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UP में गेहूं का MSP ₹2,585 प्रति क्विंटल तय, पिछले साल की तुलना में किसानों को कितना फायदा?

Upstox

2 min read | अपडेटेड March 23, 2026, 17:29 IST

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सारांश

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न हुई मंत्रिमंडल की बैठक में खाद्य एवं रसद विभाग से जुड़े अहम फैसले के तहत इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले साल की तुलना में 160 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है।

गेहूं का एमएसपी

उत्तर प्रदेश में गेहूं का एमएसपी तय

उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने सोमवार को एक बड़ा फैसला करते हुए गेहूं के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (Minimum Support Price, MSP) में इस साल 160 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा छंटाई, सफाई और उतराई के मद में किसानों को खरीद एजेंसियों के जरिए 20 रुपये प्रति क्विंटल दिए जाएंगे। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न हुई मंत्रिमंडल की बैठक में खाद्य एवं रसद विभाग से जुड़े अहम फैसले के तहत इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले साल की तुलना में 160 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है।

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कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बैठक के बाद बताया कि केंद्र सरकार ने इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले साल की तुलना में 160 रुपये अधिक है। शाही ने कहा कि रामनवमी के बाद 30 मार्च, 2026 से 15 जून, 2026 तक इसकी खरीदारी की जाएगी। राज्य में आठ क्रय एजेंसियों द्वारा खरीद होगी और 6,500 क्रय केन्द्र सभी 75 जिलों में संचालित किए जाएंगे। उन्‍होंने कहा कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), खाद्य एवं विपणन विभाग, उप्र मंडी परिषद, उप्र पीसीएफ, पीसीओयू, उप्र एसएस, नैफेड, एनसीसीएफ (भारतीय राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता सहकारी संघ मर्यादित) के माध्‍यम से खरीद होगी। शाही ने कहा कि कृषि उत्‍पादक संगठनों और कृषि उत्‍पादक कंपनियों को भी खरीद की अनुमति रहेगी। हालांकि, इनके लिए शर्त यह है कि इनके बैंक खाते में 20 लाख रुपये होने चाहिए और एक साल पहले का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। कृषि मंत्री ने कहा कि इसके अलावा छंटाई, सफाई और उतराई के मद में कृषकों को खरीद एजेंसियों के जरिए 20 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाएगा, जिसका वहन मंडी परिषद करेगी।

शाही ने बताया कि इस पर लगभग 60 करोड़ रुपये का और खर्च होगा जिसे मंडी परिषद वहन करेगी। कोशिश होगी कि ज्यादातर किसानों की फसल खरीद ली जाए। किसानों के पंजीकरण, प्रचार-प्रसार और सभी इंतजामों के निर्देश दिए गए हैं। उन्‍होंने कहा कि इस साल अच्छी फसल हुई है और कृषि विभाग ने अच्छे बीज उपलब्‍ध कराए थे। सरकार की कोशिश है कि किसानों को किसी तरह का नुकसान नहीं उठाना पड़े। एक सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा कि 30 लाख टन खरीद का प्रस्ताव विभाग ने लाया था, लेकिन मुख्यमंत्री जी ने 50 लाख टन खरीद का लक्ष्‍य दिया है।

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Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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