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3 min read | अपडेटेड April 23, 2026, 10:29 IST
सारांश
सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग एक्ट को लागू करने के लिए नए नियम जारी कर दिए हैं। इसके तहत एक ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी बनाई जाएगी। ये नियम 1 मई 2026 से लागू होंगे। इसका मकसद गेम खेलने वालों की सुरक्षा और सोशल गेम्स को बेहतर तरीके से मैनेज करना है।

भारत में ऑनलाइन गेमिंग को रेगुलेट करने के लिए सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन्स।
भारत सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग के सेक्टर में एक बहुत बड़ा और अहम कदम उठाया है। लंबे समय से इंतजार किए जा रहे 'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट' को चलाने के लिए नए नियमों को नोटिफाई कर दिया गया है। ये नए नियम 1 मई 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे। सरकार का मुख्य मकसद इस सेक्टर के लिए एक डिजिटल रेगुलेटर बनाना है, जिसे 'ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी' के नाम से जाना जाएगा। सरकार ने एक ऐसी व्यवस्था तैयार की है जो बहुत सख्त नहीं है, ताकि गेमिंग कंपनियों को काम करने में आसानी हो।
सरकार ने इस पूरे फ्रेमवर्क को काफी हल्का रखा है ताकि ज्यादातर सोशल गेम्स को बिना किसी फालतू दबाव के चलने दिया जा सके। अब गेमिंग कंपनियों को यूजर की सुरक्षा के लिए खास तकनीकी और सिस्टम से जुड़े फीचर्स देने होंगे। इसमें गेम खेलने वाले की उम्र की जांच करना, बच्चों के लिए पैरेंटल कंट्रोल, समय की पाबंदी और शिकायतों के लिए खास टूल शामिल हैं। कंपनियों को रजिस्ट्रेशन के वक्त इन सुरक्षा फीचर्स और अपने शिकायत निपटारे के सिस्टम की पूरी जानकारी देनी होगी।
नए नियमों के तहत एक खास लिटमस टेस्ट किया जाएगा। इससे यह पता चलेगा कि कोई गेम 'ऑनलाइन मनी गेम' की कैटेगरी में आता है या नहीं। आपको बता दें कि भारत में रियल मनी गेम्स पर पहले से ही पूरी तरह से पाबंदी है। अगर किसी गेम में पैसे का लेन-देन ज्यादा होता है या सरकार को लगता है कि उसमें रिस्क है, तो उसकी जांच की जाएगी। यह पूरी जांच प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। अगर कोई कंपनी ई-स्पोर्ट्स ऑफर करती है, तो भी उसकी जांच की जा सकती है।
आईटी सेक्रेटरी एस कृष्णन ने बताया कि ज्यादातर गेम्स के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी नहीं है। वे बिना किसी पाबंदी के अपना काम जारी रख सकते हैं। हालांकि, ई-स्पोर्ट्स के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, अगर सरकार को लगता है कि किसी गेम से यूजर्स या बच्चों को खतरा है, तो उसके लिए भी रजिस्ट्रेशन का नियम लागू किया जा सकता है। सफल रजिस्ट्रेशन होने पर अथॉरिटी की तरफ से 10 साल के लिए एक डिजिटल सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा, जिसे कंपनी को अपने ऐप या वेबसाइट पर दिखाना होगा।
हर गेमिंग कंपनी को अपनी वेबसाइट पर एक मजबूत शिकायत निपटारा सिस्टम बनाना होगा। अगर कोई यूजर कंपनी के जवाब से खुश नहीं है, तो वह 30 दिनों के भीतर ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास अपनी अपील ले जा सकता है। अथॉरिटी इस मामले को 30 दिनों में सुलझाने की कोशिश करेगी। इसके बाद भी अगर यूजर संतुष्ट नहीं होता है, तो वह आखिरी अपील आईटी मंत्रालय के सेक्रेटरी के पास कर सकता है। इस तरह से यूजर्स के हितों की सुरक्षा के लिए तीन लेवल का सिस्टम बनाया गया है।
ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी एक मल्टी-सेक्टर बॉडी होगी जिसमें गृह मंत्रालय, फाइनेंस, सूचना और प्रसारण, खेल और कानून मंत्रालय के बड़े अधिकारी शामिल होंगे। यह अथॉरिटी पूरी तरह से डिजिटल ऑफिस के रूप में काम करेगी। यह बॉडी बैंकों के साथ मिलकर काम करेगी ताकि पैसों के गलत लेन-देन को रोका जा सके। अगर कोई गेम गैर-कानूनी पाया जाता है, तो बैंक उसके सारे ट्रांजेक्शन तुरंत रोक देंगे। बैंकों को यह अधिकार होगा कि वे किसी भी गेमिंग कंपनी से उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांग सकें।
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