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4 min read | अपडेटेड February 16, 2026, 13:05 IST
सारांश
जनवरी महीने में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 1.81 पर्सेंट पर पहुंच गई है, जो पिछले 10 महीनों का सबसे ऊंचा लेवल है। कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में यह महज 0.83 पर्सेंट थी। खाने-पीने की चीजों और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ने की वजह से महंगाई के आंकड़ों में यह तेजी देखी गई है।

देश में थोक और रिटेल महंगाई के आंकड़ों में उछाल से आर्थिक चिंताओं में बढ़ोतरी।
देश में महंगाई के मोर्चे पर एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। सोमवार को कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री की ओर से जारी किए गए डेटा के मुताबिक, थोक महंगाई दर यानी डब्ल्यूपीआई (WPI) में बड़ी बढ़त दर्ज की गई है। जनवरी 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 1.81 पर्सेंट पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि महज एक महीने पहले यानी दिसंबर 2025 में यह सिर्फ 0.83 पर्सेंट पर थी। यह पिछले 10 महीनों में थोक महंगाई का सबसे ऊंचा लेवल है। बाजार के जानकारों का मानना है कि खाने-पीने के सामान और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की कीमतों में आई तेजी ने महंगाई को इस ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर आने वाले समय में बाजार की कीमतों और आम लोगों के बजट पर पड़ सकता है।
जनवरी 2026 में महंगाई बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण रहे हैं। सरकारी डेटा बताता है कि बेसिक मेटल्स, मैन्युफैक्चरिंग के दूसरे सामान, नॉन-फूड आर्टिकल्स, फूड आर्टिकल्स और कपड़ों यानी टेक्सटाइल्स की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने महंगाई को ऊपर धकेला है। पिछले कुछ समय से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लागत बढ़ने का असर अब थोक कीमतों पर साफ दिखने लगा है। डब्ल्यूपीआई में फूड इंडेक्स की बात करें तो इसमें भी बड़ी तेजी आई है। दिसंबर 2025 में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर शून्य (0) पर्सेंट पर थी, जो जनवरी में बढ़कर 1.41 पर्सेंट हो गई है। यानी थोक बाजार में खाने का सामान अब पहले के मुकाबले काफी महंगा बिक रहा है।
प्राइमरी आर्टिकल्स के ग्रुप में, जिसमें खेती का सामान, मिनरल्स और क्रूड ऑयल शामिल होते हैं, जनवरी में कीमतों में मामूली कमी देखी गई है। इस ग्रुप की कीमतों में 0.15 पर्सेंट की गिरावट आई है। अगर गहराई से देखें तो फूड आर्टिकल्स की कीमतों में 1.79 पर्सेंट और मिनरल्स की कीमतों में 0.47 पर्सेंट की कमी आई है। हालांकि, राहत की यह खबर यहीं खत्म हो जाती है क्योंकि इसी ग्रुप में आने वाले नॉन-फूड आर्टिकल्स 5.32 पर्सेंट महंगे हो गए हैं। इसके अलावा कच्चे तेल (क्रूड पेट्रोलियम) और नेचुरल गैस की कीमतों में भी दिसंबर के मुकाबले 4.27 पर्सेंट का बड़ा उछाल देखने को मिला है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सीधे तौर पर ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की लागत पर पड़ता है।
फ्यूल और पावर सेक्टर से थोड़े राहत भरे आंकड़े मिले हैं। जनवरी में फ्यूल और पावर की कीमतों में 1.62 पर्सेंट की गिरावट आई है। बिजली की कीमतें 2.91 पर्सेंट और मिनरल ऑयल के दाम 1.68 पर्सेंट कम हुए हैं। हालांकि कोयले की कीमतों में 0.73 पर्सेंट की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी तरफ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दबाव बना हुआ है। मैन्युफैक्चरिंग के 22 ग्रुप्स में से 19 में कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि सिर्फ 3 ग्रुप्स में दाम गिरे हैं। बेसिक मेटल्स, फूड प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल्स और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट महंगे हुए हैं, जबकि फार्मा, मशीनरी और फर्नीचर की कीमतों में थोड़ी कमी आई है। कुल मिलाकर मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की कीमतों में 1.30 पर्सेंट का इजाफा हुआ है।
थोक महंगाई के साथ-साथ रिटेल महंगाई यानी सीपीआई (CPI) के आंकड़े भी जारी किए गए हैं। जनवरी 2026 में भारत की रिटेल महंगाई दर 2.75 पर्सेंट रही है। सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) ने इस बार महंगाई के आंकड़ों को पेश करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव किया है। अब रिटेल महंगाई की गणना के लिए बेस ईयर को बदलकर 2024 कर दिया गया है। इससे पहले काफी समय से पुराने बेस ईयर का इस्तेमाल हो रहा था। बेस ईयर बदलने का मतलब है कि अब महंगाई के इंडेक्स में लोगों के खर्च करने के नए तरीके को शामिल किया गया है। नए स्ट्रक्चर में सर्विसेज यानी सेवाओं को ज्यादा वेटेज दिया गया है, जबकि खाने-पीने की चीजों के वेटेज को थोड़ा कम किया गया है। यह बदलाव देश की बदलती इकोनॉमी और लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है।
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