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  1. देश की 65% आबादी के पास सामाजिक सुरक्षा, 200 Cr रेकॉर्ड एन्क्रिप्टेड आधार के जरिए प्रोसेस

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देश की 65% आबादी के पास सामाजिक सुरक्षा, 200 Cr रेकॉर्ड एन्क्रिप्टेड आधार के जरिए प्रोसेस

Upstox

2 min read | अपडेटेड March 26, 2025, 09:52 IST

सारांश

देश की 65% आबादी को किसी ना किसी तरह से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के फायदे मिल रहे हैं। कैश बेनिफिट से लेकर खाद्य सुरक्षा और हाउसिंग सुविधाओं का फायदा एक बड़ी संख्या में लोगों को हासिल हो रहा है। वहीं, केंद्र की प्रमुख योजनाओं में एन्क्रिप्टेड आधार का इस्तेमाल करके 200 करोड़ से ज्यादा रिकॉर्ड प्रोसेस किए गए हैं।

भारत के सामाजिक सुरक्षा आंकड़ों को एक जगह लाने की कवायद का चरण-1 भी शुरू हो गया है।

भारत के सामाजिक सुरक्षा आंकड़ों को एक जगह लाने की कवायद का चरण-1 भी शुरू हो गया है।

भारत की आबादी में 65% यानी करीब 92 करोड़ लोग एक ना एक सामाजिक सुरक्षा बेनिफिट का फायदा उठा रहे हैं। करीब 48.8% लोगों को कैश बेनिफिट मिल रहा है। यह जानकारी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से जारी की गई है।

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मंत्रालय ने बताया है कि मनरेगा (MGNREGA), ईपीएफओ (EPFO) और ESIC जैसी केंद्र सरकार की 34 प्रमुख योजनाओं में एन्क्रिप्टेड आधार (Aadhaar) का इस्तेमाल करके लाभार्थियों के 200 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड प्रोसेस किए गए हैं।

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने बयान में कहा कि भारत के सामाजिक सुरक्षा आंकड़ों को एक जगह लाने की कवायद का चरण-1 भी शुरू हो गया है। बयान के मुताबिक, केंद्रीय स्तर पर आंकड़े जमा करने के लिए चरण-1 में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और गुजरात को शामिल किया जाएगा।

सरकार ने बताया है कि देश ने ILO (अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन) के सहयोग से एक व्यापक डेटा पूलिंग एक्सरसाइज के जरिए अपने सामाजिक सुरक्षा दायरे को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

मंत्रालय ने बताया है कि ILO ने भारत के मौजूदा सामाजिक सुरक्षा दायरे का आकलन 48.8% किया है, जो कम है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इसमें लोगों को दिए जाने वाले वस्तु लाभों को शामिल नहीं किया गया है, जैसे खाद्य सुरक्षा और हाउसिंग बेनिफिट्स।

इसके अलावा राज्यों की ओर से चलाई जा रहीं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है। इस आंकड़े को ध्यान में रखने के बाद भारत का वास्तविक सामाजिक सुरक्षा दायरा बहुत अधिक होने की उम्मीद है।

डेटा कलेक्शन के बारे में मंत्रालय ने कहा कि यह कवायद न केवल सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की अग्रणी स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बेहतर ढंग से कल्याणकारी खर्च करने में मददगार भी होगी।

केंद्रीय मंत्रालय का कहना है कि वह डेटा एक्सरसाइज को लेकर ILO से संपर्क में है। पिछले हफ्ते जेनेवा में हुई बैठक में ILO ने बताया था कि हाउसिंग और खाद्य सुरक्षा विस्तृत सूचकों की लिस्ट में शामिल हैं। ये संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों पर आधारित है। इसलिए ऐसी योजनाओं और इनसे जुड़े डेटा को भी ILO देखेगा।

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