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  1. Iran और Qatar के गैस फील्ड पर हमले के क्या हैं मायने, Ras Laffan और South Pars दुनिया के लिए क्यों हैं अहम?

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Iran और Qatar के गैस फील्ड पर हमले के क्या हैं मायने, Ras Laffan और South Pars दुनिया के लिए क्यों हैं अहम?

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड March 19, 2026, 12:35 IST

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सारांश

Iran-Israel War: South Pars Gas Field ईरान और कतर के बीच साझा है और दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार माना जाता है। यह गैस फील्ड करीब 9700 स्क्वायर किलोमीटर में फैला हुआ है और ईरान की लगभग 70 फीसदी गैस सप्लाई इसी से आती है।

Iran-Israel War

Iran-Israel War: ईरान ने चेतावनी दी है कि वह सऊदी अरब, UAE और कतर के बड़े तेल और गैस ठिकानों को निशाना बना सकता है।

Iran-Israel War: इजरायल और ईरान के बीच युद्ध काफी आगे बढ़ चुका है। गैस फील्ड्स पर हालिया हमले ने दोनों देशों के बीच तनाव को एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है। 18 मार्च 2026 को इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस क्षेत्र साउथ पार्स (South Pars) पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर और अन्य खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है।
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इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इजरायल अब साउथ पार्स पर और हमले नहीं करेगा, लेकिन चेतावनी दी कि अगर ईरान ने फिर से कतर पर हमला किया, तो अमेरिका साउथ पार्स को पूरी तरह उड़ा देगा। यहां हम समझेंगे कि ये गैस फील्ड दुनिया की एनर्जी सप्लाई के लिए क्यों अहम हैं।

South Pars Gas Field क्यों है अहम

South Pars Gas Field ईरान और कतर के बीच साझा है और दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार माना जाता है। यह गैस फील्ड करीब 9700 स्क्वायर किलोमीटर में फैला हुआ है और ईरान की लगभग 70 फीसदी गैस सप्लाई इसी से आती है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले से करीब 12% उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इस फील्ड में लगभग 51 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर गैस का भंडार है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड बनाता है।

इस हमले के बाद वैश्विक बाजार में भी असर दिखने लगा है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और Brent crude 5% से ज्यादा उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस तरह के हमले जारी रहे तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा संकट आ सकता है और कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।

कब तक ठीक हो सकेंगे ये गैस फील्ड

अब सबसे बड़ा सवाल है कि South Pars को कितनी जल्दी ठीक किया जा सकता है। इतिहास बताता है कि ऐसे बड़े ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करना आसान नहीं होता। 2003 इराक वॉर के बाद भी इराक के तेल सिस्टम को पूरी तरह ठीक होने में दो साल से ज्यादा समय लगा था, जबकि उस पर अरबों डॉलर खर्च किए गए थे।

इसी तरह Russia-Ukraine War में भी यूक्रेन के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने में काफी देरी हो रही है, क्योंकि उपकरणों की कमी और लॉजिस्टिक्स की समस्याएं सामने आ रही हैं। इससे यह साफ है कि South Pars को पूरी तरह से ठीक होने में भी लंबा समय लग सकता है।

कतर का Ras Laffan Industrial City क्यों है अहम

ईरान ने कतर के Ras Laffan Industrial City पर हमला किया है, जो दुनिया का सबसे बड़ा LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) एक्सपोर्ट हब है। यहां से हर साल 77–80 मिलियन टन LNG बाहर जाता है, जो दुनिया के कुल LNG ट्रेड का करीब 20% है। यानी अगर यहां कोई दिक्कत आती है, तो एशिया और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में गैस की कमी हो सकती है।

इसके अलावा UAE में Habshan Gas Processing Plant भी प्रभावित हुआ है, जो रोज़ाना बहुत बड़ी मात्रा में गैस प्रोसेस करता है। इसका बंद होना यह दिखाता है कि खतरा सिर्फ एक-दो जगह नहीं, बल्कि पूरे Gulf region के एनर्जी नेटवर्क पर है।

इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह सऊदी अरब, UAE और कतर के बड़े तेल और गैस ठिकानों को निशाना बना सकता है। रियाद में धमाकों की खबरें भी सामने आई हैं। कतर ने इजराइल के इस हमले को खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना बताया, जबकि UAE ने कहा कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई दोनों को खतरा है।

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