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SEBI ने ब्रोकर रिपोर्टिंग नियमों, अनुपालन आवश्यकताओं में दी छूट, क्या हैं इसके मायने, कब से होगा लागू?

Upstox

5 min read | अपडेटेड March 24, 2026, 07:16 IST

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सारांश

सेबी के सर्कुलर के मुताबिक, शेयर ब्रोकरों को 7 वर्किंग दिनों के भीतर शेयर बाजारों को बैंक खाते खोलने या बंद करने की सूचना देनी होगी। ये प्रावधान 17 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।

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सेबी ने ब्रोकर रिपोर्टिंग नियमों, अनुपालन आवश्यकताओं में छूट दी

पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India, SEBI) ने सोमवार को शेयर ब्रोकर को सूचना देने से जुड़ी आवश्यकताओं में छूट दी। इसके तहत डीमैट खातों की अनिवार्य रिपोर्टिंग को खत्म कर दिया गया है और बैंक अकाउंट्स के खुलासे संबंधी नियमों में भी छूट दी गई है। इन बदलावों का उद्देश्य नियामक दक्षता बढ़ाना और रिपोर्टिंग दायित्वों को व्यवस्थित और सरल बनाकर ब्रोकर के लिए कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना है। संशोधित रूपरेखा के तहत, जो शेयर ब्रोकर बैंक या प्राइमरी डीलर भी हैं, उन्हें शेयर बाजारों को केवल उन्हीं बैंक अकाउंट्स की जानकारी देनी होगी जिनका इस्तेमाल वे शेयर ब्रोकिंग गतिविधियों के लिए करते हैं।

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इसके अलावा, शेयर ब्रोकर द्वारा रखे गए डीमैट अकाउंट्स को उचित रूप से दिखाया जाना जारी रहेगा, लेकिन यह आवश्यकता उन अकाउंट्स पर लागू नहीं होगी जिनका इस्तेमाल खासतौर से शेयर ब्रोकिंग के अलावा अन्य गतिविधियों के लिए किया जाता है। सेबी ने शेयर ब्रोकर के लिए शेयर बाजारों को डीमैट खातों की जानकारी देने की आवश्यकता को भी खत्म कर दिया है। हालांकि, डिपॉजिटरी ब्रोकर द्वारा खोले या बंद किए गए डीमैट खातों का ब्योरा शेयर बाजार को देंगे। इस बारे में व्यवस्था संयुक्त रूप से निर्धारित की जाएगी। सेबी के सर्कुलर के मुताबिक, शेयर ब्रोकरों को 7 वर्किंग दिनों के भीतर शेयर बाजारों को बैंक खाते खोलने या बंद करने की सूचना देनी होगी। ये प्रावधान 17 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।

बाजार मध्यस्थों के लिए 'योग्य और उपयुक्त व्यक्ति’ रूपरेखा में सुधार के प्रस्ताव को मंजूरी

सेबी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सोमवार को बाजार मध्यस्थों के लिए 'योग्य और उपयुक्त व्यक्ति' रूपरेखा में व्यापक सुधार के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस पहल का मकसद नियामक प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता और निष्पक्षता लाना है। इस प्रस्ताव में आर्थिक अपराध मामलों में एफआईआर, शिकायत या आरोप पत्र दाखिल होने पर खुद ही अयोग्य घोषित होने की व्यवस्था को खत्म करना शामिल है। नियामक ने कहा, ‘सेबी द्वारा दायर आपराधिक शिकायत/एफआईआर या आर्थिक अपराधों से संबंधित आरोप पत्र के लंबित होने का नियम-आधारित मानदंड, अपने आप में, खुद से अयोग्य घोषित होने का आधार नहीं होगा। हालांकि, मौजूदा सिद्धांत-आधारित मानदंड मामला-दर-मामला लागू होगा।’

