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4 min read | अपडेटेड February 12, 2026, 10:35 IST
सारांश
सरकारी कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में आज यानी 12 फरवरी से रिटेल निवेशकों के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) खुल गया है। सरकार कंपनी में 5 परसेंट तक हिस्सा बेचकर करीब 4,422 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। इसके लिए फ्लोर प्राइस 254 रुपये तय किया गया है।
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केंद्र सरकार BHEL में अपनी हिस्सेदारी कम कर रही है।
आज से सरकारी कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में निवेश करने का एक नया रास्ता खुला है। केंद्र सरकार इस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल यानी OFS लेकर आई है। कल यह मौका केवल संस्थागत या बड़े निवेशकों के लिए था, लेकिन आज से देश के आम रिटेल निवेशक इसमें हिस्सा ले सकते हैं। सरकार ने इस बिक्री के लिए 254 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। इसका मतलब है कि निवेशक इस कीमत या इससे ऊपर की बोली लगा सकते हैं। BHEL एक ऐसी कंपनी है जिसने पिछले कुछ सालों में निवेशकों को मालामाल किया है और अब सरकार इसमें अपना हिस्सा घटाकर सरकारी खजाने के लिए फंड जुटा रही है।
सरकार इस OFS के जरिए कंपनी में कुल 3 परसेंट हिस्सेदारी बेच रही है। इसके साथ ही एक 'ग्रीनशू ऑप्शन' भी रखा गया है, जिसके तहत जरूरत पड़ने पर 2 परसेंट एक्स्ट्रा हिस्सा भी बेचा जा सकता है। अगर सरकार पूरा 5 परसेंट हिस्सा बेचती है, तो इस पूरी डील की वैल्यू करीब 4,422 करोड़ रुपये होगी। आपको बता दें कि यह पूरी तरह से प्रमोटर स्टेक सेल है, जिसका मतलब है कि इससे मिलने वाला पैसा सीधे सरकार के पास जाएगा, न कि कंपनी के पास। इससे BHEL की बैलेंस शीट या कर्ज पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। इस सेल से पहले सरकार के पास कंपनी की 63.17 परसेंट हिस्सेदारी थी।
जब इस OFS का ऐलान हुआ था, तब फ्लोर प्राइस (254 रुपये) उस समय के मार्केट प्राइस (276 रुपये) के मुकाबले करीब 8 परसेंट डिस्काउंट पर था। हालांकि, खबर आने के बाद शेयर बाजार में BHEL के स्टॉक में करीब 5.5 परसेंट की गिरावट आई और यह 260 रुपये के करीब आ गया। इस गिरावट की वजह से अब जो डिस्काउंट आम निवेशकों को मिल रहा था, वह पहले के मुकाबले कम हो गया है। प्रदर्शन की बात करें तो पिछले एक साल में BHEL ने 30 परसेंट और पिछले 6 महीनों में 18 परसेंट का रिटर्न दिया है। लंबे समय में तो इसने निवेशकों का पैसा 570 परसेंट से भी ज्यादा बढ़ाकर मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।
जेएम फाइनेंशियल जैसे ब्रोकरेज हाउस ने इसको लेकर अपना पॉजिटिव नजरिया दिया है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह भारत की बिजली क्षेत्र से जुड़ी योजनाएं हैं। भारत साल 2047 तक कोयले से चलने वाली बिजली की क्षमता को 340 गीगावाट तक ले जाना चाहता है। इसके लिए देश को बड़े पैमाने पर नए थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स की जरूरत होगी, जिसका सीधा फायदा BHEL को मिल सकता है। कंपनी के पुराने और कम मुनाफे वाले प्रोजेक्ट्स अब खत्म हो रहे हैं और नए ऑर्डर्स में मार्जिन काफी अच्छा है।
अनुमान लगाया जा रहा है कि वित्त वर्ष 2028 तक कंपनी का एबिटा मार्जिन बढ़कर 10.7 परसेंट हो सकता है, जो वित्त वर्ष 2025 में केवल 4.4 परसेंट था। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले सालों में कंपनी का रेवेन्यू, एबिटा और नेट प्रॉफिट बहुत तेज रफ्तार से बढ़ सकता है। हालांकि, छोटे समय के लिए शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए यह मौका उन लोगों के लिए ज्यादा बेहतर हो सकता है जो लंबे समय के लिए कंपनी के बिजनेस पर भरोसा करते हैं। आज रिटेल निवेशक अपनी क्षमता के अनुसार इसमें बोली लगा सकते हैं और सरकारी कंपनी का हिस्सा बन सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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