लेकिन आईपीओ मार्केट ने इस साल कमाल कर दिया। साल 2026 में कुल 219 कंपनियां बाजार में लिस्ट हुईं और उन्होंने रिकॉर्ड 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए। यह अब तक जुटाया गया सबसे बड़ा फंड है। इन नई लिस्टेड कंपनियों ने बाजार में 12.5 लाख करोड़ रुपये की नई मार्केट कैप जोड़ी है। इस तेजी में सबसे बड़ी भूमिका मेनबोर्ड आईपीओ की रही, जहां 108 कंपनियों ने 1.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए। हालांकि, छोटे और मझोले उद्योगों (SME) के आईपीओ मार्केट में थोड़ी सुस्ती देखी गई और वहां पिछले साल के मुकाबले फंड जुटाने में 25 पर्सेंट की कमी आई है।
इस साल आईपीओ में निवेश के मामले में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है। मेनबोर्ड आईपीओ में रिटेल निवेशकों का हिस्सा 19 पर्सेंट से बढ़कर 23 पर्सेंट हो गया है। वहीं, बड़े संस्थागत निवेशकों (QIB) का हिस्सा थोड़ा कम होकर 62 पर्सेंट रहा। आईपीओ के अलावा पहले से लिस्टेड कंपनियों ने भी शेयरों के जरिए 2.4 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसमें प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है।
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