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3 min read | अपडेटेड February 04, 2026, 11:15 IST
सारांश
Repo Rate: फरवरी से दिसंबर तक RBI की ब्याज दर कटौती की पूरी कहानी भी अहम है। फरवरी 2025 में MPC ने सर्वसम्मति से रेपो रेट 0.25% घटाया था। इसके बाद अप्रैल में फिर 0.25% की कटौती हुई। जून में RBI ने बड़ा कदम उठाते हुए 0.5% की कटौती कर दी। अगस्त और अक्टूबर की बैठकों में दरों को स्थिर रखा गया। फिर दिसंबर की बैठक में एक बार फिर 0.25% की कटौती की गई।

RBI: रेपो रेट में राहत का मकसद देश की आर्थिक बढ़त को सपोर्ट करना और महंगाई को काबू में रखना है।
रेपो रेट में राहत का मकसद देश की आर्थिक बढ़त को सपोर्ट करना और महंगाई को काबू में रखना है। मौजूदा MPC बैठक में सदस्य तीनों दिन विस्तार से चर्चा करेंगे। वे भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ और महंगाई की स्थिति को ध्यान में रखकर आगे का फैसला करेंगे।
फरवरी से दिसंबर तक RBI की ब्याज दर कटौती की पूरी कहानी भी अहम है। फरवरी 2025 में MPC ने सर्वसम्मति से रेपो रेट 0.25% घटाया था। इसके बाद अप्रैल में फिर 0.25% की कटौती हुई। जून में RBI ने बड़ा कदम उठाते हुए 0.5% की कटौती कर दी। अगस्त और अक्टूबर की बैठकों में दरों को स्थिर रखा गया। फिर दिसंबर की बैठक में एक बार फिर 0.25% की कटौती की गई। इस तरह यह घटकर 5.25% रह गया।
RBI के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। यह पहले के अनुमान से करीब आधा प्रतिशत ज्यादा है। यह बढ़ा हुआ अनुमान घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में सुधार को दिखाता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखेगा। पहले ही कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती हो चुकी है, इसलिए अब RBI स्थिति जस की तस रख सकता है। अभी बैंकों के लोन रेट तक ब्याज कटौती का पूरा असर नहीं पहुंचा है और बॉन्ड यील्ड भी ऊंची बनी हुई है। इसलिए फिलहाल RBI दरों में बदलाव करने के बजाय सिस्टम में नकदी (लिक्विडिटी) संभालने पर ज्यादा ध्यान दे सकता है। अमेरिका-भारत ट्रेड डील से विदेशी निवेश और रुपये को सपोर्ट मिलेगा, जिससे RBI को घरेलू लिक्विडिटी मैनेज करने में थोड़ी राहत मिलेगी।
महंगाई की बात करें तो सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर सालाना महंगाई 1.33 प्रतिशत रही, जो दिसंबर 2024 की तुलना में है। यह आंकड़ा फिलहाल अस्थायी है। दिसंबर में महंगाई बढ़ने की वजह कुछ चीजों के दाम चढ़ना रहा- जैसे पर्सनल केयर के सामान, सब्जियां, मांस और मछली, अंडे, मसाले, दालें और उनसे जुड़े उत्पाद।
नवंबर 2025 के मुकाबले दिसंबर 2025 में कुल महंगाई 62 बेसिस पॉइंट बढ़ी। फिर भी महंगाई RBI के मध्यम अवधि के लक्ष्य 4 फीसदी से नीचे ही बनी हुई है और यह लगातार 11वां महीना है। इससे नीति बनाने वालों को राहत मिली है क्योंकि इससे ग्रोथ को सपोर्ट करने की गुंजाइश बनी रहती है। अब सभी की नजर इस MPC बैठक के नतीजों पर टिकी है, क्योंकि इससे पता चलेगा कि कम महंगाई और स्थिर आर्थिक विकास के बीच RBI आगे क्या कदम उठाने वाला है।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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