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Cipla Q3 Results: सिप्ला के मुनाफे में 57% की भारी गिरावट, मार्जिन भी घटा, टूटा शेयर का भाव

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड January 23, 2026, 15:07 IST

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सारांश

फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनी सिप्ला के लिए तीसरी तिमाही काफी चुनौतीपूर्ण रही है। कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 57 प्रतिशत घटकर 675.8 करोड़ रुपये रह गया है। हालांकि रेवेन्यू 7,075 करोड़ रुपये पर स्थिर है, लेकिन मार्जिन में बड़ी गिरावट और नए लेबर कोड के असर से शेयरों में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

शेयर सूची

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सिप्ला के तिमाही नतीजों ने निवेशकों को निराश किया है।

Cipla Q3 Results: फार्मा सेक्टर की बड़ी कंपनी सिप्ला ने शुक्रवार को अपने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। इन नतीजों ने बाजार और निवेशकों को काफी निराश किया है क्योंकि कंपनी के शुद्ध लाभ और ऑपरेटिंग लाभ में बड़ी गिरावट देखी गई है। नतीजों की घोषणा के बाद ही शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया और यह करीब 3 प्रतिशत तक टूटकर 1,329 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा। कंपनी के मुनाफे में आई यह भारी कमी मुख्य रूप से बढ़ते खर्चों और नए लेबर कोड के लागू होने की वजह से हुई है जिसने कंपनी की बैलेंस शीट पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
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कमाई के मोर्चे पर हालत खराब

सिप्ला का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 57 प्रतिशत की भारी कमी के साथ 675.8 करोड़ रुपये पर सिमट गया है। अगर हम पिछले साल की समान तिमाही से तुलना करें तो तब कंपनी को 1,570.51 करोड़ रुपये का बड़ा मुनाफा हुआ था। हालांकि कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के 7,072.97 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग स्थिर रहते हुए 7,074.48 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। ऑपरेटिंग के मोर्चे पर भी आंकड़े चिंताजनक रहे हैं क्योंकि कंपनी का EBITDA 36.7 प्रतिशत गिरकर 1,255 करोड़ रुपये रह गया है। सबसे बड़ी गिरावट मार्जिन में दर्ज की गई है जो पिछले साल के 28.1 प्रतिशत के उच्च स्तर से गिरकर इस बार मात्र 17.7 प्रतिशत पर आ गया है।

नए लेबर कोड ने बढ़ाई बोझ

कंपनी के मुनाफे पर इस बार नए लेबर कोड का बड़ा असर पड़ा है। भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों की वजह से कंपनी पर ग्रेच्युटी और छुट्टी के बदले भुगतान जैसी देनदारियों का बोझ बढ़ गया है। सिप्ला ने इस मद में 275.91 करोड़ रुपये का एकमुश्त असाधारण नुकसान दर्ज किया है। इस गैर-आवर्ती खर्च की वजह से कंपनी के शुद्ध मुनाफे पर सीधा दबाव दिखा है। इसके साथ ही कंपनी ने इस तिमाही के दौरान इनजपेरा हेल्थसाइंस लिमिटेड का 100 प्रतिशत अधिग्रहण पूरा किया है जिसके लिए 110.65 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इन रणनीतिक बदलावों ने फिलहाल कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को प्रभावित किया है।

आगे के लिए कंपनी के पास क्या है प्लान?

सिप्ला अपनी भविष्य की विकास दर को बनाए रखने के लिए बड़े निवेश कर रही है। कंपनी ने टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाले मशहूर ब्रांड 'गैल्वस' और उससे जुड़े अन्य प्रोडक्ट के निर्माण और मार्केटिंग के अधिकार खरीदने के लिए नोवार्टिस फार्मा एजी को 1,107.28 करोड़ रुपये का भारी भुगतान किया है। ये अधिकार 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गए हैं जिससे आने वाले समय में कंपनी के रेवेन्यू और बाजार हिस्सेदारी में सुधार की उम्मीद है। हालांकि मौजूदा तिमाही के कमजोर नतीजों और गिरते मार्जिन ने फिलहाल निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

बता दें कि नतीजों के बाद सिप्ला के शेयरों में आई गिरावट ने फार्मा सेक्टर के अन्य शेयरों पर भी दबाव बनाया है। कंपनी का अर्निंग पर शेयर यानी ईपीएस भी पिछले साल के 19.45 रुपये से घटकर अब 8.37 रुपये रह गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का रेवेन्यू भले ही स्थिर बना हुआ है लेकिन ऑपरेटिंग लागत और रेगुलेटरी बदलावों की वजह से मुनाफा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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टाइमिंग पर भारी पड़ती है निरंतरता
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लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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