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5 min read | अपडेटेड December 29, 2025, 11:52 IST
सारांश
गोल्ड/ सिल्वर ईटीएफ निवेश फंड हैं, जिनका शेयर बाजारों में शेयरों की तरह कारोबार होता है। इसमें फिजिकल सोना या चांदी खरीदे बिना कीमती धातुओं में निवेश किया जा सकता है। वे भौतिक रूप से सर्राफा (सोना/चांदी) या संबंधित परिसंपत्तियों को रखते हैं और उनकी कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर नजर रखते हैं।

गोल्ड एंड सिल्वर ईटीएफ में निवेश करना क्यों बेहतर?
गोल्ड और सिल्वर की कीमतों ने साल 2025 में तमाम रिकॉर्ड्स ध्वस्त कर डाले और इसके साथ ही इनमें निवेशकों की रुचि भी पहले से काफी ज्यादा बढ़ गई है। गोल्ड और सिल्वर में इन्वेस्ट करने के बेस्ट तरीके क्या हैं? इसको लेकर विशेषज्ञों की क्या राय है, चलिए समझने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उपलब्ध विभिन्न निवेश विकल्पों में गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) एक बेहतर विकल्प है। इसका कारण कम पैसे के साथ सोना, चांदी में इन्वेस्टमेंट, उसके रखरखाव को लेकर कोई झंझट नहीं और कम ट्रांजैक्शन फीस के साथ हाइ लिक्विडिटी यानी भुनाने की सुविधा है। उनका यह भी कहना है कि अगर आप फिजिकल गोल्ड या सिल्वर को महत्व देते हैं, निवेश के लिए सोने/चांदी के सिक्के/बिस्कुट बेहतर हैं। क्योंकि ज्वेलरी खरीदने में आपको मेकिंग चार्जेस भी देने पड़ते हैं, तो ऐसे में यह ऑप्शन उतना अच्छा नहीं है।
आपको बता दें कि कि इस साल अबतक सोने में 82% जबकि चांदी में 175% की तेजी आई है। मल्टीकमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में सोना 1 जनवरी को 76,772 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 26 दिसंबर को 1,39,890 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। वहीं चांदी 1 जनवरी को 87,300 रुपये प्रति किलो थी, जो 26 दिसंबर को बढ़कर 2,40,300 रुपये प्रति किलो पहुंच गई।
निवेश के विकल्पों के बारे में मेहता इक्विटीज लि. के उपाध्यक्ष (जिंस) राहुल कलंत्री ने कहा, ‘मूल्यवान धातु में निवेश के लिए उपलब्ध विभिन्न विकल्पों में गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ बेहतर विकल्प है। इसका कारण यह सोना या चांदी को रखने की समस्या के बिना निवेश करने का एक आसान तरीका है। साथ ही यह काफी ज्यादा लिक्विडिटी देता है।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा, ‘जब सोना या चांदी में निवेश की बात करते हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप इसे किस रूप में रखते हैं। यह मूल रूप से आपकी नॉलेज और खरीद के सबसे सुविधाजनक साधनों पर निर्भर करता है। हर इंसान की पसंद उसके व्यक्तिगत लक्ष्यों, उपयोग की आवश्यकताओं और निवेश में बने रहने की अवधि के आधार पर अलग-अलग होगी।’
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स लि. के निदेशक (जिंस और मुद्रा) नवीन माथुर ने कहा, ‘उपलब्ध विभिन्न निवेश विकल्पों में से, गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ अब तक का सबसे अच्छा निवेश विकल्प है। इसका कारण निवेश के लिए उपलब्ध कम मूल्यवर्ग की इकाइयों, रखरखाव की कोई लागत न होने, अंतर्निहित ईटीएफ के जरिए शुद्धता की गारंटी, हाइ लिक्विडिटी और कम ट्रांजैक्शन लागत जैसे लाभ हैं।’
गोल्ड/ सिल्वर ईटीएफ निवेश फंड हैं, जिनका शेयर बाजारों में शेयरों की तरह कारोबार होता है। इसमें फिजिकल सोना या चांदी खरीदे बिना कीमती धातुओं में निवेश किया जा सकता है। वे भौतिक रूप से सर्राफा (सोना/चांदी) या संबंधित परिसंपत्तियों को रखते हैं और उनकी कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर नजर रखते हैं। इसमें म्यूचुअल फंड के जरिए भी निवेश किया जा सकता है। सोने में निवेश भौतिक रूप से मूल्यवान धातु खरीदकर, ईटीएफ, फ्यूचर एंड ऑप्शन्स या फिर म्यूचुअल फंड के जरिए किया जा सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, प्रत्येक विकल्प के अपने फायदे और नुकसान हैं, इसलिए निवेशकों के लिए यह आकलन करना महत्वपूर्ण है कि कौन सा विकल्प उनके लक्ष्यों के अनुकूल है।
फ्यूचर एंड ऑप्शन्स कारोबार के जरिए निवेश के बारे में कलंत्री ने कहा, ‘ये उन अनुभवी निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जो शॉर्ट टर्म मौकों की तलाश में हैं या जोखिम को कम करने के लिए ‘हेजिंग’ करना चाहते हैं, लेकिन ये अधिक जोखिम भरे होते हैं।’ एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘डिजिटल गोल्ड मुख्य रूप से सुविधाजनक होने, कम निवेश राशि, खरीदने और बेचने में आसानी और ऐप-आधारित निर्बाध पहुंच के कारण लोकप्रिय हो रहा है। यह आकर्षण विशेष रूप से युवा निवेशकों के बीच है, जो तकनीक को पसंद करते हैं और पारंपरिक फिजिकल गोल्ड की तुलना में डिजिटल संपत्तियों के साथ अधिक सहज हैं। इसमें निवेशक बहुत कम राशि से शुरुआत कर सकते हैं और उसके रखरखाव या शुद्धता को लेकर कोई परेशानी नहीं होती है।’
उन्होंने कहा, ‘हालांकि, डिजिटल गोल्ड सेबी द्वारा विनियमित प्रोडक्ट नहीं है। यह आमतौर पर प्राइवेट फोरम द्वारा पेश किया जाता है जहां सोना थर्ड-पार्टी ‘वॉल्ट’ (तिजोरी) प्रबंधकों के पास रखा होता है, जिसमें जोखिम जुड़े होते हैं।’ कलंत्री ने कहा, ‘नियामकीय जोखिमों को देखते हुए, हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे केवल सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) द्वारा विनियमित प्रोडक्ट्स के जरिये से ही सोना या चांदी में निवेश करें।’ विश्लेषकों का कहना है कि कुल मिलाकर, इन विकल्पों में विविधतापूर्ण दृष्टिकोण अपनाने से निवेशकों को सुरक्षा, तरलता और वृद्धि क्षमता के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।
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