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4 min read | अपडेटेड April 10, 2026, 08:06 IST
सारांश
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के मुताबिक, डिजिटल भुगतान से संबंधित धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। चर्चा पत्र के मुताबिक, 2025 में 28 लाख धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल राशि 22,931 करोड़ रुपये थी।

धोखाधड़ी रोकने को आरबीआई का खाते में भुगतान देरी से ‘क्रेडिट’ होने, रद्द का विकल्प देने का प्रस्ताव
भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India, RBI) ने वित्तीय धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए गुरुवार को अधिकृत भुगतान (Authorized payment) को अकाउंट में देरी से ‘क्रेडिट’ करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ डिजिटल पेमेंट को कैंसल करने का ऑप्शन भी देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, आरबीआई ने गड़बड़ी की मंशा से ही खोले जाने वाले (म्यूल) अकाउंट्स की समस्या से निपटने में मदद के लिए एक खाते में कुल क्रेडिट को सीमित करने और 70 साल और उससे अधिक उम्र के नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अधिक मूल्य वाले ट्रांजैक्शन को प्रमाणित करने के लिए एक भरोसेमंद व्यक्ति नॉमिनेट करने का भी प्रस्ताव रखा है।
केंद्रीय बैंक ने ग्राहकों को निशाना बनाकर की जा रही धोखाधड़ी की बढ़ती गतिविधियों के बीच गुरुवार को जारी एक चर्चा पत्र में इन नियमों का प्रस्ताव रखा। आरबीआई ने फरवरी की मौद्रिक नीति बैठक के दौरान विकासात्मक और नियामक नीतियों पर अपने वक्तव्य के हिस्से के रूप में इस चर्चा पत्र की घोषणा की थी। केंद्रीय बैंक ने 8 मई तक इस चर्चा पत्र पर प्रतिक्रिया और सुझाव मांगे हैं।
##NCRP के मुताबिक धोखाधड़ी मामलों का डेटा
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के मुताबिक, डिजिटल भुगतान से संबंधित धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। चर्चा पत्र के मुताबिक, 2025 में 28 लाख धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल राशि 22,931 करोड़ रुपये थी। यह संख्या 2024 में दर्ज 24 लाख धोखाधड़ी के मामलों (कुल 22,848 करोड़ रुपये) और 2023 में दर्ज 13.1 लाख धोखाधड़ी के मामलों (कुल 7,465 करोड़ रुपये) से अधिक है।
##क्या है पुश पेमेंट?
अधिकृत ‘पुश पेमेंट’ के लिए देरी से क्रेडिट के संबंध में, केंद्रीय बैंक ने 10,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन को लेकर भुगतानकर्ता के पक्ष में थोड़ी देरी से ‘क्रेडिट’ करने का प्रस्ताव रखा है। ‘पुश पेमेंट’ एक ऐसा ट्रांजैक्शन है, जिसमें पैसा ट्रांसफर करने वाला शख्स खुद फंड को प्राप्तकर्ता तक पहुंचाने का प्रोसेस शुरू करता है और उसे अधिकृत करता है।
##कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
इस प्रस्ताव के तहत, एक बार जब कोई ग्राहक 10,000 रुपये से अधिक का ट्रांजैक्शन शुरू करता है, तो एक घंटे की देरी से पैसा ‘क्रेडिट’ होने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। यह देरी भुगतानकर्ता या प्राप्तकर्ता या दोनों के पक्ष में लागू की जा सकती है। इस पीरियड में पैसा भेजने वाले शख्स का बैंक ग्राहक के खाते से अस्थायी रूप से राशि डेबिट करेगा और भुगतानकर्ता के पास किसी कारणवश ट्रांजैक्शन कैंसल करने का ऑप्शन रहेगा। इस दायरे में हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन को शामिल करने का प्रस्ताव है, क्योंकि 10,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन मात्रा के हिसाब से रिपोर्ट किए गए धोखाधड़ी के मामलों का लगभग 45% हैं, लेकिन मूल्य के हिसाब से लगभग 98.5% हैं।
##70 साल या उससे अधिक उम्र वालों और दिव्यांगों के लिए क्या है प्रस्ताव?
इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने 70 साल और उससे अधिक उम्र के नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा किए जाने वाले हाई वैल्यू वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए एक भरोसेमंद व्यक्ति द्वारा अतिरिक्त प्रमाणीकरण का भी प्रस्ताव किया है। साथ ही ‘बैंकों के साथ संबंध की प्रकृति के अनुरूप’ खातों में ‘क्रेडिट’ प्राप्त करने का भी प्रस्ताव किया है।
इसके अलावा, आरबीआई ने कहा कि ग्राहकों को डिजिटल भुगतान कंट्रोल दिए जा सकते हैं, जिसमें किसी भी डिजिटल भुगतान मोड के लिए ‘चालू/बंद’ सुविधा, खाता स्तर पर विभिन्न प्रकार के लेनदेन के लिए सीमा निर्धारित करने की सुविधा और एक ही बार में खाते से सभी डिजिटल भुगतान लेनदेन को निष्क्रिय करने की सुविधा ('किल स्विच') शामिल होगी। चर्चा पत्र के अनुसार, खाता स्तर पर निष्क्रिय सुविधा सक्रिय करने से खाताधारक द्वारा निर्धारित अन्य कंट्रोल रद्द हो जाएंगे। एक बार इस सुविधा के सक्रिय हो जाने के बाद, डिजिटल भुगतान को फिर से सक्रिय करने के लिए ‘किल-स्विच’ को निष्क्रिय उचित प्रमाणीकरण/सत्यापन उपायों के बाद डिजिटल माध्यमों से या खाताधारक द्वारा बैंक ब्रांच में जाकर किया जा सकता है।
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