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  1. सोने की कीमतों में 9 दिन बाद क्यों लौटी तेजी? चांदी की कीमतों में भी आया 5000 रुपये का उछाल

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सोने की कीमतों में 9 दिन बाद क्यों लौटी तेजी? चांदी की कीमतों में भी आया 5000 रुपये का उछाल

Upstox

3 min read | अपडेटेड March 25, 2026, 08:53 IST

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सारांश

सोने की कीमतों में पिछले 9 दिनों से जारी गिरावट आखिरकार थम गई है। 25 मार्च को ग्लोबल मार्केट में सोना $4,550 के करीब पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के 15-पॉइंट प्लान की खबरों ने बाजार में फिर से निवेशकों का भरोसा जगाया है।

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करीब दो हफ्ते की भारी गिरावट के बाद सोने और चांदी में रिकवरी देखी जा रही है।

सोने के निवेशकों के लिए गुरुवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया है। पिछले 9 दिनों से सोने की कीमतों में जो भारी गिरावट देखी जा रही थी, उस पर अब ब्रेक लग गया है। ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतें $4,550 प्रति औंस के करीब कारोबार कर रही हैं। मंगलवार को इसमें 1.5 पर्सेंट की बढ़त देखी गई थी, जो बुधवार को भी जारी रही। बाजार में यह सुधार ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध पर टिकी हैं। इस युद्ध की वजह से पिछले कुछ दिनों में सोने की कीमतों में करीब 15 पर्सेंट तक की भारी गिरावट आई थी।

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युद्ध और शांति की विरोधाभासी खबरें

बाजार में सोने की कीमतों में अचानक आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह युद्ध से जुड़ी खबरें हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने के लिए एक 15-पॉइंट का प्लान भेजा है। इस खबर ने निवेशकों को उम्मीद दी है कि शायद अब तनाव कम होगा। हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक दूसरी रिपोर्ट इसके उलट दावा कर रही है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में 3,000 और सैनिक भेजने की तैयारी में है। इन विरोधाभासी खबरों की वजह से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन फिलहाल रिकवरी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।

तेल की कीमतों और महंगाई का दबाव

इस महीने की शुरुआत में जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, तब तेल की कीमतें 120 डॉलर के पार चली गई थीं। इसके जवाब में ईरान ने भी कई खाड़ी देशों के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए। तेल के दाम बढ़ने से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया। इसकी वजह से सेंट्रल बैंकों द्वारा ब्याज दरें कम करने की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की मांग कम हो जाती है क्योंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता। इसी वजह से निवेशकों ने सोने को बेचकर कैश जुटाना शुरू कर दिया था, जिससे कीमतें नीचे आ गई थीं।

आईबीजेए डेटा और कीमतों का गणित

अगर हम भारत बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के डेटा पर नजर डालें, तो कीमतों में उतार-चढ़ाव साफ नजर आता है। 24 मार्च 2026 को सोना 999 (PM Price) 1,40,420 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि 23 मार्च को यह 1,39,569 रुपये था। इसी तरह चांदी की कीमतों में भी बड़ा उछाल आया है। 23 मार्च को चांदी 2,19,260 रुपये प्रति किलो थी, जो 24 मार्च को बढ़कर 2,24,545 रुपये पर पहुंच गई। हालांकि, अगर हम 11 मार्च के डेटा से तुलना करें, तो सोना तब 1,60,230 रुपये पर था। यानी ऊपर के स्तरों से सोना अभी भी काफी नीचे है, लेकिन अब इसमें सुधार शुरू हो गया है।

सेंट्रल बैंकों की रणनीति और फ्यूचर

सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ने की एक और बड़ी वजह सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने की बिक्री भी रही है। तुर्की जैसे देशों के सेंट्रल बैंक अपनी करेंसी को बचाने के लिए सोना बेच रहे हैं। इसके अलावा, शेयर बाजार में आई गिरावट की वजह से भी निवेशकों ने अपने सोने के निवेश को बेचकर पैसा निकालना शुरू किया था। साल 2025 और 2026 की शुरुआत में सोना $5,600 के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन युद्ध ने पूरे समीकरण बदल दिए। अब नजर इस बात पर है कि क्या डिप्लोमेटिक तरीके से युद्ध रुकता है या तनाव और बढ़ता है। अगर शांति की बात आगे बढ़ती है, तो सोने में और मजबूती देखी जा सकती है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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