बिजनेस न्यूज़

5 min read | अपडेटेड February 06, 2026, 11:04 IST
सारांश
महंगाई को लेकर RBI ने FY27 के लिए शुरुआती अनुमान दिए हैं। गवर्नर ने कहा कि FY27 की पहली तिमाही में CPI महंगाई 4.0% और दूसरी तिमाही में 4.2% रह सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ ही दिनों में GDP और इन्फ्लेशन का नया डेटा सीरीज जारी किया जाएगा, यानी अब इन अहम आर्थिक आंकड़ों को नए तरीके से मापा जाएगा।

RBI गवर्नर ने मॉनेटरी पॉलिसी की स्पीच शुरू करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था "अच्छी स्थिति में है।"
RBI ने इस बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है और पॉलिसी स्टांस को “न्यूट्रल” बनाए रखा है। इसके साथ ही मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.50% और स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.00% पर ही रखे गए हैं। गवर्नर ने आगे कहा कि मौजूदा ग्रोथ की रफ्तार आने वाले समय में भी बनी रहने की संभावना है, जो बाहरी चुनौतियों के बावजूद नजदीकी भविष्य के आर्थिक दृष्टिकोण में विश्वास का संकेत देता है।
महंगाई के अनुमान को RBI ने थोड़ा बढ़ाया है। FY26 के लिए CPI अब 2.1% रहने की उम्मीद है। Q4 FY26 में महंगाई 3.2% तक जा सकती है। FY27 की पहली तिमाही में CPI 4.0% और दूसरी तिमाही में 4.2% रहने का अनुमान है। गवर्नर ने कहा कि सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं को हटाकर देखें तो कोर इनफ्लेशन सीमित दायरे में रहेगी। पूरे FY27 के महंगाई अनुमान अप्रैल की MPC बैठक में जारी किए जाएंगे।
ग्रोथ पर बात करते हुए गवर्नर ने कहा कि भारत की रियल GDP इस साल करीब 7.4% की तेज बढ़त दर्ज कर सकती है, जो पिछले साल से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड यानी GVA करीब 7.3% बढ़ने का अनुमान है, जिसमें सर्विस सेक्टर की बड़ी भूमिका रहेगी। साथ ही मैन्युफैक्चरिंग में भी सुधार दिख रहा है और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ भी पॉजिटिव बनी हुई है।
RBI ने FY27 के पूरे साल की GDP ग्रोथ का अनुमान फिलहाल टाल दिया है और कहा है कि अप्रैल की मौद्रिक नीति बैठक में, नए GDP सीरीज आने के बाद, पूरा अनुमान जारी किया जाएगा। हालांकि RBI ने नजदीकी तिमाहियों का अनुमान बढ़ा दिया है। अब Q1 में GDP ग्रोथ 6.9% और Q2 में 7.0% रहने की उम्मीद जताई गई है।
महंगाई के मोर्चे पर गवर्नर ने कहा कि कोर इनफ्लेशन, यानी सोने-चांदी जैसी चीजों की तेज कीमतों को हटाकर देखी जाए, तो वह सीमित दायरे में ही रहने की उम्मीद है। इसका मतलब यह है कि अंदरूनी महंगाई दबाव फिलहाल ज्यादा नहीं बढ़ रहा है।
गवर्नर ने बताया कि भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 1.9% बढ़ा है, जिसमें ट्रेड डाइवर्सिफिकेशन यानी नए बाजारों की तरफ बढ़ने का फायदा मिला है। उन्होंने कहा कि कमजोर वैश्विक मांग के बीच यह एक राहत की बात है।
कैपिटल फ्लो पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब भी ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स के लिए विदेशी निवेशकों की पसंद बना हुआ है, यानी लंबे समय के निवेश को लेकर भरोसा कायम है। उन्होंने बताया कि 30 जनवरी तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब डॉलर था, जो करीब 11 महीने की जरूरतों को कवर कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नेट आउटफ्लो 5.8% बढ़ा है।
घरेलू वित्तीय हालात पर गवर्नर ने कहा कि सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस में बनी हुई है और पिछली MPC बैठक से अब तक औसतन करीब 70,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी सिस्टम में रही है। फरवरी में RBI द्वारा उठाए गए कदमों के बाद अब कुल लिक्विडिटी करीब 2 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले किए गए ब्याज दरों में कटौती का असर बैंक लोन रेट्स पर काफी हद तक दिख चुका है। कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती के मुकाबले बैंकों की औसत लेंडिंग रेट करीब 105 बेसिस पॉइंट घट चुकी है और कुल इंटरेस्ट रेट असर अब 94 बेसिस पॉइंट तक पहुंच गया है। हालांकि जनवरी 2026 में कमर्शियल पेपर और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट मार्केट में दरों में सख्ती भी देखी गई।
रेगुलेटरी बदलावों की बात करें तो RBI ने NBFC सेक्टर में राहत और सख्ती दोनों दिखाई है। जिन NBFCs का पब्लिक फंड या कस्टमर से सीधा जुड़ाव नहीं है, उन्हें रजिस्ट्रेशन से छूट देने का प्रस्ताव है। वहीं बड़े स्तर पर ब्रांच विस्तार करने वाली NBFCs को अब 1,000 से ज्यादा शाखाएं खोलने से पहले RBI की मंजूरी लेनी होगी। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के लिए Voluntary Retention Route की 2.5 लाख करोड़ रुपये की सीमा हटाई जा रही है। साथ ही External Commercial Borrowings के संशोधित नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है।
किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए भी कदम उठाए गए हैं। Kisan Credit Card के लिए नए दिशा-निर्देश लाए जाएंगे और Lead Bank Scheme के तहत एक यूनिफाइड पोर्टल शुरू किया जाएगा, ताकि जिलों में क्रेडिट योजनाओं की मॉनिटरिंग बेहतर हो सके।
माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को सपोर्ट देने के लिए RBI ने बिना गारंटी वाले लोन की लिमिट को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख करने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम का मकसद छोटे बिजनेस के लिए क्रेडिट तक पहुंच बढ़ाना और सभी सेक्टर में खपत और आर्थिक गतिविधि को सपोर्ट देना है।
फाइनेंशियल सिस्टम को लेकर गवर्नर ने कहा कि बैंकों और NBFCs की स्थिति फिलहाल मजबूत है। पेमेंट फ्रॉड से ग्राहकों को बचाने के लिए RBI 25,000 रुपये तक मुआवजे का फ्रेमवर्क ला रहा है। इसके अलावा डिजिटल पेमेंट की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक डिस्कशन पेपर जारी किया जाएगा, जिसमें कुछ यूजर्स के लिए अतिरिक्त सुरक्षा और ट्रांजैक्शन लिमिट जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में

अगला लेख