सेबी ने कहा कि नैतिक मानकों के उल्लंघन से जुड़े अपराध में दोष सिद्ध होने पर मौजूदा अयोग्यता का दायरा बढ़ाकर इसमें किसी भी आर्थिक अपराध या प्रतिभूति कानून के तहत किसी भी अपराध में दोषसिद्धि को भी शामिल किया जाएगा। स्वीकृत संशोधनों का उद्देश्य सिद्धांत-आधारित मानदंडों के नियामक उद्देश्य को उचित रूप से संतुलित करना है। इसके तहत केवल ‘ईमानदारी, निष्ठा, नैतिक व्यवहार, प्रतिष्ठा, निष्पक्षता और चरित्र वाले व्यक्ति ही प्रतिभूति बाजार में काम कर सकते हैं’ और बाजार प्रतिभागियों के लिए व्यापार करने में सुगमता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी पूरा करना है।

सेबी ने कहा, ‘मान्यता प्राप्त शेयर बाजारों के आवेदक/मध्यस्थ को किसी भी घटना के घटित होने पर, जिसमें स्वयं, उसके प्रमुख मध्यस्थ या नियंत्रण में शामिल व्यक्ति शामिल हों, 15 वर्किंग दिनों के अंदर सेबी को सूचित करना आवश्यक होगा।’ इसके अलावा, सेबी नियमों में सुनवाई के अधिकार को स्पष्ट रूप से शामिल करने पर विचार कर रहा है। हालांकि, सुनवाई का उचित अवसर देने की व्यवस्था पहले से मौजूद है, बोर्ड ने प्रक्रियात्मक अस्पष्टता को दूर करने के लिए इसे नियमों में स्पष्ट रूप से बताने का निर्णय लिया है।

इसके अनुसार, किसी व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर दिए जाने के बाद ही ‘अयोग्य’ घोषित किया जा सकता है। नियामक ने पंजीकरण के लिए आवेदन करने हेतु ‘डिफॉल्ट’ पांच साल की अपात्रता अवधि को भी हटाने का निर्णय लिया है। सेबी के आदेश में कोई समय अवधि निर्धारित नहीं होती है। इससे, अपात्रता केवल आदेश में उल्लेखित अवधि के लिए लागू होगी। इसके अलावा, कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद पंजीकरण आवेदन पर विचार न करने की अवधि को एक साल से घटाकर छह महीने करने का प्रस्ताव है, ताकि आवेदकों के लिए लंबे समय तक अनिश्चितता की स्थिति से बचा जा सके।

InvITs और REITs को कंट्रोल करने वाले नियमों में भी संशोधन

सेबी बोर्ड ने व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए, बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) को नियंत्रित करने वाले नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। वर्तमान में, इनविट के अंतर्गत विशेष उद्देश्यीय इकाई (एसपीवी) को अपनी परिसंपत्तियों का कम से कम 90% बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश करना अनिवार्य है। रियायती समझौते की समाप्ति पर, एसवपीवी में बुनियादी ढांचा परियोजना का अस्तित्व खत्म हो जाता है। हालांकि, लंबित दावों, मुकदमों, कर निर्धारण, रियायती समझौते के तहत समयसीमा आदि के कारण तत्काल बिक्री या परिसमापन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होने के कारण इनविट को ऐसे विशेष उद्देश्यीय इकाई में निवेश बनाए रखना पड़ सकता है।

इस समस्या के समाधान के लिए, इनविट को रियायती समझौते की समाप्ति या समापन के बाद भी एसपीवी में निवेश बनाए रखने की अनुमति दी जाएगी। सेबी ने कहा कि इनविट को रियायती समझौते की समाप्ति, लंबित दावों/मुकदमों के समापन, या समय अवधि की समाप्ति, इनमें से जो भी बाद में हो, उसके एक साल के अंदर या तो ऐसे एसपीवी में निवेश समाप्त करना होगा या ऐसे एसपीवी में एक नई अवसंरचना परियोजना का अधिग्रहण करना होगा।

भाषा इनपुट के साथ

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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