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Union Budget 2026: 1 रुपये में समझिए सरकार की तिजोरी का हाल, 22 पैसे का है खास कनेक्शन

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड November 24, 2025, 08:55 IST

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सारांश

सरकार के बजट को समझने का सबसे आसान तरीका '1 रुपये का ब्रेकडाउन' है। सरकार की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा उधार से आता है, जबकि खर्च का बड़ा भाग ब्याज चुकाने और राज्यों को हिस्सा देने में जाता है। 22 पैसे का आंकड़ा बेहद खास है।

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अगर 1 रुपये को पैमाना माना जाए, तो सरकार 24 पैसे उधार लेकर काम चलाती है।

Union Budget 2026: जब भी बजट पेश होता है, तो आम आदमी बड़े-बड़े आंकड़ों में उलझ जाता है। लेकिन अगर आप देश की अर्थव्यवस्था की सेहत को आसानी से समझना चाहते हैं, तो आपको '1 रुपये का गणित' समझना होगा। सरकार अपने पूरे बजट को 1 रुपये के पैमाने पर समझाती है। यानी अगर सरकार की कुल कमाई 1 रुपया है, तो वह किन स्रोतों से आता है? और अगर खर्च 1 रुपया है, तो वह किन कामों में जाता है? यूनियन बजट में यह गणित बेहद दिलचस्प है, खासकर '22 पैसे' का आंकड़ा जो कमाई और खर्च दोनों जगह अहम भूमिका निभा रहा है।

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रुपया आता कहां से है?

सरकार की कमाई के स्रोतों पर नजर डालें तो इस बार सबसे बड़ा बदलाव इनकम टैक्स में देखा गया है। डायरेक्ट टैक्स की हिस्सेदारी बढ़ी है।

धारी और अन्य देनदारियां (24 पैसे): सरकार की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा आज भी 'उधारी' है। 1 रुपये में से 24 पैसे सरकार बाजार से उधार लेकर या अन्य देनदारियों से जुटाती है।
इनकम टैक्स (22 पैसे): नौकरीपेशा और आम लोगों द्वारा दिया जाने वाला इनकम टैक्स अब सरकार की कमाई का दूसरा सबसे बड़ा जरिया बन गया है। यह जीएसटी से भी आगे निकल गया है।
जीएसटी (18 पैसे): गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी जीएसटी से सरकार को हर 1 रुपये में 18 पैसे की कमाई होती है।
कॉर्पोरेट टैक्स (17 पैसे): कंपनियों के मुनाफे पर लगने वाले टैक्स से सरकार को 17 पैसे मिलते हैं।
अन्य स्रोत: इसके अलावा एक्साइज ड्यूटी से 5 पैसे, कस्टम ड्यूटी से 4 पैसे और नॉन-टैक्स रेवेन्यू से 9 पैसे आते हैं।

रुपया जाता कहां है?

कमाई तो हो गई, अब जानते हैं कि यह पैसा खर्च कहां होता है। यहां पर ही '22 पैसे' का वह गणित है जो आपके लिए जानना जरूरी है।

राज्यों का हिस्सा (22 पैसे): केंद्र सरकार जो टैक्स वसूलती है, उसमें से एक बड़ा हिस्सा राज्यों को देना पड़ता है। इस बार हर 1 रुपये में से 22 पैसे राज्यों के खाते में जाएंगे।
ब्याज अदायगी (20 पैसे): सरकार जो भारी-भरकम उधार लेती है, उसका ब्याज चुकाने में ही बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा चला जाता है। 1 रुपये में से 20 पैसे सिर्फ पुराने कर्जे का ब्याज भरने में खर्च हो रहे हैं।
योजनाएं और सब्सिडी (22 पैसे): अगर हम सेंट्रल सेक्टर की योजनाओं (16 पैसे) और सब्सिडी (6 पैसे) को मिला दें, तो यह कुल 22 पैसे होता है। यानी सरकार जनकल्याण और योजनाओं पर भी 1 रुपये में से 22 पैसे खर्च कर रही है।

रक्षा और पेंशन पर कितना खर्च?

देश की सुरक्षा यानी डिफेंस बजट के लिए सरकार 1 रुपये में से 8 पैसे खर्च करती है। इसके अलावा, वित्त आयोग और अन्य ट्रांसफर के लिए 8 पैसे रखे गए हैं। वहीं, सरकारी कर्मचारियों और बुजुर्गों की पेंशन पर 1 रुपये में से 4 पैसे खर्च होते हैं। केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) पर 8 पैसे का खर्च आता है।

आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?

इस ब्योरे से साफ है कि सरकार की कमाई का एक बड़ा हिस्सा (24 पैसे) अभी भी उधार से आ रहा है और खर्च का बड़ा हिस्सा (20 पैसे) ब्याज चुकाने में जा रहा है। यह स्थिति बताती है कि विकास कार्यों के लिए सरकार के पास सीमित पैसा बचता है। हालांकि, इनकम टैक्स से बढ़ती कमाई (22 पैसे) यह संकेत देती है कि देश में टैक्स देने वालों का दायरा बढ़ रहा है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छा संकेत है।

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लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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