मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड October 26, 2025, 14:24 IST
सारांश
अडानी समूह की फंडिंग को लेकर नई जानकारी सामने आई है। LIC से ज्यादा दिलचस्पी अमेरिकी बीमा कंपनियां दिखा रही हैं। हाल ही में एथेन इंश्योरेंस ने मुंबई एयरपोर्ट में 75 करोड़ डॉलर लगाए। वहीं, LIC ने अडानी में निवेश पर 'दबाव' की खबरों को 'झूठा' बताते हुए कहा कि उनके फैसले स्वतंत्र होते हैं।

अडानी समूह के प्रोजेक्ट्स में वैश्विक बीमा कंपनियों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।
गौतम अडानी समूह की कंपनियों में निवेश को लेकर भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अक्सर सुर्खियों में रहती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अडानी की तिजोरी में एलआईसी से भी कहीं ज्यादा पैसा दुनिया की बड़ी बीमा कंपनियां डाल रही हैं? हाल के आंकड़े बताते हैं कि अडानी के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर अमेरिकी और वैश्विक निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है, जबकि एलआईसी का निवेश उस मुकाबले काफी कम है।
ताजा मामला जून 2025 का है। जब एलआईसी ने अडानी पोर्ट्स में करीब 5,000 करोड़ रुपये (57 करोड़ डॉलर) का निवेश किया, तो इसकी खूब चर्चा हुई। लेकिन इसके ठीक एक महीने बाद, अमेरिका की बड़ी बीमा कंपनी 'एथेन इंश्योरेंस' (Athene Insurance) ने अडानी के मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (मायल) में 6,650 करोड़ रुपये (75 करोड़ डॉलर) के भारी-भरकम लोन निवेश का नेतृत्व किया। यह निवेश एलआईसी के निवेश से कहीं बड़ा था। एथेन की पेरेंट कंपनी, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट ने बकायदा बयान जारी कर कहा कि यह ‘निवेश ग्रेड रेटेड फाइनेंसिंग’ थी, जिसमें कई और बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशक भी शामिल हुए। यह दूसरी बार था जब अपोलो ने मायल में इतना बड़ा निवेश किया।
सिर्फ मुंबई एयरपोर्ट ही नहीं, अडानी समूह की अन्य कंपनियां भी विदेशी बैंकों से जमकर पैसा जुटा रही हैं। अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने भी हाल ही में डीबीएस बैंक, डीजेड बैंक और राबोबैंक जैसे ग्लोबल बैंकों के एक समूह से करीब 25 करोड़ डॉलर जुटाए। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी समूह ने साल 2025 की पहली छमाही में ही अपनी मुख्य कंपनियों अडानी पोर्ट्स (एपीएसईजेड), अडानी ग्रीन (एजीईएल), अडानी एंटरप्राइजेज (एईएल) और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस (एईएसएल) के लिए कुल 10 अरब डॉलर (करीब 83,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा का नया कर्ज जुटाया है। इससे साफ है कि वैश्विक बाजार में अडानी की साख मजबूत बनी हुई है।
यह सारी चर्चा तब तेज हुई जब 'वॉशिंगटन पोस्ट' की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि वैश्विक निवेशकों की हिचकिचाहट के बीच सरकारी अधिकारियों ने एलआईसी को अडानी समूह में निवेश के लिए प्रभावित किया। इस रिपोर्ट ने भारत में सियासी तूफान ला दिया। हालांकि, शनिवार को एलआईसी ने इस रिपोर्ट को 'झूठा, निराधार और सच्चाई से कोसों दूर' बताते हुए इसका कड़ा खंडन किया। एलआईसी ने साफ कहा कि अडानी समूह में उसका निवेश पूरी तरह से स्वतंत्र है और बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के आधार पर, पूरी जांच-पड़ताल के बाद किया गया है।
एलआईसी ने यह भी स्पष्ट किया कि अडानी समूह में उसका निवेश कुल कर्ज का सिर्फ दो प्रतिशत से भी कम है। और सबसे बड़ी बात, अडानी एलआईसी की सबसे बड़ी होल्डिंग है ही नहीं। एलआईसी के पास अडानी के करीब 4% शेयर (60,000 करोड़ रुपये) हैं। इसकी तुलना में, एलआईसी के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज में 6.94% (1.33 लाख करोड़ रुपये), आईटीसी में 15.86% (82,800 करोड़ रुपये) और एसबीआई में 9.59% (79,361 करोड़ रुपये) की हिस्सेदारी है। यहां तक कि टीसीएस में भी एलआईसी की 5.02% हिस्सेदारी (5.7 लाख करोड़ रुपये) है। ये आंकड़े बताते हैं कि एलआईसी का पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफाइड है।
एलआईसी के पूर्व चेयरमैन सिद्धार्थ मोहंती ने भी कहा कि सरकार एलआईसी के किसी भी निवेश फैसले में दखल नहीं देती है। वहीं, अडानी समूह के सीएफओ जुगेशिंदर सिंह ने 'वॉशिंगटन पोस्ट' की रिपोर्ट पर चुटकी लेते हुए तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि वित्त के बारे में 'वॉशिंगटन पोस्ट' का लिखना वैसा ही है जैसे मैं और जेफ बेजोस (अमेजन के मालिक) यह लिख रहे हों कि सिर पर घने बाल कैसे उगाए जाएं - यह 100 प्रतिशत मूर्खता है। (सिंह और बेजोस दोनों ही गंजे हैं)। अडानी के अधिकारियों ने यह भी कहा कि कंपनी ने कर्ज चुकाने के लिए जून में 45 करोड़ डॉलर का बायबैक प्रोग्राम शुरू किया था, जिससे पता चलता है कि उन्हें पैसे की कोई तंगी नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी से हो रही ग्रोथ वैश्विक बीमा कंपनियों को आकर्षित कर रही है, क्योंकि उन्हें यहां स्थिर और लंबा रिटर्न दिखता है।
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