मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड January 28, 2026, 18:23 IST
सारांश
STT यानी Securities Transaction Tax वह टैक्स है जो भारतीय शेयर बाजार में सिक्योरिटीज की खरीद–फरोख्त पर लगाया जाता है। यह टैक्स इक्विटी शेयर, डेरिवेटिव्स, इक्विटी म्यूचुअल फंड यूनिट्स, IPO के जरिए आने वाले अनलिस्टेड शेयर और सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर लगता है।

Budget 2026: निवेशकों को उम्मीद है कि सरकार ऐसे बदलाव करेगी जिससे निवेश का माहौल बेहतर बने।
BSE, MCX, AMFI और Association of Registered Investment Advisers जैसे बाजार से जुड़े संगठनों ने सरकार से सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स यानी STT कम करने की मांग की है। Avisa Wealth Creators के CIO आदित्य अग्रवाल का कहना है कि Budget 2026 फाइनेंशियल मार्केट के लिए बेहद अहम हो सकता है। उनके मुताबिक निवेशक चाहते हैं कि LTCG टैक्स को घटाकर 10% किया जाए और STT वापस कम किया जाए, जिससे विदेशी निवेशकों (FII) की भागीदारी बढ़े और बाजार में भरोसा लौटे।
फिलहाल डिलीवरी बेस्ड इक्विटी ट्रांजैक्शन पर STT 0.1% लगता है, जबकि डेरिवेटिव्स में यह 0.02% से लेकर 0.125% तक होता है। निवेशकों का मानना है कि अगर STT घटाया गया तो ट्रेडिंग की लागत कम होगी, लोग लंबे समय के लिए निवेश करेंगे और ज्यादा विदेशी निवेश भारत की ओर आएगा।
STT यानी Securities Transaction Tax वह टैक्स है जो भारतीय शेयर बाजार में सिक्योरिटीज की खरीद–फरोख्त पर लगाया जाता है। यह टैक्स इक्विटी शेयर, डेरिवेटिव्स, इक्विटी म्यूचुअल फंड यूनिट्स, IPO के जरिए आने वाले अनलिस्टेड शेयर और सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर लगता है। यह टैक्स ट्रांजैक्शन वैल्यू के ऊपर अलग से लिया जाता है।
निवेशकों की दूसरी बड़ी मांग इक्विटी पर Long-Term Capital Gains यानी LTCG टैक्स को घटाकर 10% करने की है। अभी मौजूदा सिस्टम में इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड से एक साल में ₹1.25 लाख से ज्यादा मुनाफे पर 12.5% टैक्स लगता है।
AMFI ने सरकार से मांग की है कि यह टैक्स-फ्री लिमिट बढ़ाकर ₹2 लाख की जाए। इसके अलावा इंडस्ट्री बॉडी चाहती है कि अगर कोई इक्विटी म्यूचुअल फंड पांच साल से ज्यादा समय तक रखा गया हो, तो उस पर मिलने वाला LTCG पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया जाए, ताकि लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करें और वेल्थ क्रिएशन को बढ़ावा मिले।
इसके साथ ही बाजार से जुड़े लोग अलग-अलग फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स पर बराबर टैक्स सिस्टम यानी टैक्स पैरिटी की भी मांग कर रहे हैं। आदित्य अग्रवाल के मुताबिक कई डेट इंस्ट्रूमेंट और स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स पर अभी स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है, जो सरचार्ज और सेस मिलाकर 40% से भी ज्यादा हो जाता है। इंडस्ट्री चाहती है कि इन पर टैक्स को ज्यादा संतुलित बनाया जाए, ताकि सुरक्षित और लंबे समय का निवेश बढ़ सके।
Budget 2024 में Finance (No.2) Bill, 2024 के जरिए सरकार ने कैपिटल गेन टैक्स सिस्टम को सरल बनाया था। इसमें होल्डिंग पीरियड घटाए गए, टैक्स रेट को स्टैंडर्ड किया गया, इंडेक्सेशन हटाई गई और रेजिडेंट व नॉन-रेजिडेंट निवेशकों के बीच बराबरी रखी गई, जबकि रोलओवर बेनिफिट्स को बरकरार रखा गया।
ये नए नियम 23 जुलाई 2024 से लागू हुए। इसके तहत लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए होल्डिंग पीरियड एक साल और बाकी एसेट्स के लिए दो साल कर दिया गया। हालांकि प्रॉपर्टी और अनलिस्टेड शेयर के लिए होल्डिंग पीरियड अब भी 24 महीने ही है।
अब STT वाले एसेट्स पर Short-Term Capital Gains 20% और Long-Term Capital Gains 12.5% टैक्स के दायरे में आते हैं। पहले यह 15% और 10% था, जिसमें इंडेक्सेशन का फायदा मिलता था। साथ ही सेक्शन 112A के तहत LTCG की टैक्स-फ्री सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.25 लाख कर दी गई है।
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