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4 min read | अपडेटेड March 23, 2026, 15:55 IST
सारांश
पशिचम एशिया में जारी युद्ध को तीन हफ्ते से ज्यादा का समय हो गया है। पीएम मोदी ने बताया कि इसका असर भारत के क्रूड ऑयल की सप्लाई और ट्रेड रूट्स पर पड़ रहा है। सरकार लगातार शिपिंग रूट्स की निगरानी कर रही है ताकि तेल और फर्टिलाइजर की सप्लाई में कोई दिक्कत न आए। सरकार हर सेक्टर पर क्लोज वॉच रख रही है।

लोकसभा में पशिचम एशिया के संकट पर देश को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि वहां जारी संघर्ष ने भारत के सामने आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया का इलाका भारत की एनर्जी सप्लाई और ग्लोबल ट्रेड के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस युद्ध को शुरू हुए तीन हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है और इसका असर न केवल उस इलाके पर, बल्कि पूरी दुनिया की इकोनॉमी और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। दुनिया के तमाम देश अब इस संघर्ष को जल्द से जल्द सुलझाने की अपील कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि जिस इलाके में यह युद्ध चल रहा है, वह भारत के ग्लोबल ट्रेड का एक मुख्य रास्ता है। भारत अपनी जरुरत का एक बड़ा हिस्सा क्रूड ऑयल और गैस इसी क्षेत्र से मंगवाता है। पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही काफी मुश्किल हो गई है। इस तनाव का सीधा असर क्रूड ऑयल और फर्टिलाइजर यानी खाद की सप्लाई पर पड़ रहा है। सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि आम लोगों को होने वाली दिक्कतों को कम किया जाए। पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि सरकार शिपिंग रूट्स पर क्लोज वॉच रख रही है और कई भारतीय जहाज जो वहां फंसे हुए थे, वे अब सुरक्षित अपनी मंजिल तक पहुंच चुके हैं।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता वहां रहने वाला विशाल भारतीय समुदाय है। पीएम मोदी ने बताया कि खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। इसके अलावा कमर्शियल जहाजों में काम करने वाले भारतीय क्रू मेंबर्स की संख्या भी बहुत ज्यादा है। उन्होंने कहा कि संकट के इस समय में भारतीयों की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। चाहे वहां काम करने वाले मजदूर हों या टूरिस्ट, सरकार हर किसी की मदद कर रही है। आंकड़ों की जानकारी देते हुए पीएम ने बताया कि जब से युद्ध शुरू हुआ है, तब से 3,75,000 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। अकेले ईरान से अब तक करीब 1,000 भारतीयों को वापस लाया गया है, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल स्टूडेंट्स शामिल हैं। सरकार ने इसके लिए 24x7 कंट्रोल रूम और इमरजेंसी हेल्पलाइन भी शुरू की हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि यह युद्ध भारत के लिए अनचाही चुनौतियां लेकर आया है। ये चुनौतियां सिर्फ पैसों से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी और मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ी हैं। उन्होंने संसद से अपील की कि इस संकट के समय में पूरा देश और सदन एक सुर में बात करे ताकि दुनिया तक भारत का संदेश साफ जा सके। सरकार ने इस संकट का असर कम करने के लिए अलग-अलग सेक्टर्स जैसे एग्रीकल्चर, फूड सिक्योरिटी, पेट्रोलियम, एमएसएमई और फाइनेंस पर पड़ने वाले प्रभाव का पूरा असेसमेंट किया है। पीएमओ यानी प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस युद्ध के शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म असर की समीक्षा की है।
सरकार इस बात को सुनिश्चित कर रही है कि देश में फ्यूल, फूड और फर्टिलाइजर यानी खाद की कोई कमी न हो। खरीफ के आने वाले सीजन के लिए खाद की उपलब्धता की जांच की गई है और जरुरत पड़ने पर दूसरे देशों से सप्लाई के विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं। बिजली सप्लाई में कोई रुकावट न आए, इसके लिए पावर प्लांट्स में कोयले के स्टॉक की भी समीक्षा की गई है। पीएम मोदी ने सभी सरकारी विभागों और राज्यों को मिलकर काम करने का निर्देश दिया है ताकि युद्ध की वजह से आम जनता को कम से कम परेशानी हो। उन्होंने साफ कहा कि इस संकट के समय में किसी भी तरह की जमाखोरी या कालाबाजारी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
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