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4 min read | अपडेटेड November 24, 2025, 15:19 IST
सारांश
Budget 2026: साल 2026 का आम बजट आने में अब कुछ ही वक्त बचा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को इसे पेश करेंगी। इससे पहले भारतीय इतिहास के उन 5 बजटों के बारे में जानना जरुरी है, जिन्हें उनके कड़े या बड़े फैसलों के कारण 'ब्लैक' या 'ड्रीम' जैसे नाम दिए गए।

बजट देश की दिशा तय करता है।
Budget 2026: साल 2026 का आगाज होने वाला है और इसके साथ ही देश को एक नई आर्थिक दिशा देने वाले आम बजट का इंतजार भी शुरू हो गया है। आगामी 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में देश का बजट पेश करेंगी, जिसकी तैयारियां वित्त मंत्रालय में शुरू हो चुकी हैं। जैसा कि हम जानते हैं, बजट बनाने की प्रक्रिया काफी लंबी और गोपनीय होती है, जिसमें अधिकारी कई दिनों तक दुनिया से कट जाते हैं। लेकिन, 2026 के इस बजट से पहले, आइए नजर डालते हैं भारत के इतिहास के उन 5 सबसे चर्चित बजटों पर, जिन्होंने कभी जनता को झटका दिया तो कभी देश की तरक्की को नई रफ्तार दी। इनके फैसलों की वजह से ही इन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
साल 1973 में इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान पेश किए गए बजट को 'ब्लैक बजट' का नाम दिया गया था। इसे तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंतराव बी चव्हाण ने पेश किया था। इसे ब्लैक बजट कहने के पीछे एक बड़ी वजह थी। उस समय भारत भयंकर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था। सरकार का खजाना खाली हो रहा था और राजकोषीय घाटा 550 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। यह वह दौर था जब कोयले की खदानों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। आर्थिक तंगी के उस बुरे दौर के कारण ही इसे इतिहास में ब्लैक बजट कहा जाता है।
साल 1991 का बजट आधुनिक भारत की नींव माना जाता है। इसे तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने पेश किया था। इसे 'उदारीकरण बजट' के नाम से जाना जाता है क्योंकि यहीं से भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था के दरवाजे दुनिया के लिए खोले थे। इस बजट में विदेशी कंपनियों को भारत में कारोबार करने की खुली छूट दी गई। इसके जरिए भारतीय कंपनियों के लिए भी विदेश में व्यापार करना आसान हो गया। लाइसेंस राज को खत्म करने की दिशा में यह सबसे बड़ा कदम था।
साल 1997 का बजट भारत के मिडिल क्लास और कॉरपोरेट जगत के लिए किसी सपने से कम नहीं था, इसलिए इसे 'ड्रीम बजट' कहा गया। इसे वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने पेश किया था। इस बजट की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें इनकम टैक्स और कंपनियों पर लगने वाले टैक्स (कॉरपोरेट टैक्स) में भारी कटौती का ऐलान किया गया था। साथ ही, सरचार्ज को खत्म करके लोगों को बड़ी राहत दी गई थी। टैक्स कम होने से लोगों के हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा आया।
नई सदी की शुरुआत यानी साल 2000 में पेश किए गए बजट को 'मिलेनियम बजट' कहा जाता है। इसे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने पेश किया था। इस बजट ने भारत को आईटी सुपरपावर बनाने की राह दिखाई। इस बजट में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनियों को बड़ी राहत दी गई थी। कंप्यूटर, सीडी और सॉफ्टवेयर जैसे सामानों पर कस्टम ड्यूटी में भारी कटौती की गई, जिससे देश में तकनीक का प्रसार तेजी से हुआ।
साल 2002 का बजट एनडीए सरकार के लिए थोड़ी मुसीबत लेकर आया था। इसे भी यशवंत सिन्हा ने ही पेश किया था, लेकिन इसे 'रोलबैक बजट' के नाम से याद किया जाता है। दरअसल, इस बजट में सरकार ने एलपीजी सिलेंडर, सर्विस टैक्स और कई अन्य चीजों के दाम बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। इन प्रस्तावों का संसद से लेकर सड़क तक इतना भारी विरोध हुआ कि सरकार को मजबूर होकर अपने फैसले वापस लेने पड़े। चूंकि बढ़े हुए दाम वापस (Rollback) लिए गए, इसलिए इसका नाम ही रोलबैक बजट पड़ गया।
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