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4 min read | अपडेटेड March 17, 2026, 14:41 IST
सारांश
पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते भारत में गैस की किल्लत शुरू हो गई है। सरकार ने जरूरी वस्तु कानून लागू कर सप्लाई का नया प्लान बनाया है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि एलपीजी, एलएनजी, पीएनजी और सीएनजी में क्या अंतर है और ये हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं।

भारत की बढ़ती गैस इकोनॉमी और ऊर्जा सुरक्षा में इन चार प्रमुख ईंधनों का है सबसे बड़ा योगदान।
भारत इस समय ऊर्जा के मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण गैस की इंटरनेशनल सप्लाई में बड़ी रुकावट आई है। सरकार ने जरूरी वस्तु कानून लागू कर दिया है ताकि आम लोगों की रसोई में आंच जलती रहे। इस बीच बाजार में गैस के कई नाम जैसे एलपीजी, सीएनजी, पीएनजी और एलएनजी चर्चा में हैं। लोग अक्सर इनमें कंफ्यूज रहते हैं कि आखिर ये एक-दूसरे से कितने अलग हैं। आज के हालात में यह जानना बहुत जरूरी है कि आपके घर आने वाली गैस और गाड़ी में भरने वाले ईंधन में असली अंतर क्या है।
LPG यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस आज भारत के लगभग हर घर की बुनियादी जरूरत है। यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसों का मिश्रण होती है। इसे भारी दबाव पर लिक्विड बनाकर सिलेंडरों में भरा जाता है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर एलपीजी बाहर से मंगाता है। सरकार की उज्ज्वला योजना ने इसे देश के कोने-कोने तक पहुंचा दिया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है। वर्तमान संकट में सरकार ने एलपीजी के उत्पादन यानी प्रोडक्शन को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है ताकि घरों में खाना बनाने की दिक्कत न हो।
सीएनजी यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस मुख्य रूप से मीथेन होती है। इसे बहुत अधिक प्रेशर पर कंप्रेस किया जाता है ताकि यह कम जगह घेरे। प्रदूषण कम करने के मामले में यह पेट्रोल और डीजल से कहीं बेहतर है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए यह लाइफलाइन बन चुकी है। सीएनजी और एलपीजी में बड़ा अंतर यह है कि सीएनजी गैस के रूप में ही रहती है, जबकि एलपीजी लिक्विड बनकर सिलेंडर में रहती है। मौजूदा सप्लाई चेन की रुकावट के बावजूद सरकार सीएनजी की डिमांड को 100 पर्सेंट पूरा करने की कोशिश कर रही है ताकि शहरों का ऑपरेशन चलता रहे।
पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस वह ईंधन है जो सीधे आपके घर या रेस्टोरेंट तक पाइपों के जरिए पहुंचता है। इसमें आपको सिलेंडर बदलने या खत्म होने की चिंता नहीं रहती। यह भी मुख्य रूप से मीथेन ही होती है और हवा से हल्की होने के कारण काफी सुरक्षित मानी जाती है। इसका इस्तेमाल अब बड़े शहरों में तेजी से बढ़ रहा है। सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, पीएनजी सप्लाई को प्राथमिकता पर रखा गया है ताकि पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए घरों की ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे। इससे कंपनियों के ऑपरेशन से रेवेन्यू में भी स्थिरता बनी रहती है।
एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस वह जरिया है जिससे विदेशों से गैस भारत आती है। जब नेचुरल गैस को करीब माइनस 160 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है, तो वह लिक्विड बन जाती है। इससे पानी के जहाजों के जरिए इसे लाना आसान होता है। भारत अपनी आधी गैस जरूरत के लिए एलएनजी पर निर्भर है, जो ज्यादातर कतर और अमेरिका से आती है। होर्मुज के रास्ते में चल रहे युद्ध की वजह से एलएनजी जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है। यही वजह है कि सरकार ने फर्टिलाइजर यूनिट्स और कमर्शियल सेक्टर के कोटे में कटौती की है ताकि एलएनजी का इस्तेमाल केवल जरूरी ऑपरेशन्स के लिए हो सके।
भारत का फ्यूचर अब गैस आधारित इकोनॉमी पर टिका है। चाहे वह खेती के लिए खाद बनाना हो या शहर की बसें चलाना, इन चारों गैसों का रोल बहुत बड़ा है। वर्तमान में जिस तरह से सरकार ने संसाधनों का दोबारा बंटवारा किया है, उससे साफ है कि आने वाले कुछ समय तक गैस मैनेजमेंट एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
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